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मास्टिटिस क्या है जाने इसके लक्षण और रोकथाम के उपाय (Mastitis: Signs, Causes and Treatment: All You Need To Know In Hindi)

पहली बार माँ बनने के बाद बच्चे के बारे में सोचने और देखभाल करने में आप काफी व्यस्त हो जाती हैं। लेकिन इतना व्यस्त होने के बाद भी खुद का ख्याल रखना कभी भी ना भूलें। क्योंकि ऐसी कई समस्याएं हैं जिनको आप नजरअंदाज कर देती है प्रेगनेंसी के समय और प्रेगनेंसी के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। जिसमें सबसे खास बदलाव ब्रेस्ट में होता है, यह बदलाव आपके लिये परेशानी भी बन सकता है। जैसे कि ब्रेस्ट में सूजन आना, दर्द होना इस समस्या को मास्टिटिस कहा जाता है आइये जानते हैं इसके कारणों और रोकथाम के बारे में।

लेख की विषय-सूची

मास्टिटिस क्या है (What is Mastitis in Hindi ?)

मास्टिटिस के कारण (Mastitis Causes in Hindi)

मास्टिटिस के लक्षण (Symptoms of Mastitis in Hindi)

मास्टिटिस की रोकथाम (Preventing Mastitis in Hindi)

मास्टिटिस का इलाज (Treatment for Mastitis in Hindi)

निष्कर्ष (conclusion in Hindi)

मास्टिटिस क्या है (What is Mastitis in Hindi ?)

मास्टिटिस ब्रेस्ट में सूजन को कहा जाता है। यह समस्या डिलीवरी के छह हफ्तों बाद होती है, इसमें ब्रेस्ट में दर्द, लाल होना और गर्मी का आभास होना सूजन का परिणाम होता है। ज्यादातर यह समस्या महिलाओं को डिलीवरी के बाद होती है, लेकिन सामान्य महिलाएं और पुरुष भी इस संक्रमण से पीड़ित हो सकते हैं। इन मामलों को गैर-लैक्टेशनल मास्टिटिस के रूप में जाना जाता है।

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मास्टिटिस के कारण (Mastitis Causes in Hindi)

मास्टिटिस का सबसे महत्वपूर्ण कारण अवरुद्ध दूध की नली है। प्रसव के बाद जब पहली बार मां बनने वाली स्त्री अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीड करवाती है तो कुछ समय ऐसा होता है, जब ब्रेस्ट में मौजूद दूध नलिकाएं पूरी तरह से खाली नहीं होती हैं। इन नलिकाओं में जमा हुआ दूध मास्टिटिस की पहली वजह है। अगर ऐसा कुछ होता है तो इस बारे में काफी सजग रहने की जरुरत होती है, जिसमें नलिका को पहचानना और मास्टिटिस के शुरुआती संकेतों को देखना महत्वपूर्ण है। शुरुआती चरणों में इसकी रोकथाम माँ और बच्चे दोनों के लिए बेहतर है। मास्टिटिस का एक और कारण यह है कि बच्चे के मुंह से दूध नलिकाओं तक जीवाणु फैलाने से भी संक्रमण हो सकता है। जिन नलिकाओं में दूध होता है उनमें बैक्टीरिया हो जाता है। मास्टिटिस से बचने के लिये समय-समय पर बच्चें को फीड करवाना बहुत जरुरी होता है।

मास्टिटिस के लक्षण (Symptoms of Mastitis in Hindi)

मास्टिटिस के ऐसे कई लक्षण हैं जिन्हें आप आसानी से पहचान सकती हैं। अगर आपको कुछ इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

‣ शरीर में दर्द

‣ सूजन

‣ कोमलता

‣ लगातार मास्टिटिस बुखार और उपचार के बाद भी रोगी की स्थिति में कोई सुधार नहीं

‣ स्तन (engorgement)

‣ निप्पल से पस का निकलना का

‣ ब्रेस्ट के अंदर गांठ

‣ ब्रेस्ट के चारों ओर त्वचा में लाली

‣ जलन महसूस होना

‣ निप्पल में दर्द

जब भी आपको इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सावधान हो जायें समय रहते ही इसकी रोकथाम की जाये तो आप क्रोनिक मास्टिटिस से बचने में सक्षम होंगे।

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मास्टिटिस की रोकथाम (Preventing Mastitis in Hindi)

एक कहावत है "रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर है", इसका पालन करना महत्वपूर्ण है और मास्टिटिस संक्रमण को रोकने के लिए आवश्यक सावधानी बरतें। बच्चे को ब्रेस्ट फीड करवाते समय काफी सजग रहने की आवश्यकता होती है, इस तरह की समस्या से बचने के लिये लैक्टेशन विशेषज्ञ से परामर्श लें। दोनों ब्रेस्ट से बराबर ही फीड करवायें, किसी एक ब्रेस्ट से लगातार फीड नहीं करवाये।

1. ब्रेस्टफीड की स्थिति को बदलते रहें

2. बच्चे को ब्रेस्ट से ठीक तरह से ही फीड करवायें

3. ध्रूमपान बिल्कुल नहीं करे

अगर इन बातों का ध्यान रखा जाये तो मास्टिटिस रोकथाम काफी हद तक हो सकती है।

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मास्टिटिस का इलाज (Treatment for Mastitis in Hindi)

मास्टिटिस का इलाज संभव है इसके लिए आप किसी विशेषज्ञ से सलाह लें। इसके अलावा मास्टिटिस को ठीक करने के लिये कई घरेलु उपचार हैं जिससे काफी हद तक आप राहत पा सकते हैं।

मालिश

यदि आप अपनी छाती में कुछ भी असहज महसूसज करते हैं तो मालिश जरुर करें। ज्यादातर मामलों में यह एक प्लग नलिका होती है मालिश से आपको काफी आराम मिलेगा लेकिन किसी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही मालिश करें।

गर्म स्नान

यदि आपको कभी भी अपनी छाती में कठिनाई महसूस होती है तो गर्म पानी से नहायें, या फिर गर्म पानी से शावर लें यह सबसे अच्छा मास्टिटिस उपचारों में से एक है।

गर्म कपड़े से सिकाई

जब आप मास्टिटिस संक्रमित नलिका से पीड़ित होते हैं तो ब्रेस्ट पर सिकाई करने से काफी आराम मिलेगा। इससे ब्रेस्ट के हार्ड स्पॉट पिघलने में मदद मिलेगी। यह अवरोध तोड़ेगा और जिससे दूध को निकालने में आसानी होगी। इसके लिये अपने ब्रेस्ट को गर्म कपड़े से लपेटें। इस प्रक्रिया को कई बार दोहरायें और जब बच्चा फीड करना चाहे, तो आप ब्रेस्ट को साफ और ठंडा करके फीड करवायें।

अपना प्रतिरक्षा तंत्र बेहतर बनाए

मास्टिटिस से बचने के लिये मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली होना बहुत जरुरी है। इसके लिये हेल्दी डाइट लें, तनाव से दूर रहें, योगा करे और विटामिन सी को अपनी डाइट में शामिल करें।

नर्सिंग के दौरान सावधानी बरतें

बच्चे के लिए फीड करवाना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह जरुरी है कि जरुरत से ज्यादा नर्सिंग नहीं करवाना चाहिए। जब आप अपने बच्चे की देखभाल कर रहे हों तो आवश्यक सावधानी बरतें। जैसे कि ब्रेस्ट को साफ रखें यह देखें किसी तरह का कोई इंफेक्शन तो नहीं, अगर बच्चा फीड नहीं करना चाहता है, तो जबरदस्ती ना पिलायें।

क्षतिग्रस्त निपल्स का इलाज करें

क्षतिग्रस्त निपल्स का इलाज करना बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपको कभी लगता है कि आपके निपल्स में दर्द और क्रैकिंग हैं तो लैनोलिन क्रीम का उपयोग करें। इसको ठीक करना बहुत जरुरी है, समय रहते ही डॉक्टर की अवश्य राय लें।

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निष्कर्ष (conclusion in Hindi)

ब्रेस्ट का ध्यान रखना और इसे इंफेक्शन से बचाना बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए इससे बचने के लिए सभी आवश्यक सावधानी और उपचार करें। कभी-कभी मास्टिटिस खतरनाक हो सकता है। यदि आप ब्रेस्टफीड नहीं करवा रही हैं तो भी आप इससे प्रभावित हो सकती हैं किसी भी तरह का दर्द महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। यह एक आम स्थिति नहीं है। किसी भी बीमारी में अगर पहले से ही सचेत हो जायें तो काफी हद तक बीमारी की रोकथाम की जा सकती है। इस बीमारी से बचने के लिये ब्रेस्टफीड करवाने को लेकर सलाह लें, साथ ही किसी भी तरह का ध्रूमपान और अनहेल्दी खाने से बचें। 

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