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नवजात शिशु को पानी कब, कितना और कैसे पिलाएं- जानें सही उम्र

   बड़े लोगों की तरह बच्चों को भी प्यास लगती है लेकिन इससे पहले कि आप अपने नवजात शिशु को पानी पिलाने के लिए वो बोतल उठाएं हमें बताने का मौका दें की एक 6 महीने के बच्चे को पानी पीने की कोई आवश्यकता नहीं होती खासकर जब उन्हें स्तनपान करवाया गया हो| बात तो ये है की दुनिया भर के डॉक्टर नजात शिशु को पानी पिलाने के ख़िलाफ़ हैं क्योंकि पानी पिलाने से उन्हें डाईरीआ और मैल्नूट्रिशन होने का खतरा रहता है इसके इलावा उन्हें वाटर इंटोक्सिकेशन होने का भी ख़तरा रहता है| बच्चे के शरीर में पानी और अन्य पोषण की खपत उसकी माँ का दूध पूरा कर देता है|

नवजात शिशुओं को पानी की आवश्यकता क्यों नहीं होती?

 

स्तन के दूध में पानी की भारी मात्रा पायी जाती है- असल में दूध का 80% हिस्सा पानी होता है और इसी कारण नवजात शिशु की प्यास बुझाने के साथ उसे पोषण देने का सबसे अच्छा तरीका है उसे स्तनपान कराना| इसके साथ स्तन के दूध में कई एंटीबॉडीज़ पाए जाते हैं जो आपके बच्चे को इंफेक्शन से दूर रखने के साथ उसका इम्यून सिस्टम भी मज़बूत करता है| दुर्भाग्य से पानी में ना कोई प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट, विटामिन, एंजाइम या एंटीबॉडीज पाए जाते हैं जो की स्तन के दूध और फार्मूला मिल्क में पाए जाते हैं| पानी बच्चे की प्यास बुझाने के इलावा और कोई फायदा नहीं पहुँचा सकता|

बच्चे को पानी पिलाने के लिए कमसेकम 6 महीनों का इंतेज़ार करें

स्तनपान करने वाले बच्चों को पानी पीने की कोई आवश्यकता नहीं होती जब तक की वो कुछ खाना ना शुरू करदें और बच्चों को जबकि 6 महीनों बाद खाना खिलाने की अनुमति दी जाती है तो वो समय पानी पिलाने का बिलकुल सही है|

क्या करें अगर बहुत गर्मी का समय हो?

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन इस बात से सकती से मना करता है की 6 महीने के नीचे के बच्चों को पानी पिलाया जाए चाहे वो कितना भी गरम दिन क्यों ना हो और ये इसलिए क्योंकि पानी पिलाने से उन्हें इन्फेक्शन और मैल्नूट्रिशन होने का खतरा रहता है| गर्मी के दिनों में स्तनपान की जगह पानी को ना दें लेकिन अगर आपका बच्चा फार्मूला मिल्क पिता हो और उसे बहुत पसीने आते हों तो दूध पिलाने के बीच आप उससे पानी की कुछ घूँटें दे सकती हैं लेकिन कोशिश करें की पानी की जगह आप अपने बच्चे को फार्मूला मिल्क या स्तनपान कराएं|

नवजात शिशु को पानी पिलाने के नुक्सान

डाईरीआ: नवजात शिशु को पानी ना पिलाने की सबसे बड़ी वजह है उसे इन्फेक्शन से दूर रखना| यदि उसे दिया जाने वाला पानी या बर्तन जिसमें उसे पानी दिया जा रहा है हल्का सा भी गन्दा हो तो बच्चे को डाईरीआ होने का डर रहता है|

मैल्नूट्रिशन: आप पानी की स्वच्ता को लेकर कितना भी सुरक्षित क्यों ना महसूस करें लेकिन फिर भी आप अपने बच्चे को नुक्सान पहुँचा सकती हैं| पूछिए क्यों? क्योंकि पानी बच्चे के छोटे से पेट को पूरी तरह भर देगा और इस कारण वो माँ का दूध या फार्मूला मिल्क सही ढंग से नहीं पी पाएंगे| पानी पीना शुरू करने के बाद कुछ बच्चे वक़्त से पहले दूध पीना छोड़ सकते हैं|

आपके स्तन के दूध में कमी आना: ये एक अलग परेशानी है बच्चे के कम दूध पीने के कारण| बच्चे के कम दूध पीने के कारण आपका शरीर भी कम मात्रा में दूध बनाना शुरू करदेगा और इस कारण बच्चे को मैल्नूट्रिशन होने का खतरा रहता है|

बच्चे में पानी पीने की आदत डालना

6 महीने से छोटे बच्चों के लिए फार्मूला मिल्क बनाने के लिए हमेशा उबला हुआ पानी इस्तेमाल करें|

यदि आपको पूरा यकीन है की पानी गन्दा नहीं है तो 6 महीने के ऊपर उम्र के बच्चों को उबला हुआ पानी पिलाने की वैसी कोई आवश्यकता नहीं है|

अपने बच्चे को बाहर के पानी ना पिलाएं| ये ज़रूर आपको पानी ना उबालने की आवश्यकता से बचाएगा लेकिन बाहर का बोटल्ड वाटर में भारी मात्रा में सोडियम और सल्फेट पाए जाते हैं जिसका पीना बच्चे की सेहत के लिए सही नहीं होता|

इन बातों को ध्यान में रखें और कोशिश करें की आप अपने बच्चे को पानी पिलाना 6 महीने की उम्र के बाद शुरू करें, इस ब्लॉग को दूसरी महिलाओं के साथ श्री कर के उन्हें भी शिक्षित करें!

 

 

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