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नॉर्मल डिलीवरी में शिशु बाहर कैसे आता है? आप पर इसका असर

बच्चे का जन्म जब योनि मार्ग द्वारा होता है तब उसे नैचुरल डिलीवरी कहते हैं। वैसे तो हर प्रसूति अपने आप में खास होती है पर हम आपको प्राकृतिक प्रसूती कैसी होती है यह बताएँगे।

1. पहला चरण: गर्भाशय ग्रीव (cevix) का फैलना

यह गर्भवती महिला में उठने वाले संकुचन की ताकत और तीव्रता के ऊपर निर्भर करता है। इसके तीन प्रमुख चरण हैं :-

i) गर्भाशय ग्रीव (cervix) का शुरुवाती आकार बढ़ना

इसमें cervix का आकार बढ़ेगा और वह 3 से 4 cm तक खुलेगा। इस कदम में औसत 6 से 10 घंटे तक लग जाते हैं।

आपको कैसा महसूस होगा?

आपको अनियमित अप्रत्याशित संकुचन महसूस होंगे । पहले इनकी तीव्रता कम होगी पर समय बीतते बीतते आपको इनकी ताकत मह्सूस होने लगेगी। आपके योनि मार्ग से कुछ गुलाबी स्त्राव आएगा और आपके बदन के निचले हिस्से में माहवारी जैसा कड़क दर्द महसूस होगा। आपके योनि मार्ग से पानी भी बह सकता है । पानी का बाहर आना आपको प्रसव के पहले या दूसरे चरण में हो सकता है।

ii) सक्रिय संकुचन- इसमें cervix 4 से 7 cm तक खुलेगा

यह ज़रा संजीदा चरण होता है। इस समय महिलाओं में गंभीर संकुचन होते हैं जिनकी तीव्रता अधिक होती है। यह 3 से 6 घंटे तक चलता है।

आपको कैसा महसूस होगा?

आपको 3 से 5 मिनट के अंतराल पर संकुचन आएंगे। आपको पीठ, पेट के आसपास, और झांघों में काफी दर्द महसूस होगा। योनि मार्ग से गुलाबी/भूरे रंग का स्त्राव बहना बढ़ जायेगा।

अगर आपको बर्दाश्त से बाहर दर्द है तब आपकी रीढ़ की हड्डी में epidural डाला जाता है। इससे आपको प्रसूति के दर्द से निजात मिलेगा ।

iii) अंतिम परिवर्तनकाल -cervix 8 से 10 cm तक खुलेगा

यह चरण 20 मिनट से 2 घंटे तक चलेगा अगर आप पहले बच्चे को जन्म दे रहीं हैं। अगर आप दूसरे शिशु रहीं हैं तो यह जल्दी निपट जायेगा।

आपको कैसा महसूस होगा?

इस चरण में आपको तीव्र संकुचन महसूस होंगे जिनके बीच में 1 से 3 मिनट का अंतराल होगा। आपमें बहुत थकान, चिंता, कमज़ोरी और चक्कर आने लगेंगे।

इस दौरान आपके बदन में ऑक्सीटोसिन नामक हॉर्मोन का सबसे अधिक मात्रा में उत्पादन होता है। इस हॉर्मोन से आपके बदन में cervix को खुलने में मदद मिलती है।

आपके मलाशय पर अत्यधिक ज़ोर पड़ने से साथ ही शिशु के सर बाहर निकलने के कारण आपको शिशु को धक्का देने का बहुत मन करेगा। परन्तु डॉक्टर के हाँ कहने तक बच्चे को धक्का मत दीजियेगा क्योंकि cervix के अधूरे खुलने पर बच्चे का सर अटक सकता है, उसके गले पर ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर पड़ सकता है। इसके कारण उसका सर गले से अलग हो सकता है या फ्रैक्चर होने की सम्भावना भी होती है।

2. दूसरा चरण: बच्चे को धक्का देकर पैदा करना

इस दौरान आपका cervix पूरा खुल जायेगा। पहली बार माँ बन रहीं महिलाओं में आधे घंटे से लेकर 2 घंटे तक का समय लग सकता है। 

आपका गर्भाशय ग्रीव पूरा खुलने पर प्रसूति संकुचन नहीं रुकते। कुछ महिलाओं को उलटी , चक्कर आते हैं। जैसे ही आप धक्का देना शुरू करती हैं तब आपकी सांस फूलने लगेगी। आपमें ज़रा भी ऊर्जा नहीं बचेगी। आपके योनि में अगर चीरा लगाया गया है तब आपकी योनि और मल मार्ग (rectum) पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा और पीड़ा होगी।

डॉक्टर जब आपको धक्का देने के लिए हरी झंडी दे दें तब आप गहरी सांस लेकर पूरी जान से धक्का लगाएं। इस प्रकार धीरे धीरे शिशु का शरीर बाहर आएगा।

3. तीसरा चरण: गर्भनाल (प्लासेंटा) का बाहर आना

इस अद्भुत चरण में आपके शिशु के जन्म के बाद आपके शरीर से रक्त बाहर आ जायेगा। शिशु माँ के शरीर से जिस कड़ी से जुड़ा होता है यह वही होता है। इसे गर्भनाल (afterbirth) भी कहते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटे तक लग सकते हैं।

आप अपने शिशु से मिलने में इतनी लीन होगी की उस असीमित ख़ुशी में आपको कुछ पता भी नहीं चलेगा। आपके डॉक्टर आपको थोड़ा और धक्का देने को कहेंगे। इस प्रकार गर्भनाल (प्लासेंटा) बाहर आ जायेगा। इसमें भी थोड़ा दर्द और असहजता महसूस होगी।

आपको अपने शिशु को स्तन के पास लाने को कहा जायेगा क्योंकि यह आपके गर्भाशय के अंतिम संकुचन पैदा करने में मदद करता है। यह गर्भनाल को शरीर से अलग करने में मदद करता है। जैसे ही आप अपने शिशु को अपनी छाती से लगाएंगी तो आप सब कुछ भूल जाएँगी।

यह आपकी ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत व अमूल्य पल होगा जिसे सिर्फ आप ही महसूस कर सकती हैं।

पूरी प्रक्रिया में पहली बार जन्म देने वाली माँओं को औसत 14 घंटे का समय लगेगा। हालाँकि की इससे ज़्यादा या कम भी हो सकता है। जिन औरतों ने पहले एक बच्चे को जन्म दिया है उनके लिए इस प्रक्रिया में 8 घंटे लगेंगे।

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