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नार्मल डिलीवरी को आसान बनाने के लिए कुछ मददगार टिप्स -


गर्भावस्था के दौरान प्रसव के सामान्य या सिजेरियन होने की संभावना के बारे में सोचने से बचे। बहुत योजनाएं बनाने से भी बचें क्योंकि इस बात की पूरी संभावना है की आप उन्हें पूरा नहीं कर पाएंगे। लगभग 85% गर्भवती महिलाओं में योनि से होने वाले प्रसव की संभावना होती है वहीं केवल 65% महिलाएं इसमें सफल होती है। अगर आप भी उनमें महिलाओं में से हैं, जो सामान्य प्रसव प्रक्रिया से शिशु को जन्म देना चाहती है, तो इन मददगार टिप्स को ज़रूर पढ़ें।

यह है दस मददगार टिप्स –

1. नियमित व्यायाम

गर्भावस्था के दौरान हल्का फुल्का व्यायाम,ना सिर्फ आपके स्टेमिना को बढ़ाता है बल्कि आपको इस दौर के लिए और सक्रिय बनाए रखता है। रोजाना व्यायाम से आपकी पैल्विक मांसपेशियां मजबूत होती है। विशेषकर की केजेल व्यायाम बहुत सहायक होता है। जांघों को मजबूत बनाने के लिए किए जाने वाले व्यायाम, प्रसव पीड़ा के तनाव का सामना करने के लिए मददगार होते हैं। पेल्विक सट्रेचिज और टिल्टस,डिप स्कवाटिंग यह व्यायाम आपके कूल्हों को खोलते हैं और पैल्विक मांसपेशियां को मजबूत बनाते हैं, और आपकी नार्मल डिलीवरी को प्रोत्साहित करते हैं। किसी विशेषज्ञ की देखरेख में यह व्यायाम करें क्योंकि गलत कसरत से आपको और आपके शिशु को नुक्सान हो सकता है। आप प्रिनेटल योग भी कर सकती हैं, जो आपकी लोचशीलता बढ़ाने और श्वास को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। योग आपको शांति और आराम भी देता है।

2. आहार पर ध्यान दें

सही तरीके से खाएं और अच्छा खाएं। आपको अपने वज़न का ध्यान रखना चाहिए, बहुत अधिक वजन बढ़ाना आपके नार्मल डिलीवरी को प्रभावित कर सकता है। कई महिलाएं गर्भावस्था का बहाना बनाकर अधिक वसा युक्त भोजन ग्रहण करती है, जिससे उनका वजन बढ़ता है। अपने खाने की लालसा को नियंत्रित रखें। पोषण आवश्यक है,ना सिर्फ सेहत के लिए बल्कि आपके शिशु के विकास के लिए भी। भोजन आपके शरीर को मजबूत और पोषित करने के लिए आवश्यक है। एक स्वस्थ और पोषित मां गर्भावस्था की चुनौतियां का सामना करने के तैयार और सहज होती है। बहुत सारा पानी पीएं और खूब सारी ताज़ा हरी सब्ज़ियाँ और फल खाए।

3. तनाव से दूर रहें

तनाव, चिड़चिड़ापन और अवसाद से दूर रहें। आपका यह दौर, आपसे शांत और स्थिर रहने की मांग करता है। कई बार तनाव से दूर रहना, मुश्किल होता हैं लेकिन आप फिर भी खुद को शांत रखने का प्रयास करें। गर्भावस्था से जुड़ी अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करें, अच्छी संगति में रहे और अच्छे लोगों के साथ रहें। ऐसे लोगों से दूर रहें जो आपको चिड़चिड़ा और असहज महसूस कराते हैं। याद रखें की यह तनाव आपके शिशु को प्रभावित कर सकता है।

4. श्वास संबंधी व्यायाम करें

गर्भावस्था के दौरान श्वास लेने से संबंधित व्यायाम करना बहुत आवश्यक है क्योंकि प्रसव के दौरान आपको समय समय पर श्वास रोकना होगा। सही और पर्याप्त आक्सिजन शिशु की वृद्धि के लिए अनिवार्य है। इसलिए मैडिटेशन और ब्रिथिंग एक्सरसाइज करें। इससे आप नार्मल डिलीवरी के और करीब आ जाएंगी।

5. खुद को शिक्षित करें

अपने आप को प्रसव और प्रसव पीड़ा की प्रक्रिया के लिए शिक्षित करें। प्राकृतिक तौर पर दर्द को नियंत्रित की तकनीक जैसे ब्रिथिंग और रिलेक्सेशन आदि की जानकारी लें।आप अपने डॉक्टर से सलाह लें सकती है और अपनी जन्म देने से संबंधित सामान्य जानकारी बढ़ाने के लिए प्रिनेटल क्लास में जाएं। ऐसी प्रिनेटल क्लास में जाएं, जहां प्रसव पीड़ा को संभालने की तकनीक सिखाई जाती हो। आप आनलाइन रिसर्च, अच्छी किताबें और साहज पा सकती है।

6. नियमित मालिश

गर्भावस्था के सातवें महीने के बाद आपको नियमित मालिश करनी चाहिए। इससे तनाव कम होता है और गर्भवती मां को प्रसव पीड़ा से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। यह जोड़ों के दर्द और मांशपेशियों के तनाव को कम करने में मदद करता है।

7. प्रसव के लिए सहयोगी लोग ढूंढ़े

अगर आप दवाइयों से मुक्त प्रसव चाहती है, तो यह आपके लिए आवश्यक है कि आप अपने आसपास सहयोगी लोग रखें। आप सोच सकती है कि गर्भावस्था के दौरान आपकी मां, बहनें और परिवार का आपके साथ होना व आपके शिशु को होते हुए देखना ना सिर्फ अच्छा होगा। बल्कि वह आपको प्रोत्साहित भी करेंगे। प्रसव में सहयोगी लोगों का होना बहुत आवश्यक है। इस बात का ध्यान रखें कि आपका ध्यान रखने वाले सहयोगी लोग मजबूत हो।

8. इधर-उधर टहलें,एक जगह ना बैठें

जब आप अस्पताल जाएं तो एक जगह ना बैठें, मानिटरिंग के दौरान आपको टहलने का अवसर मिलता है। चले और स्ट्रेचिंग करें। कूल्हों कि मूवमेंट,बेली डांसिंग,हूला हूं, स्कवाटिंग आदि पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत करके, शिशु को बाहर आने में आसानी करते हैं।

9. अन्तिम चरण

आख़िरी चरण में जब गर्भाशय 7-10 सेंटीमीटर तक फ़ैल जाता है,तब ध्क्का लगने का समय होता है।इस बात का ध्यान रखें कि आपके साथी को इस स्तर पर आपकी सभी जानकारी प्राप्त हो। इस प्रक्रिया के लिए आपको खुले दिमाग का होना होगा। और अपने शिशु के लिए सबकुछ सही चुनें।

10. अपने शरीर पर यकीन रखें

महिलाएं पूर्वजों के जमाने से शिशु को जन्म दे रही है, पुराने समय में मृत्यु दर आज की तुलना में कम होती थी। उनकी प्रसव प्रक्रिया भी आज की तुलना में कम दर्दनाक और ज्यादा आरामदायक होती है।

अपने अद्भुत शरीर पर साहस और विश्वास रखें, सही देखरेख में रहें और अपने शरीर और शिशु को वह करने दें, जो वो करना चाहती है।


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