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उम्र के हर पढ़ाव पर महिला द्वारा किये गये त्याग- क्या हमने और समाज ने कभी गौर किया? यह कैसी शक्ति है?

स्त्री ईश्वर की वह सुन्दर रचना है जिसमें त्याग, स्नेह, भावनाओं और समर्पण भरपूर होता है। स्त्री अनेक भूमिकाओं को बखूबी निभाती है। आज के समय की बात की जाये तो आधुनिक स्त्री घर-परिवार और दफ्तर को भी बखूबी संभालती है। परन्तु महिला त्याग का ही इंसानी रूप है। उनके जन्म से लेकर मरण तक वे कदम कदम पर क़ुरबानी देती। महिला को उम्र के साथ बदलती ज़िम्मेदारियों को बखूबी समझना पड़ता है, उन्हें स्वीकार कर पूरी ईमानदारी के साथ निभाना पड़ता है।

इस लेख में हम अपने पाठकों को स्त्री की बदलती ज़िम्मेदारियों और उनके त्याग के बारे में कुछ ज़रूरी बातें बताना चाहेंगे।

पुत्री के जन्म से कुछ घरों में नाक-भौं सिकुड़ जाते हैं परन्तु साक्षात् देवी का जन्म होना सौभाग्य की बात होती है।

धीरे धीर पुत्री बालिका बन रही होती है। इसी कोमल उम्र से वह अपने घर के सदस्यों की पसंद-नापसंद का ख्याल करने लगती है, खुद से पहले अपने छोटे भाई बहन के बारे में सोच उन्हें अपनी चॉकलेट का टुकड़ा थमा देती है।

बालिका किशोरावस्था की तरफ कदम बढ़ाने के साथ-साथ रसोई के बारे में भी जानने-समझने लगती है। शुरुवात में उसे चाय बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

धीरे धीरे चाय के अलावा लड़की सब्ज़ी, पूड़ी, रोटी और रायता बनाने के साथ साथ घर में कपड़े धोना और साफ़ सफाई जैसे कार्यों में भी हाथ बटाती है।

शारीरिक श्रम के साथ साथ लड़की की मानसिक परिपक्विता भी विकसित होती है। वे घर के अहम् मुद्दों में अपनी राय देती है। लड़की विश्वविद्यालय में अपनी ग्रेजुएशन के लिए दाखिला लेती है और समय पढाई-लिखाई में कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता।

लड़की अब शादी ब्याह लायक हो जाती है और उसके घरवाले उसके लिए काबिल वर ढूंढने लग जाते हैं। यहाँ से शुरु होता है महिला का असली सफर।

अपने घर में नाज़ों से पली नन्ही राजकुमारी विवाह के बाद किसी अनजान घर की अमानत बन जाती है। अब वह एकदम से कई सारे नामों को अपना लेती है जैसे किसी की भाभी बनना, जेठानी, देवरानी, बहु और पत्नी बनना।

महिला की ज़िदगी में शादी के बाद आने वाले बदलाव:

1. उन्हें अपनी स्वतंत्रता को अलविदा कहना पड़ता है

बिन ब्याही लड़की अपनी सखियों के साथ जहाँ जाये घूम सकती है लेकिन शादी के बाद उसे पति के घर के नियम-कानून का पालन करना पड़ता है।

2. महिला को अपनी नौकरी और करियर छोड़ना पड़ता है

शादी से पहले कई महिलाएं अच्छी खासी नौकरी कर रही होती हैं, परन्तु शादी के बाद जहाँ पति काम कर रहा होता है वहीं महिला को भी जाना पड़ता है। ऐसे में अक्सर जब शादी के बाद महिला को पति के साथ दूसरे शहर जाना पड़ता है तो उसे अपनी शिक्षा-दीक्षा के बावजूद नौकरी बदलना पड़ता है।

3. महिला को हमेशा अपने घरवालों की भलाई और गरिमा का ख्याल रखना पड़ता है

विवाह के बाद महिला का हर कदम उसके साथ साथ उसके ससुराल वालों की प्रतिष्ठा को भी प्रभवित करता है। इसलिए महिला को कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले सोचना पड़ता है।

माँ बनने के बाद महिला के त्याग

एक माँ के रुप में महिला हमेशा खुद से पहले अपने शिशु के बारे में सोचती है। अगर घर में की निवाला कम लेता है तो वह माँ ही होती है।

4. माँ अपने शरीर के आकार में परिवर्तन ले आती है

ये तो सबको पता है की गर्भावस्था के दौरन और उसके बाद महिलाओं के शरीर में किस प्रकार वज़न परिवर्तित होता है, रोगों तथा स्वास्थ्य दिक्कतों से ग्रसित होना पड़ता है। इसके बावजूद वह अपने शिशु को गोद में लेकर सभी गम भूल जाती है।

5. महिलाएं अपने लक्ष्यों को पीछे छोड़ जाती हैं

महिलाएं माँ बनने के बाद अपनी रूचि व तमन्नाओं को दबा देती है और अपने शिशु के उज्जवल भविष्य के निर्माण में जुट जाती है। उसकी पल-पल यही ख्वाहिश होती है की उसका बच्चा अच्छा इंसान बनें, व्यवहार कुशल हो और सफलता की सीढ़ी चढ़े।

6. महिला अपने खाली समय में घर के सदस्यों के लिए ही काम करती है

शादी के बाद महिला की ज़िन्दगी यूँ बदल जाती है की उसे सजने सवरने से ज़्यादा पति को ऑफिस और बच्चों को स्कूल उनके टिफिन के साथ भेजना होता है। वह अपने बारे में सोचना ही भूल जाती है। घर की सफाई, कामवाली से काम करवाना, कपड़े धोना, सिलिंडर/दूध के हिसाब करना, खाने पकाने से फुर्सत कहाँ मिलती है?

महिला शादी के बाद अपने मत कम देती है और घर में पति, सास, ससुर और अन्य लोगों के निर्णय को स्वीकारने लगती है।

महिला ज़िद्दी होना कम कर देती है, उसके पहनावे और सहनशीलता में भी परिवर्तन आ जाता है। घर में छोटे कपड़ों से लम्बे कपड़े व साड़ी, सूट पहने जाने लगते हैं, चूड़ियां, बिंदियां, मेहँदी, सिंदूर व मंगलसूत्र महिला के आकर्षण का प्रमुख कारण बन जाते हैं।

महिला बच्चों के बड़े होने के बाद उनकी शादी योग्य लड़के/लड़की से हो इसकी कामना करती है और मरते दम तक उन्ही की सेवा में समर्पित रहती है। शब्द कम पड़ जायेंगे हमारी ज़िन्दगी में महिला के महत्व का गुणगान करते करते इसलिए आपके जीवन की हर स्त्री का आदर करें ।

यह पोस्ट में अपनी बहन, पत्नी, सखी, माँ, भाभी, बहू, पुत्री को टैग अवश्य करें। उनसे जुड़े यादगार और दिल छूने वाले पल हमारे साथ शेयर करें इन कमेंट्स में।

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