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नई मांओं के लिए मीरा राजपूत कपूर ने दिया परवरिश के यह छह टिप्स


हर मां अपने शिशु के लिए बेहतर मां बनने की कोशिश करती है, जितना वह अपने शिशु के लिए हो सकती है। यह अच्छी मां बनने का सफर है,यह थोड़ा भ्रामक और तनावपूर्ण हो सकता है। शाहिद कपूर की पत्नी मीरा राजपूत कपूर ने स्वयं एक किताब लिखी है “ Eat, Delete, Junior”, हाल ही में “Vogue” को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने बताया की अपनी एक साल की बेटी मिशा की देखभाल वह कैसे करतीं हैं।

यह इंटरव्यू की कुछ खास बातें:

खुशहाल मां = खुशहाल शिशु

“ खुश रहें और यह अपने आप आपके शिशु तक पहुंच जाएगा” यह सलाह हर समय में सही साबित हुई है और फिर से आज मीरा ने इसका समर्थन किया है। जब आप खुश और स्वस्थ होंगे, इससे आपका शिशु अपने आप खुश महसूस करेगा। आपका शिशु यह महसूस कर सकता है जब आप तनाव में हों या उदास हो इसलिए अपने आसपास के वातावरण को स्वस्थ और खुशहाल बनाने की कोशिश करें।

अपने शिशु को स्तनपान कराएं

“यह सबसे बड़ा तौफा है,जो आप अपने शिशु को दे सकती है और यह मां के लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है “ मीरा ने माना है की स्तनपान कराना मां और बच्चे दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है। स्तन के दूध में वह सभी आवश्यक पौष्टिक तत्व होते हैं,जो शिशु के विकास के लिए आवश्यक है। स्तनपान के दौरान मां को पौष्टिक भोजन खाना चाहिए। तो, जितना आप करा सकती हैं उतना स्तनपान कराने की कोशिश करें।

गर्भावस्था के दौरान सोच-समझकर कर खाए

“ सभी मसालेदार भारतीय और चाइनीज फूड खाने के लिए मेरा मन ललचाता था और इसलिए मिशा को ब्लेंड बेबी फ़ूड से नफ़रत है और उपमा नींबू के साथ उसे बहुत पसंद हैं। और वह चाकलेट जो शाहिद उसे देते हैं। गर्भावस्था के दौरान कभी-कभार चाइनीज फूड खाना कोई गलत बात नहीं है लेकिन वह बिल्कुल सही कह रही हैं, इसका प्रभाव लम्बे समय तक पड़ सकता है अगर आप हर बार अपने खाने की लालसा के अनुसार चलेंगी। इस बात को सुनिश्चित करें की आप अधिकतर पौष्टिक संतुलित आहार लें - कम से कम 85% ।

शिशु का आहार

“यह निर्णय लेना की आपका शिशु क्या खाएगा, उतना ही जरूरी है जितना की उन्हें भोजन खिलाना”। आप रोजाना अपने शिशु को विभिन्न प्रकार का भोजन दें सकती है। इसका मतलब है की अपने शिशु के प्रत्येक दिन के मेन्यू में फूड चार्ट के विभिन्न हिस्से शामिल करना। उन्होंने यह भी सलाह दी है की भोजन को और दिलचस्प बनाने के लिए आप एक को दूसरे के साथ मिश्रित कर सकते हैं।

इसे सामान्य रखें

“ मैं मिशा को रात के खाने में काले और क्विनावा नहीं देना चाहती हूं और मैं इसे आगे ले जाने में सक्षम नहीं होंगी, अगर मैं सफर कर रही हूं या मैं किसी और के घर पर हूं। मेरे अनुसार आहार कुछ ऐसा होना चाहिए,जो सामान्य और सुपाच्य हो, खासतौर पर अगर आप शिशु है तों”। उनका कहना है की आप शिशु के आहार को सामान्य रखें ताकि जब आप घर पर ना हो, तो आपको इसे बदलने की जरूरत ना पड़े। इसका मतलब यह है की ऐसी साम्रगी का इस्तेमाल करें जो हर जगह उपलब्ध हो।

कोई भी किताब ना पड़े

“ सबसे बेहतर सलाह जो मुझे मिली, वह थी कि कोई भी किताब मत पड़ो”। यह सच है आपको किताबों से बहुत सी जानकारी मिलेगी,जिसकी आपको जरूरत नहीं है। सबसे बेहतर चीज़ जो आप कर सकते हैं वह है अपनी मां,बहन और दोस्तों की सलाह लेना, जिनके पहले से ही बच्चे हो। आप चाहें तो परवरिश से संबंधित सलाह के लिए मौम ग्रूप या फोर्मस में भी शामिल हो सकती हैं। यह सलाह किताबों द्वारा मिलने वाली सलाह से कहीं अधिक मूल्यवान होती है, खासतौर पर तब जब कोई ऐसा हो जिसे अनुभव हो आप किस दौर से गुजर रही है।

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