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मदर्स डे स्पेशल, हर मां को समर्पित एक बेटी के अहसास

माँ....सृजन मातृत्व का......एक शब्द जिसमें समाया है सम्पूर्ण संसार, सम्पूर्ण सहित्य और सम्पूर्ण मैं .....

मैंने जन्म लिया ....माँ से ही एक बार नहीं..अपितु कई बार ...

जब मैं हार गई थी जीवन से, और तब जब मैं बन गई थी निर्जीव पूर्णतः

तब माँ ही थी, जो मुझमें जान फूंकते गई ....और फिर से जीने को, संघर्षों से लड़ने को मुझे और बड़ा करती गई !

माँ कहाँ से लाई हो तुम, वो कला जो मेरे चेहरे को एक पल में ही पढ़ लेती है.....

और जान लेती है, के क्या चल रहा है मेरे भीतर!

फिर भी, चुप रहती हो ....जानती हो के तुम्हारा अंश कभी गलत नहीं हो सकता.....

जब तक तुम हो तुम्हारा अहसास है ....आखिर तुम्हारे विश्वास का ही तो हिस्सा हूँ मैं ...

तुम जानती हो मैं हर सपने को पूरा कर लूंगी ....क्यूँकि ! तुम्हारा विश्वास है मुझमें .....

माँ ......तुम्हें परिभाषित करना व्यर्थ की बात है ....आखिर मैं तुम्हारे द्वारा ही संचित हूँ

माँ.....तुमने मुझे संस्कार दिये, ताकि मेरा स्वाभिमान कभी अभिमान में परिवर्तित ना हो पाये.....

तुमने मुझे शिक्षित किया, हौसला दिया, संघर्षों से लड़ने के लिये .....तुमने सिखाया है दृढ़ होकर, संसार का सामना करना ....

किंतु फिर भी, नम्र रखना अपने स्वभाव को....

और दिया है तुमने ढेर सारा प्रेम, जिसने बनाया है मेरे अस्तित्व को, और भी उज्ज्लव और भी प्रकाशमान....

माँ मैं तुम्हारी परछाई हूँ........फिर भी तुम्हें विशेष पहचान मैं दूँगी...स्वयं के द्वारा तुम्हारे सपनों को पूरा करके.....

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