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पानी शरीर के लिए क्यों जरूरी है—जाने प्रदूषित जल कैसे हैं सेहत के लिए हानिकारक (Why Is Water Important For Our Body In Hindi)

कौवे ने पानी पिया और खुशी-खुशी अपने घर की ओर उड़ चला” प्यासे कौवै की कहानी पानी के महत्व को दर्शाती है क्योंकि कौवे को भी प्यास बुझाने के लिए कोई न कोई उपाय ढूंढना ही पड़ा। जब बात हमारी आती है, तो हमारा शरीर 70% पानी से बना है और ऐसे में पानी अपने आप हमारे लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। एक स्लोवाकियाई कहावत हमें स्वास्थ्य के लिए पानी के महत्व का पाठ पढ़ाती है “शुध्द पानी संसार में पहली और सबसे महत्त्वपूर्ण औषधी है” तो आइए जानते हैं पानी पीना क्यों आवश्यक है।

लेख की विषय सूची

1. मानव शरीर के लिए पानी का महत्व (Importance of Water for the Human Body in Hindi)

2. स्वास्थ्य के लिए पानी का महत्व (Importance of Water for Health in Hindi)

3. हमारे आहार में पानी का महत्व (Importance of Water in our Diet in Hindi)

4. पानी पीने के फायदें (Benefits of Drinking Water in Hindi)

5. पेय जल के मानक (Drinking Standards of Water in Hindi)

6. जल प्रदूषण और शुध्दिकरण के उपाय (Water Pollution and Purification Solutions in Hindi)

7. निष्कर्ष (Conclusion)

1. मानव शरीर के लिए पानी का महत्व (Importance of Water for the Human Body in Hindi)

शरीर में पानी के महत्व के साथ ही एक और सवाल उठता है कि यह पानी कहां संचित होता है? मानव शरीर में पानी का महत्व है और इसलिए शरीर विभिन्न प्रकार से इसे शरीर में संचित करता है। कोशिका जैविकी दर्शाती है कि हमारी कोशिकाएं संपूर्ण जल तत्व का 46% समाहित रखती है और अतिरिक्त 23% ब्लड प्लाज्मा और अन्य द्रव के रूप में शरीर में संचित होता है। शरीर में पानी का वास्तविक महत्व हमारी प्यास बुझाने के बाद शुरू होता है।

– सेल लाइफ तभी तक सक्रिय रह सकती है जब-तक की उसमें पर्याप्त मात्रा में पानी हो।

– हमारे आहार में पानी का विशेष महत्व है क्योंकि भोजन का बायोकेमिकल ब्रेकडाउन हाड्रोलेसिस की प्रतिक्रिया से शुरू होता है, जिसमें पानी सबसे अधिक महत्वपूर्ण तत्व है।

– स्वास्थ्य के लिए पानी का महत्व इसलिए है क्योंकि रक्त के माध्यम से ही पौष्टिक तत्व पूरे शरीर में संचारित होते हैं और इसमें पानी ही विशेष तत्व होता है।

– पानी पीने का महत्व यह भी है कि इससे शरीर से हानिकारक टोक्सिन बाहर निकल जाते हैं और ‌बिना पानी के मूत्र के माध्यम से गंदगी का बाहर निकलना संभव नहीं है।

– शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखने के लिए पानी पीना बहुत आवश्यक है।

2. स्वास्थ्य के लिए पानी का महत्व (Importance of Water for Health in Hindi)

स्वास्थ्य के लिए पानी का महत्व जानने के लिए आइए जानते हैं कि क्या होगा अगर हम पानी न पीएं तो!

1 दिन - टोक्सिन जमा होने के कारण पेशाब का रंग गाढ़ा हो जाएगा और होंठ व‌ मुंह सूखने लगेगा, आपको लगेगा कि आपको भूख लगी है जबकि वास्तव में आपको प्यास लगी होगी।

3 दिन - बिना पानी के आपका मस्तिष्क भ्रमित हो जाता है, शरीर से विषाक्त पदार्थ निकलने बंद हो जाते हैं, विटामिन, मिनिरल्स और इलैकट्रोलाइट अपना संतुलन खो देते हैं। मांसपेशियां निष्क्रिय होने लगती है, जी मिचलाता है और ‌हृदय‌ दर में नाटकीय बढ़ोतरी होती है।

5 दिन - पानी की कमी के कारण शरीर एसिडिटी, हार्ट बर्न और जोड़ों में दर्द के कारण सिकुड़ने लगता है।

7 दिन - बिना पानी के दिमाग सही तरह काम नहीं कर पाता है और अंग ठीक प्रकार से काम नहीं कर पाते हैं।‌ इसलिए हमारे आहार में पानी का महत्व सीधे या परोक्ष रूप से असम अंगों के सक्रिय रूप से काम करने के लिए विशेष महत्व रखता है जैसे कि पाचन-तंत्र, संज्ञानात्मक क्रिया और‌ हृदय गति आदि।

3. हमारे आहार में पानी का महत्व (Importance of Water in our Diet in Hindi)

रोज़ाना पानी पीने का क्या महत्व है? हमारे शरीर में सांस लेने, पेशाब, पसीने आदि क्रियाओं के लिए पानी की आवश्यकता होती है और इसी में शरीर पानी का इस्तेमाल करता है। नीचे उम्र व लिंग के अनुसार रोज़ाना कितनी मात्रा में पानी पीना चाहिए यह बताया गया है।

हमारे आहार में पानी का स्रोत

प्राथमिक स्रोत - शरीर में पानी का ‌विशेष महत्व है और इसका सबसे पहला स्रोत है एक ग्लास शुद्ध जल।

द्वितीय स्रोत - दूध, जूस, एनर्जी ड्रिंक, चाय और कॉफी जैसे पौष्टिक तरल पदार्थ एक ही समय पर शरीर में पानी और पौष्टिक तत्वों की कमी को पूरा करते हैं।

तृतीय स्त्रोत - तरबूज, टमाटर, वाटर एप्पल जैसी फल और सब्ज़ियों में 90% पानी होता है और यह पेट तो भरती ही है, साथ ही शरीर में पानी की कमी पूरी करती है और शरीर का संतुलित वज़न बनाएँ रखती है।

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टिप्स

– पानी की कितनी मात्रा का सेवन किया है यह जांचने के लिए आप वाटर ट्रेकर बोतल ख़रीद सकते हैं।

– कई नए ऐप्स भी है जिसके माध्यम से आप जांच कर सकते है कि आपने पानी की कितनी मात्रा को ग्रहण किया है।

– अपने आहार में पानी की कमी पूरी करने के लिए तरबूज, नींबू, नारंगी और लाइमस आदि को सम्मिलित करें।

– समय समय पर चाय और कॉफी, एनर्जी ड्रिंक वह जूस पीकर शरीर में पानी की कमी पूरी करें।

– एल्कलाइन वाटर प्यूरीफायर का विकल्प चुनें, जो पेयजल के सभी पौष्टिक लाभों को संचित करने का लक्ष्य रखता है।

अतिरिक्त सूचना -

स्वास्थ्य के लिए पानी का महत्व जापानी वाटर थैरेपी में देखा जा सकता है। यह नियम बहुत सरल है सुबह उठकर, दांत साफ करके चार ग्लास पानी पीएं और इसके बाद पानी पीने और कुछ खाने से पहले 45 मीनट इंतजार करें। भोजन करने के बाद अगले दो घंटों तक पानी का सेवन न करें। जापानी तकनीक से पानी पीने का फायदा यह है कि इससे आपको बदन दर्द, सरदर्द,मिरगी ,अतिरिक्त वसा, बवासीर, मासिक धर्म की समस्या आदि से छुटकारा मिलेगा और हृदय भी स्वस्थ रहेगा।

आध्यात्मिक प्रभाव -

मासारू इमोतो की पुस्तक “द हिडिन मैसेज इन वाटर” भी एक अच्छी ‌किताब है जिसके माध्यम से आपको ‌यह जानकारी मिलेगी कि पानी की एक एक बूंद का सकारात्मक प्रभाव होता है और यह आपके दिमाग, शरीर और आत्मा के लिए चमत्कारी साबित हो सकता है।

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4. पानी पीने के फायदें (Benefits of Drinking Water in Hindi)

प्यास तब‌ लगती है जब पानी की कमी आपके शरीर के वज़न के 1% के बराबर होती है। नीचे नियमित रूप से पानी पीने के फायदों की सूची दी गई है।

1 . पानी पीने से शरीर से टोक्सिन बाहर निकल जाते हैं।

2. शरीर की रंगत बढ़ती है।

3. पानी सबसे अधिक फायदेमंद इसलिए है क्योंकि यह वज़न घटाने में भी सहायक होता है।

4. जोड़ों को लूब्रिकेंट करना, जिससे जोड़े में दर्द कम होता है।

5. मस्तिष्क को सक्रिय और स्वस्थ बनाए रखने के लिए पानी आवश्यक है।

6. पानी पीने से किडनी में पथरी नहीं होती है।

7. शरीर में पानी आवश्यक है क्योंकि यह पाचन-तंत्र को मजबूत बनाता है और हार्ट बर्न और कब्ज से शरीर को राहत पहुँचाता है।

8. शरीर में पानी की अहमियत इस बात से पता चलती है कि यह रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

9. यह तनाव और सरदर्द कम करता है।

10. अगर आप कठिन व्यायाम, गर्म जलवायु, या‌ भारी दवाईयों पर है या गर्भवती हैं या स्तनपान कराने वाली मां है, तो आपको सामान्य मात्रा से अधिक पानी लेना चाहिए क्योंकि यह आपके लिए ज्यादा आवश्यक हो जाता है।

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5. पेय जल के मानक (Drinking Standards of Water in Hindi)

विभिन्न देशों में प्रशासनिक संस्थाओं का गठन किया गया है, जो पानी के स्वास्थ्य लाभों के लिए पेय जल के मानक को निर्धारित करती है।

1 . भारत में पेयजल के मानक का निर्धारण बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड) करती है। जिसका गठन 1983 में किया गया था।

2. जिन देशों में ‌ऐसी प्रशासनिक संस्थाएं नहीं है वहां विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तैयार की गई गाइडलाइंस का पालन किया जाता है।

3. नल के पानी को मात्र उबालना पर्याप्त नहीं है क्योंकि उबालने से जर्म्स मरते हैं, पेस्टिसाइड और खनिज‌ नहीं।

4. सबसे बेहतर तरीका होगा कि पानी पीने से पहले प्योरीफाई किया जाए।

यू.वी फिल्टर के अतिरिक्त नए एल्कलाइन फिल्टर स्वास्थ्य के लिए पानी के महत्व को भली-भांति समझते हैं। मानव शरीर में ‌ रक्त का पीएच‌ स्तर 7.365 है और इसका बने रहना आवश्यक है। लेकिन जिन खाद्य पदार्थों का हम सेवन करते हैं उससे शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ती है और पीएच का स्तर बढ़ने लगता है। एल्कलाइन वाटर शरीर में बढ़े उच्च पीएच स्तर को सामान्य बनाता है और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

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6. जल प्रदूषण और शुध्दिकरण के उपाय (Water Pollution and Purification Solutions in Hindi)

जल को सर्वविलायक कहा जाता है और इसी कारण इसमें कई तरह के तत्व घुल जाते हैं, जिससे प्रदूषण फैलता है। हमारे जल प्राप्त करने के दो स्त्रोत प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं।

1 . भूमिगत जल - विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व में भूमिगत जल का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है और यह प्रथम स्थान पर आता है। इसका यह मतलब हुआ कि कृषि के लिए 60% और 85% पेयजल की पूर्ति जलवाही स्तर से होती है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 1995 में किए गए एक सर्वेक्षण में 16 शहरों से 22 जगहों का पता लगाया था जहां भूमिगत जल औद्योगिक विकास और गंदगी फेंके जाने के कारण दूषित हो गया था।‌

2. भू-पृष्ठजल -

-भारत में जल के चार मुख्य स्त्रोत है नदियां, झील, तालाब और टैंक।

-लगभग 80% भू-पृष्ठजल घरेलू गंदगी उसमें फेंके जाने के कारण प्रदूषित होता है।

-इंडस्ट्री का कचरा, खेती-बाड़ी का कूड़ा और धार्मिक अनुष्ठानों के कारण भी जल प्रदूषण बढ़ता है।

-एक साथ पानी में स्नान करना, प्लास्टिक की थैली और पूजा का सामान नदी में प्रवाहित करना भी प्रदूषण का कारण है।

-नदी के पास मृत शरीर को जलाने से भी जल में प्रदूषण फैलता है क्योंकि मृत शरीर के कण‌ जल में जाते भी हैं और प्रभावित भी किए जाते हैं।

-गंगा सबसे पवित्र नदी मानी जाती है लेकिन यह प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित हो रही है और “गंगा बचाओ” आंदोलन के बावजूद कोई बेहतर परिणाम प्राप्त नहीं हुआ है।

3. प्रदूषित पानी पीने का प्रभाव -

-प्रदूषित पानी पीने से फौरन जी मिचलाना और उल्टी होने लगती है।

-त्वचा पर चकत्ते होना।

-गंदे पानी से होने वाले रोग जैसे कि टायफाइड, कोलेरा, पीलिया आदि हो सकते हैं।

लम्बे समय तक दूषित जल पीने से कैंसर, रिप्रोडक्टिव सिस्टम संबंधी समस्या जैसे कि इनफर्टिलिटी, विकास संबंधी समस्या, लर्निंग डिसएबिलिटी भी हो सकती है।

समाधान -

भारत के जलपुरुष कहे जाने वाले श्री राजेंद्र सिंह ने 2015 में स्टॉकहोम वाटर प्राइज जल के लिए नोबल पुरस्कार जीता था। गांव के लोगों की मदद से उन्होंने राजस्थान में में 20 वर्ष के अंदर 1000 गांवों में 8,600 जोहड़ (पारंपरिक डेम) बनाए हैं। कई नदियां फिर से भरने लगी और जंगल हरे-भरे होने लगे, जिससे तेंदुए वापस जंगल की ओर जाने लगे।

मिस्टर फहाद अल-अतिया ने अपने देश‌ कतार में पानी की बढ़ती मांग निकटतम भविष्य में कैसे सोलर एनर्जी के माध्यम से आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सकती है, इस ओर सबका ध्यान आकृष्ट किया है।

मिस्टर ‌माइकल प्रीचारड ने “लाइफसेवर” नामक बोतल को डिजाइन करके यह उपाय खोजा है की बाढ़, सुनामी ‌जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जब जल प्रदूषण बढ़ जाता है उस स्थिति में लोग इस बोतल का इस्तेमाल करके सेकेंड में पानी को शुद्ध कर सकते हैं और उन्हें साफ पानी पीने के लिए लम्बे समय तक किसी का इंतजार करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। ऐसी ही किसी ख़ोज का फायदा हाल ही में केरल में आई बाढ से प्रभावित लोगों को भी हो सकता था।

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निष्कर्ष (Conclusion)

पानी लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि पानी के लिए ही इतिहास में न जाने कितने युद्ध हुए हैं। अपनी आदतों में बदलाव करके हम‌ जल प्रदूषण को कम कर सकते हैं और साथ ही पानी बचाकर हम उसका उचित उपयोग कर सकते हैं। इस प्रकार पानी शरीर का प्राण तत्व है और यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि जल ही जीवन है।

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