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माँ और शिशु का रिश्ता है अनमोल - हर माँ अपने बच्चे के लिए करती है ये महत्वपूर्ण चीज़ें


माँ और बच्चे का रिश्ता बहुत ही अनमोल होता है और इस रिश्ते की तुलना कोई किसी भी रिश्ते से नहीं कर सकता। किसी भी महिला में माँ बनने के बाद एक अलग ही परिवर्तन आता है, वो अपने बच्चे के खुशी और आराम के लिए सबकुछ करने को तैयार होती है। माँ का प्यार अपने बच्चे के लिए कभी अनदेखा नहीं किया जा सकता है और उनका स्नेह इतना अधिक होता है कि वो शिशु को कोई भी तकलीफ नहीं होने देती। आज इस ब्लॉग के ज़रिये हम माँ के द्वारा शिशु के लिए करने वाली कुछ विशेष चीज़ों को बता रहे हैं।

1. खाने-पीने का रखती है ध्यान

शिशु के विकास के लिए सही पोषण ज़रूरी है और इसके लिए उन्हें चाहिए सही आहार जिसका ख्याल एक माँ ही अच्छे तरीके से रख सकती है, क्योंकि वो अपने बच्चे की पसंद-नापसंद को बहुत सही तरीके से समझ सकती है। । हर माँ शिशु को सही मात्रा में और स्वस्थ भोजन देना अपनी पहली प्राथमिकता समझती है। वो अपने शिशु को हमेशा सही वक़्त पर रूटीन के अनुसार खाना खिलाती है वो यह भी नहीं सोचती की उन्होंने खुद खाना खाया या नहीं।

 

2. शिशु के सेहत का रखती है ख्याल

हर माँ अपने शिशु के सेहत का पूरा ध्यान रखती है, अगर उनका बच्चा बीमार हो जाए तो अपनी नींद की चिंता किये बिना रात को जाग-जागकर उसकी देखभाल करती है। ऐसा केयर सिर्फ एक माँ ही कर सकती है क्योंकि वो अपने शिशु को तकलीफ में नहीं देख सकती और उसके बिना कहे ही उसकी बातों को समझ जाती है।

3. देना चाहती है आराम

एक माँ अपने शिशु को हर वक़्त आराम देना चाहती है, अगर बच्चा डर जाए या उसे कोई तकलीफ हो तो माँ खुद से गले लगाकर उसका दर्द और डर दूर करती है। शिशु के लिए माँ के गोद में आना ही सबसे ज़्यादा राहत की बात होती है।

4. दोस्त और शिक्षक भी बनती है

वक़्त आने पर बच्चे की दोस्त बनकर उसके साथ मज़ा भी करती है और एक वक़्त ऐसा भी आता है जब वो एक शिक्षक की तरह अपने बच्चे को समझाती भी है।

5. अच्छे-बुरे में फर्क करना भी सिखाती है

बच्चे को शुरुआत से ही सही-गलत में फर्क सिखाती है। अगर प्यार से वो उसका साथ देती है तो वक़्त आने पर बच्चे के कुछ गलत करने पर उसे डांटकर सही रास्ता भी दिखाती है। इसके अलावा बच्चे को आत्मनिर्भर बनाना सिखाती है और अच्छे और बुरे में फर्क समझाती है ताकि आगे चलकर अगर उनके बच्चे को कोई फैसला अकेले लेना पड़े तो उनका बच्चा घबराए नहीं बल्कि निडर होकर सही फैसला ले।

6. हर वक़्त करती है बच्चे की चिंता

एक माँ को हर वक़्त अपने बच्चे की चिंता लगी रहती है, वो अपने बच्चे के हर चीज़ पर ध्यान देती है। वो अपने शिशु को हर खुशी तो देना चाहती ही है लेकिन वो यह भी चाहती कि उनका शिशु अनुशासित भी रहे और बड़ा होकर एक अच्छा इंसान बने ताकि उन्हें गर्व महसूस हो।

यह तो थी बस कुछ ही बातें असल में तो माँ अपने बच्चे के लिए इससे भी ज़्यादा त्याग और बलिदान करती है । माँ और बच्चे के रिश्ते को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता क्योंकि एक माँ का प्यार और दुलार सबसे बढ़कर है और इसकी जगह कोई नहीं ले सकता है। 

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