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पहले 24 घंटों में नवजात शिशु के मल व मूत्र पर ध्यान देना है बेहद जरूरी

 डिलीवरी के बाद, चाहे सामान्य हो या सी-सेक्शन अधिकतर महिलाएं बहुत उलझन में होती है। लेकिन इस समय के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे शिशु को स्तनपान कराया जाना चाहिए और मां को पहले 24 घंटों में शिशु के मूत्र और मल पर भी ध्यान देना चाहिए, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कि सबकुछ सामान्य हो। अगर आप कुछ असामान्य देखें, तो आपको डॉक्टर को इसकी जानकारी अवश्य देनी चाहिए। यह सामान्य भी हो सकता है लेकिन सुरक्षित रहना ज्यादा बेहतर है। यह है कुछ बातें जो आपको ध्यान में रखने कि जरूरत है, अगर आप ने अभी शिशु को जन्म दिया है या जल्द ही देने वाली है।

शिशु के मूत्र में ध्यान देने वाली बातें

आपके शिशु की जिंदगी के शुरुआती 24 घंटे आपको डायपर बदलने का अच्छा अभ्यास करा देंगे। अगर आप अपने शिशु को स्तनपान करा रही हैं तो प्रत्येक दिन छह से आठ गीले डायपर होने की संभावना है। चूंकि फार्मूला मिल्क का सेवन करने वाले शिशु स्तनपान करने वाले शिशुओं की तुलना में अधिक तरल का सेवन करते हैं इसलिए हो सकता है आपको दिन में दस बार डायपर बदलना पड़े।

इस बात की भी संभावना है कि आपका नवजात शिशु पहले 24 घंटों में सिर्फ एक बार पेशाब करे लेकिन यह पूरी तरह सामान्य है। यह संख्या धीरे-धीरे समय के साथ बढ़ेगी और छठे दिन तक, वह दिन में दस बार पेशाब करने लगेंगे।

अगर आप डिस्पोजल डायपर का इस्तेमाल कर रही है तो शायद यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि शिशु दिन में कितनी बार पेशाब कर रहा है। इसलिए सही जानकारी के लिए बेहतर होगा कि आप कपड़े के लंगोट या डायपर का इस्तेमाल करें। यह शिशु के लिए भी सुरक्षित है।

नवजात शिशु के पेशाब को लेकर एक और समस्या जिससे मां परेशानी रहती है वह है रंग। पहले दिन इस बात की संभावना है कि रंग नारंगी/गुलाबी हो। कुछ यह भी महसूस करते हैं कि यह देखने में खून की तरह लगता है। हालांकि यह बीलिरुबीन का उप-उत्पाद है और इस बात का भी संकेत है कि आपके शिशु को अधिक तरल की जरूरत है। रंग धीरे-धीरे हल्के नारंगी, गाड़े पीले, लैम्न यैलो, और अगले कुछ एक दिन में अंत में हल्का पीला हो जाएगा।

सिर्फ लगभग पांच दिन के बाद और पर्याप्त तरल का सेवन करने के बाद भी आपका शिशु प्रत्येक चार घंटे के बाद पेशाब नहीं करता है, तो आपको सुनिश्चित होने के लिए बाल-रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने के ज़रुरत है।

शिशु के मल में ध्यान देने वाली बातें

यह एक तथ्य है जो हर कोई समझता है की नवजात शिशु के मल त्याग करने का पैटर्न व्यस्कों से भिन्न होता है। इसकी नियमितता और आवृत्ति एक शिशु से दूसरे शिशु से भिन्न होती है क्योंकि यह शिशु को स्तनपान कराए जाने वाले विभिन्न कारकों पर भी निर्भर करता है।

कुछ शिशु स्तनपान करने के दौरान बाद मल त्याग करते हैं, जो कि सामान्य गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स है, जहां पेट भरने के फौरन बाद सक्रिय हो जाता है। इसमें चिंतित होने की कोई बात नहीं है।

अगर मल बहुत सख्त है या सूखा है, यह दर्शाता है कि आपके बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल नहीं मिल रहा है या उसके शरीर में गर्मी या अन्य बीमारी के कारण तरल की कमी है।

मेरे शिशु का मल कैसा होगा अगर मैं उसे स्तनपान कराती हूं तो?

स्तनपान करने वाले शिशुओं की आँत की गतिविधि भिन्न-भिन्न होती है। कुछ शिशु चार से पांच दिन तक मल त्याग नहीं करते हैं जबकि कुछ हर बार स्तनपान करने के बाद मल त्याग करते हैं।

कोलेस्ट्रोम, जो आपका पहला दूध होता है वह आपके नवजात को विभिन्न संक्रमण से बचाने के लिए संरक्षण प्रदान करता है और साथ ही लैक्सेटिव के रूप में काम करता है। सबसे पहले मल का रंग आपको अचंभित कर सकता है। यह आमतौर पर गाढ़े काले-हरे रंग का और चिपचिपा होता है। इसे मैकोनियम कहा जाता है जो शिशु के आँत में जन्म से पहले उपस्थित होता है। कोलेस्ट्रोम जो पीला दूध है, यह आपके शिशु के शरीर से मैकोनियम को बाहर करने में मदद करता है। इसलिए मल अब भी मेकोनियम और दूध का मिश्रण होता है और मल हरे और पीले रंग का होगा। धीरे-धीरे यह सामान्य होता है। अगर शिशु स्तनपान करता है, तो मल सामान्यतया छोटे बीज जैसे कणों के साथ हल्का पीला होता हैं और इसमें हल्की गंध होती है। कभी-कभार नवजात शिशु के मल को उसकी सरंचना के कारण दस्त मान लिया जाता है।

मेरे शिशु का मल कैसा होगा अगर मैं उन्हें फार्मूला मिल्क का सेवन कराती हूं तो?

अगर आप अपने शिशु को बोतल से दूध पिलाती है, तो वह दिन में कुछ एक बार मल त्याग करते हैं लेकिन जैसा की हमने कहा, हर शिशु के मल त्याग का पैटर्न अलग होता है। फार्मूला मिल्क का सेवन करने वाले दिन में कई बार मल त्याग कर सकते हैं या दिन में सिर्फ एक बार भी मल त्याग कर सकते हैं। अगर शिशु फार्मूला मिल्क का सेवन करता है तो मल का रंग गाढ़ा या पीला हो सकता है। हो सकता है उनके मल में दंत-मंजन सा गाढ़ापन हो, वह वयस्कों के मल की तरह गाढ़ा हो सकता है और उसमें तेज़ दुर्गंध हो सकती है। चूंकि फार्मूला मिल्क स्तनो के दूध की भांति पूरी तरह नहीं पचता है इसलिए फार्मूला मिल्क पीने वाले शिशुओं को स्तनपान करने वाले शिशुओं की तुलना में कब्ज़ होने की अधिक संभावना होती है।

डॉक्टर से परामर्श कब लेना चाहिए? 

सामान्य तौर पर पहले 24 घंटों में अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं लेकिन नीचे बताई गई कुछ स्थितियों में आपको डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

अगर आपके शिशु को पेशाब करने में तकलीफ़ हो, यह संक्रमण का संकेत हो सकता है और इसमें फौरन डॉक्टर से परामर्श लेने की आवश्यकता होती है।

अगर पेशाब में गुलाबी रंग बना रहता है

पेशाब में वास्तविक खून, कभी-कभार यह पेट दर्द के कारण होता है

मल में खून और म्यूकस

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