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नवजात शिशु के दांत निकलने के लक्षण


  घर में जब एक नन्हा मेहमान आता है, तो वह ज़िन्दगी भर के लिए हमारे लिए हमारे ख़ुशी का कारण बन जाता है। एक बच्चा न सिर्फ हमारे ख़ुशी का कारण बनता है, बल्कि हमारे आपसी रिश्तों को जोड़ता है और उसे और गहरा बनाता है। हम भी उन्हीं के आसपास अपनी ज़िन्दगी का तानाबाना बुनने लगते हैं। अपने बच्चों को बड़े होते देखना, उनके नन्हे-नन्हे कदमों से उछल -कूद करते देखना, छोटी छोटी शैतानियों को देखना, उनकी ख़ुशी में खुश होना हर माँ-बाप के जीने की एक ठोस वजह बन जाता है। पर तब क्या जब आपके दिल के टुकड़े को कुछ परेशानी होती है और वह कुछ कह नहीं पाता। माँ-बाप की जान निकल जाती है, जब वह अपने बच्चों को तकलीफ में देखते हैं, खासकर जब आपका बच्चा नवजात हो जो ठीक तरह से अपने परेशानियों को बता न पाता हो। चाहे पेट दर्द हो, बुखार हो या दांत आने वाली तकलीफें, मुश्किल तब और ज़्यादा बढ़ जाती है जब आप उन्हें समझ नहीं पाते।

नवजात शिशु के पालन-पोषण में माँ-बाप को थोड़ी ज़्यादा सजगता बर्तनी चाहिए, क्यूंकि यह उनका सबसे नाज़ुक वक़्त होता है, यही वक़्त होता है जब बच्चे का शारीरिक और मानसिक दोनों विकास होता है। इसके साथ-साथ बहुत सी स्वास्थ संबंधी परेशानियां भी होती है जो बच्चे के लिए बहुत ही कष्टदायक होती है और उन्हीं में से एक है दांत निकलना।

दांत निकलने का सही समय.

शिशु के दांत निकलने का एक निश्चित समय होता है। दांत निकलने का सही समय तीन महीने से एक साल के बीच का होता है, अगर किसी बच्चे को दांत निकलने में देरी हो तो उसमें घबराने की बात नहीं है। बहुत से बच्चों को दांत देर से भी आते है। सबसे पहले 4 से 7 महीने के बीच बच्चो को नीचे के दांत आते है, फिर बाद में ऊपर के दांत आते हैं।

मसूड़ों का सख्त या सूझ जाना

मसूड़ों का सूझ जाना, सख्त हो जाना या फूल जाना दांत आने का एक बहुत ही आम और कष्टदायाक लक्षण है। इस दौरान बच्चे के मसूड़ों में खुजली व सिहरन होती है, और यही  कारण है जब वह कोई भी चीज़ उठाकर चबाने लगते है। अगर आप सोचते हैं की आपका बच्चा कुछ भी उठाकर खाने लगता है तो यह उसकी बदमाशी है, तो आप गलत हैं। यह उसकी बदमाशी नहीं बल्कि, बेचारे की मज़बूरी है जो अपने समस्या को आपके सामने व्यक्त नहीं कर पाता। इस कारण वह बहुत ही ज़्यादा चिड़चिड़ा भी हो जाता है।

बचाव या उपाय- उनके आराम के लिए आप अपने बच्चों को टीथर दे सकते हैं, परन्तु याद रखे की आप टीथर को पहले अच्छे से सटर्लाइज़ कर लें, ताकि आपके बच्चे को कोई इन्फेक्शन न हो।

डायरिया या लूज़ मोशन होना

यह भी एक बहुत ही आम पर चिंताजनक बात है। इस दौरान बच्चे को पेट का इन्फेक्शन हो सकता है जिससे उसे लगातार उलटी और लूज़ मोशन हो सकता है, जिससे उसके शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है। इसके साथ-साथ वह कमज़ोर भी हो सकते हैं।

बचाव या उपाय- बार-बार उल्टी या लूज़ मोशन होने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिए अपने बच्चे को ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिलायें। आप अपने बच्चे को केला, उबला हुआ सेब, जूस, दाल या हलकी-फुल्की और नरम चीज़ें दे सकते हैं। सर्दियों के मौसम में बच्चों को धुप में ज़रूर सुलाएं जिससे आपके बच्चे को विटामिन डी मिले और धुप से आपके बच्चों का इम्यून पॉवर भी काफी हद तक ठीक होता है।

बुख़ार

दांत निकलने के वक़्त बुख़ार आना भी एक आम लक्षण है। इस दौरान बच्चे को सरदर्द, चिड़चिड़ापन, कमज़ोरी, थकान या सिहरन हो सकता है, यहां तक की उलटी भी हो सकती है। इस दौरान आप हर एक घंटे के अंतराल पर अपने बच्चे का टेम्परेचर चेक करें और एक टेम्परेचर चार्ट बना लें।

उपाय या बचाव - बुख़ार ज़्यादा हो तो सर पर ठंडे पानी की पट्टी ज़रूर दें और वक़्त रहते डॉक्टर से परामर्श भी लें। ध्यान रहे की जब आप डॉक्टर के पास जाएं तो अपने बच्चे का टेम्परेचर चार्ट ज़रूर दिखाएं।

सर्दी या ज़ुकाम होना

यह भी एक बहुत आम लक्षण हो सकता है, जिसको कभी-कभी आप अनदेखा भी कर जाते हैं। बच्चे का नाक बहना या छींकने को हल्के में न लें, यह इन्फेक्शन के कारण भी हो सकते हैं।

बचाव या उपाय - सर्दी या ज़ुकाम के वक़्त बच्चे को गुनगुने पानी से नहलाये या अगर नहीं भी नहलाते हैं तो आप गुनगुने पानी से उसके हाथ-पैर पोछ सकते हैं। कोशिश करें की अपने बच्चे को ज़्यादा भीड़भाड़ वाले जगह में न ले जाएं। घर को अच्छे से साफ़ रखें, ध्यान रहे घर में कहीं भी धुल-मिट्टी न हो। नाक ज़्यादा जाम रहे तो डॉक्टर से परामर्श लेकर नेज़ल ड्र्रोप ज़रूर दिलवाएं।

इन सबके के अलावा भूख न लगना, चिड़चिड़ाहट , लार गिरना, दांत काटना, कोई भी चीज़ चबाना भी दांत आने के लक्षण हो सकते हैं। इन सब चीज़ों से आप घबराएं बिलकुल भी नहीं, बस इतना समझे की यह आपके बच्चे के साथ-साथ आपकी भी परीक्षा की घड़ी है। तो धैर्य एवं धीरज से काम लें, बस कुछ वक़्त की बात है उसके बाद आपके बच्चे की हंसी और किलकारियां और ज़्यादा होने वाली हैं।

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