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सिर्फ पैड और टैंपोन ही नहीं...पीरियड के दौरान इसका भी इस्तेमाल कर रही हैं महिलाएं

महिलाओं का पीरियड्स जिसे हिंदी में हम मासिक धर्म भी कहते हैं। यह इतना कठिन समय होता है जिसका दर्द सिर्फ एक महिला ही समझ सकती है। एक ज़माना था महिलाएं अपने कठिन दिनों में कपड़े का इस्तेमाल करती थीं। लेकिन धीरे-धीरे ज़माना दला और महिलाएं कपड़े से सैनिटरी पैड पर आईं।

यही कारण है कि आज सैनिटरी पैड सभी महिलाओं में पॉपुलर हैं और हर लड़की इनका प्रयोग करती हैं। लेकिन धीरे-धीरे इसमें और विकास आया जिसके बाद टैंपोन का निर्माण किया गया। यह पैड नहीं होता, इसे आपको योनि के अंदर डालना होता है जो रक्त को बाहर निकलने से पहले ही सोख लेता है।

अब इसके अलावा आजकल मेन्सट्रुअल कप्स का इस्तेमाल किया जाने लगा है। जिन्हें नहीं पता उनकी जानकारी के लिए बता दें कि मेंस्ट्रुअल कप्स मेडिकल-ग्रेड सिलिकॉन से बने होते हैं जो बेल के आकार के होते हैं। यह काफी फ्लेक्सिबल होते हैं जो वेजाइना में आसानी से चले जाते हैं। लेकिन इसे लेकर कई महिलाओं के मन में काफी सारे सवाल होते हैं। आज हम आपको उन सवालों के जवाब देंगे...

कैसे होता है मेंस्ट्रुअल कप्स इस्तेमाल?

 

 

 

  सबसे पहला सवाल तो महिलाओं के मन में यही होता है कि इसका इस्तेमाल किया कैसे जाता है? तो आपको बता दें कि सबसे पहले मेंस्ट्रुअल कप्स को सी-शेप में फोल्ड करें। फिर इसे अपनी वेजाइना में धीरे-धीरे डालें। इसे लगाते ही ये खुद-ब-खुद वैजाइना की बाहरी लेयर में फिट हो जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि यह आपकी योनि को पूरी तरह से सील कर देगा। इसको लगाने के बाद इसे हल्का सा घुमाकर देखें कि क्या ये ठीक से लग पाया है या नहीं। ठीक से लगाने के बाद आपको इसे 12 घंटों तक बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

मेंस्ट्रुअल कप्स का फायदा

 

 

  आपको तो पता ही होगा कि सैनिटरी नैपकिन और टैंपोन में लगा रक्त आपके वैजाइना के आसपास लगा रहता है लेकिन मेंस्ट्रुअल कप्स के साथ ऐसा नहीं होता। इसमें रक्त कप में इकठ्ठा होता रहता है, जिस वजह से कभी भी टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम नहीं होता। आपको बता दें कि टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (TSS) एक रेयर बैक्टीरियल बीमारी है जो लंबे समय तक गीले पैड और टैम्पॉन के इस्तेमाल से हो सकती है।

 

 

  आपको बता दें कि डॉक्टर्स भी मेंस्ट्रुअल कप्स को वेजाइनल हेल्थ के लिए काफी अच्छा मानते हैं। एक डॉक्टर का कहना है कि ये वैजाइनल हेल्थ के लिए काफी अच्छे होते हैं और इसकी खास बात ये है कि इन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है। 

 

इसी के साथ ये ज्यादा महंगे भी नहीं होते। वातावरण के लिहाज से भी ये काफी इको फ्रेंडली हैं क्योंकि ये वातावरण दूषित नहीं करते। इसके अलावा इनसे वैजाइनल इन्फेक्शन का खतरा भी काफी कम हो जाता है।

आप इन कप्स का इस्तेमाल 4 से पांच साल तक कर सकती हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि आप इन्हें हर बार अच्छी तरह सैनिटाइज़ करें। लेकिन ध्यान रहे कि एक कप को एक ही व्यक्ति इस्तेमाल करे। आप इसे हर बार इस्तेमाल के बाद गर्म पानी से अच्छी तरह साफ करें। तभी अगली बार इसका प्रयोग करें। 

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