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महिलाओं पर गर्भपात के दीर्घकालीन प्रभाव


पैंतालीस वर्ष की उम्र तक पांच में से प्रत्येक दो महिलाओं का गर्भपात हो चुका होता है। शायद यह इन संख्याओं का महत्व है,जो गर्भपात के विवाद को गरमाए रखता है। सिर्फ संयुक्त राज्य में ही प्रत्येक वर्ष 1,300,000 गर्भपात होते हैं। किसी मां, क़रीबी दोस्त या  बहन का ऐसा होना जिनका कभी गर्भपात ना हुआ हो,इसकी संभावना कम है। लगभग सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से गर्भपात से प्रभावित हैं।

इसके पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी जगह सही है। पक्ष कहता है की अनचाहे गर्भ को हटाने का अधिकार महिला को है।  वहीं दूसरी ओर विपक्ष कहता है की गर्भपात मनुष्य हत्या है और इससे महिला को नुक्सान होता है। यह फैसला लेना कठिन होता है की कौन सा पक्ष सही है।

महिलाओं पर पड़ने वाले गर्भपात के दीर्घकालीन प्रभाव :

गर्भपात के प्रभाव महिलाओं पर लम्बे समय तक पड़ सकते हैं। अगर महिला पर कोई प्रभाव शीघ्र नहीं पड़ रहा है तो इसका अर्थ  यह नहीं है की उनपर गर्भपात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। बल्कि दीर्घकालीन प्रभाव किसी अन्य प्रभाव से अधिक खतरनाक हो सकते है|

मादक द्रव्यों का सेवन (सबस्टेंस अब्यूज) – वह महिलाएं जिनका गर्भपात होता है उनमें सबसटेनसिस अब्यूज की संभावना उन महिलाओं की तुलना में अधिक होती है जो महिलाएं गर्भवती नहीं हुई होती हैं या जिन्होंने शिशु को जन्म दिया होता है। ऐसी महिलाओं का अपवाद था जो अपने गर्भपात हुए भ्रूण के पिता के साथ रहती हों। इसका बढ़ता जोखिम नहीं होता है लेकिन अध्ययन में पाया गया है की जिन महिलाओं का गर्भपात होता है उनमें ड्रग अब्यूज की संभावना दो गुना ज्यादा होती है। इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की जिसका भी गर्भपात होगा, उन्हें नशे की लय होगी। हालांकि महिलाएं इसका इस्तेमाल भूलने और बेहतर महसूस करने के लिए करती है। कई महिलाएं गर्भपात के कारण उनके जीवन में आए ख़ालीपन को भरने की कोशिश करतीं हैं। जिससे वह इसके जोख़िम में पड़ जाती है। हालांकि अन्य महिलाएं इसके विपरीत भी कुछ चुन सकती है।

कैंसर – गर्भपात का अगला जोख़िम यह है की इससे महिलाओं में स्तन कैंसर का ख़तरा बढ़ सकता है। गर्भवती महिलाओं की तुलना में उन महिलाओं को इसका ख़तरा अधिक होता है जो गर्भवती नहीं होती है। गर्भावस्था,जो गर्भपात के कारण समाप्त हो जाती है वह ना केवल इस फायदे को खो देती है बल्कि इस गर्भपात के कारण उनके शरीर में आए बदलाव खतरनाक हो सकते हैं। एक गर्भपात से महिला के शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर में महत्वपूर्ण गिरावट आती है। इस गिरावट से स्तनो के उत्तकों में तेजी से कोशिकाओं की वृद्धि होती है। कोशिकाओं का तेजी से बढ़ना स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार जिन महिलाओं का गर्भपात होता है उनमें पैंतालीस वर्ष की उम्र तक 50% स्तन कैंसर का ख़तरा बना रहता है। यह ख़तरा उन महिलाओं में और अधिक होता है जिनका गर्भपात अट्ठारह वर्ष की आयु से पहले हुआ हो। इस खतरे की संभावना अधिक है। हालांकि गर्भपात से पहले कुछ को इस जोख़िम के बारे में बताया जाता है। अनियोजित गर्भावस्था निश्चित रूप से किमोथेरेपी, मासटेकटॉमी और रेडिएशन थैरेपी भावनात्मक और शारीरिक कष्ट की तुलना में कम ही होगी। महिलाओं को चयन स्वयं ही करना है।

इनफर्टिलिटी – कई महिलाओं के‌ गर्भपात चुनने ‌का कारण सही समय का ना होना होता है। वह बच्चे चाहती है लेकिन वह इसके लिए बिना तैयार हुए ही गर्भवती हो जाती है। हालांकि दुर्भाग्यवश हो सकता है उन्हें यह अवसर दोबारा ना मिले क्योंकि गर्भपात का दूसरा सबसे बड़ा जोखिम है अप्रजनन क्षमता यानी इनफर्टिलिटी। इसका मतलब यह है की जो महिला पहले गर्भधारण कर सकती थी अब वह इसमें सक्षम नहीं होगी। गर्भपात प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इनफर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। प्रत्यक्ष रूप से सर्जिकल गर्भपात के कारण यूट्राइन में चोट लग सकती है। साथ ही कुछ ही प्रतिशत गर्भावस्था एक्टोपिक होती है। इसका मतलब यह है की फर्टिलाइज अंडा स्वयं को यूट्राइन वॉल के बाहर स्थापित करता है। प्रेग्नेंसी टेस्ट अब भी साकारात्मक आ सकता है और महिला गर्भपात करा सकती है। वह सोचेंगी की वह गर्भवती नहीं है लेकिन उस नुकसान का उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होगा जिससे वह बेवजह गुजरी है। अगर उन्हें यह पता नहीं चलता है की वह गर्भवती है तो उनके फैलोपियन ट्यूब को क्षति हो सकती है और वह इनफ्रटाइल हो सकती है। गर्भपात के कारण फैलोपियन ट्यूब में इन्फेक्शन हो सकता है और इससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। और कभी-कभार महिलाएं कभी मां नहीं बन पाती है।

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