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लेबर पेन के लक्षण और हॉस्पिटल जाने का सही समय


माँ बनना हर महिला के लिए एक सुखद एहसास होता है, एक बच्चे की आने की ख़ुशी पूरे परिवार को एक डोर से बांधता है। वहीं होने वाली माँ के अंदर काफी शारीरिक और मानसिक बदलाव भी आते हैं क्यूंकि प्रेगनेंसी एक सुखद एहसास तो है ही पर इसके साथ बहुत से उतार-चढाव भी महिला के ज़िन्दगी में जुड़ जातें हैं। नौ महीने एक गर्भवती महिला के लिए आसान नहीं होता, खासकर आखरी महीना। पहली बार माँ बन रही महिला के लिए यह थोड़ा ज़्यादा मुश्किल होता है क्यूंकि उनको अपने अंदर होने वाले बदलाव समझने में वक़्त लग जाता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में शरीर में अगर थोड़ा भी कुछ महसूस होता है तो उन्हें लेबर पेन का ही डर लगता है। ऐसे तो डॉक्टर प्रसव का एक अनुमानित तारीख बताते हैं पर ज़रूरी नहीं की वही तारीख में प्रसव हो। कभी-कभी थोड़ा-बहुत डेट में फेर-बदल या आगे-पीछे हो जाता है। इसलिए महिलाओं को इसका पता पहले से होना चाहिए ताकि वो किसी भी दर्द को प्रसव पीड़ा समझने की भूल न करें और धैर्य से काम करें। अगर आप भी ऐसे ही किसी दौर से गुज़र रहीं हैं तो नीचे दिए गए लक्षणों से आप समझ पाएंगे की आपको कब हॉस्पिटल जाने की ज़रूरत है।

1. क्रैम्प्स

क्रैम्प्स प्रसव पीड़ा का सबसे पहला लक्षण है। पेट में ऐंठन या दर्द पहला संकेत होता है की अब आपको हॉस्पिटल के लिए निकलना चाहिए। यह दर्द बिलकुल वैसा ही होगा जैसा आपको मासिक धर्म के वक़्त होता है। यह दर्द थोड़ी-थोड़ी देर में उठता है और बढ़ता चला जाता है।

2. बार-बार बाथरूम जाना 

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में जब महिला को बार-बार बाथरूम जाने की ज़रूरत पड़ने लगे तो समझ जाएँ की अब आपको हॉस्पिटल जाने की ज़रूरत है। ऐसा गर्भ के निचले हिस्से में दबाव बढ़ने के कारण होता है।

3. खून आना 

अगर योनि से खून या भूरे रंग का लिक्विड आये तो देर न कर के तुरंत हॉस्पिटल जाने की तैयारी कर लें।

4. पानी की थैली का फटना 

बच्चा माँ के अंदर एक तरल पदार्थ के थैली में रहता है और जब महिला को प्रसव होता है तो यह थैली फट जाती है और योनि से एमनियोटिक द्रव का रिसाव होता है। और इस थैली के फट जाने से पता चलता है की बच्चा गर्भ से बाहर निकलने के लिए तैयार है।

5. कॉन्ट्रैक्शन (संकुचन)

जब थोड़ी-थोड़ी देर में गर्भ की मांसपेशियों में खिंचाव या दबाव महसूस होता है तो यह संकुचन की स्थिति होती है। और जब यह ज़्यादा वक़्त तक ज़ोर से होता है तो यह लेबर पेन का संकेत है। अगर ऐसा कुछ हो तो बिना देर किये हुए आप समझ जाएँ अब वक़्त आ गया है की आपको हॉस्पिटल जानें की ज़रूरत है।

6. बच्चे की हलचल

7-8 महीने आते-आते तक बच्चे की हलचल काफी तेज हो जाती है पर जब बच्चे का जन्म नज़दीक होता है तो उसकी हलचल थोड़ी कम या धीमी हो जाती है। इसलिए अगर आप अपने बच्चे की हलचल में कमी महसूस कर रही हैं तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें, क्यूंकि ऐसी परिस्थिति में सीज़ेरियन डिलीवरी की भी सम्भावना हो जाती है।

7. कमर में दर्द

प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में जब तेज़ कमर में दर्द शुरू हो जाए तो समझिये आपको अब हॉस्पिटल जानें की ज़रूरत है। यह कमर दर्द बिलकुल वैसा ही होगा जैसा पीरियड्स के वक़्त आपको होता है और यह दर्द कमर से लेकर जाँघों की तरफ आता है। और जैसे-जैसे डिलीवरी का वक़्त नज़दीक आएगा यह दर्द बढ़ता जाएगा।

8. पेट में दर्द व् बुखार

किसी-किसी महिला को पेट के दर्द के साथ बुखार भी आ सकता है और सरदर्द की शिकायत भी हो सकती है। और कभी-कभी लेबर पेन के शुरूआती दौर में महिला को डायरिया की भी शिकायत हो सकती है।

अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको प्रेगनेंसी के आखरी महीने में दिखे तो घबराएं नहीं तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर के हॉस्पिटल जानें के लिए खुद को तैयार कर लें, क्यूंकि आपके सारे दर्द ख़ुशी में बदलने का समय नज़दीक आ चूका है । 

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