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क्या गर्भावस्था के दौरान इमली खाना सुरक्षित है? जानें इसके फ़ायदे और नुक्सान (Pregnancy Food Cravings: Is Tamarind Safe During Pregnancy? In Hindi)

ऐसे कई फल है जिन्हें अपने आहार में शामिल करना फ़ायदेमंद होता है लेकिन वह बहुत हानिकारक भी साबित हो सकते हैं, जब आप उन्हें अपनी गर्भावस्था के आहार में शामिल करती है। क्या खट्टी इमली भी इसी श्रेणी में आती है? गर्भवती महिलाओं को अक्सर कुछ खट्टा खाने की इच्छा होती है। लेकिन क्या गर्भावस्था के दौरान इमली का सेवन करना सुरक्षित है? गर्भावस्था के दौरान इमली के फ़ायदे और नुक्सान क्या है? यह है गर्भावस्था के दौरान इमली खाने के फ़ायदों और इसके दुष्प्रभावों की विस्तृत सूची।

लेख के मुख्य बिंदु

इमली क्या है? (What is Tamarind in Hindi?)

गर्भावस्था के दौरान इमली- क्या यह सुरक्षित है? (Tamarind during pregnancy- is it a good match? In Hindi)

इमली के फ़ायदे (Tamarind benefits in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान इमली खाने के नुक़सान (Tamarind Side effects during pregnancy in Hindi)

निष्कर्ष (Conclusion)

इमली क्या है? (What is Tamarind in Hindi?)

इमली जिसका वानस्पतिक नाम टैमेरिन्डस इंडिका है, यह एक फलीदार पेड़ है। यह फैबेसी पादप वर्ग का है। इस पेड़ के फल लाल रंग के होते हैं और खट्टे होते हैं। इनका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के व्यंजनों और औषधीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इमली की खटास जी मिचलाने और मार्निंग सिकनेस की समस्या से निजात दिलाने के लिए अद्भुत साबित होती है। यह स्वाद जीभ को ख़ूब लुभाता है। इमली का इस्तेमाल मैटल पोलिश में भी किया जाता है।

इमली के विभिन्न इस्तेमाल और इसकी लोकप्रियता के कारण यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय हिस्सों में उगाया जाता है। इमली के बीजों का सेवन फली के रूप में किया जा सकता है क्योंकि इसमें स्टार्च ( 63%), प्रोटीन (16%) और वसा (5.5%) होती है। लेकिन अमूमन इमली इसके गूदे के लिए जानी जाती है। इसका गूदा व्यावसायिक रूप से बाजार में इमली के पेस्ट के तौर पर उपलब्ध है। इसका गूदा विटामिन-सी से भरपूर होता है और इमली में मुख्य एसिड टारटरिक एसिड होता है। इमली में मेलिक और सिट्रिक ऐसिड भी होता है। इसके गूदे में शुगर भी होता है। यही कारण है कि इमली का गूदा खट्टा मीठा होता है।

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गर्भावस्था के दौरान इमली- क्या यह सुरक्षित है? (Tamarind during pregnancy- is it a good match?)

क्या गर्भावस्था के दौरान इमली खाना सुरक्षित है? तो इसका जवाब है, जी हां इमली खाना पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन “ किसी भी चीज की अति बुरी होती है” यह कथन गर्भावस्था के दौरान खाएं जाने वाले आहार पर भी लागू होता है और इमली भी उनमें से एक है। इमली के लाभ पाने के लिए संतुलित मात्रा में इमली का सेवन करें।

गर्भावस्था के दौरान इमली का सेवन करने से आपके शरीर में आवश्यक पौषक तत्व जैसे कि विटामिन-ए, विटामिन-सी और कैल्शियम की आपूर्ति होती है। यह आपके और आपके शिशु के शरीर को प्रोटीन, फाइबर और पौष्टिक शुगर भी पहुँचाते हैं। गर्भावस्था के दौरान इमली का सेवन करने के विभिन्न प्रयोग - लैक्सेशन, गैस्टेशनल डायबिटीज़ का इलाज, डायरिया आदि है। इमली में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं,‌ जिससे दर्द से राहत मिलती है और एंटी-माइक्रोबल गुण से संक्रमण से लड़ने की शक्ति मिलती है। निस्संदेह, गर्भावस्था के दौरान इमली खाना स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद है। लेकिन इमली कुछ महत्वपूर्ण दवाइयों के साथ रिएक्ट कर सकती हैं जैसे कि पैरासिटामोल, ब्रोफिन और एस्पिरिन आदि। इसलिए यह सुझाव दिया जाता है कि दवाई खाने और इमली खाने के बीच कम से कम 24 घंटों का अंतर रखें।

गर्भावस्था के दौरान इमली का सेवन कैसे करें? आप ताज़ी इमली का सेवन कर सकती हैं या स्वाद के लिए शरबत, सलाद या अन्य तरल पदार्थ में डाल सकती है।

इमली का सेवन क्यों करें? इसका जवाब नीचे दिया गया है।

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इमली के फ़ायदे (Tamarind benefits in Hindi)

जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित मात्रा में इमली का सेवन करने के अनेकों फ़ायदे हैं। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में:

1. पाचन-क्रिया बढ़ाना - इमली का गूदा पाचन-क्रिया को बेहतर बनाने के लिए फ़ायदेमंद होता है। यह बाइल डिस्ओडर को ठीक करने के लिए जाना जाता है।

2. पेचिश का इलाज - इमली को पेचिश का इलाज करने के लिए भी जाना जाता है और यह भूख भी बढ़ाता है।

3. एंटी-कैंसर एजेंट - शरीर में पथरी रैडिकल्स के बढ़ने से कैंसर हो सकता है। इमली में जूस या पेस्ट के तौर पर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। इन एंटीऑक्सीडेंट में कैंसर के कारक फ्री रैडिकल्स से बचाव करने की क्षमता होती है। इसलिए इमली एंटी-कैंसर एजेंट के रूप में काम करती है।

4. गैस्टेशनल डायबिटीज़ का उपचार - गैस्टेशनल डायबिटीज़ गर्भावस्था के दौरान होने वाली एक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। यह आमतौर पर गर्भावस्था के बाद सामान्य हो जाता है। इमली में मौजूद फ्लेवनॉयड्स और पोलीफेनॉल ब्लड शुगर लेवल को संतुलित करने की क्षमता रखते हैं।

5. ब्लड प्रेशर लेवल को संतुलित करना - गर्भावस्था के दौरान कई महिलाएं उच्च रक्तचाप की समस्या से जूझती है। गर्भावस्था के दौरान खट्टी इमली का सेवन करने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है। इमली में मौजूद मिनिरल्स जैसे कि पोटेशियम, सोडियम, आयरन आदि शरीर में रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

6. लेक्सटिव - इमली के लाभ पाने के लिए इसे संतुलित मात्रा में ग्रहण करना बहुत जरूरी है। संतुलित मात्रा में इमली का सेवन करने से यह हल्के लेक्सटिव के रूप में काम करता है क्योंकि इसमें डायट्री फाइबर मौजूद होता है। गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाओं को कब्ज की समस्या होती है और संतुलित मात्रा में इमली का सेवन करने से यह समस्या दूर हो सकती है।

7. सूजन और मांसपेशियों के दर्द से राहत - वेरिकोज वेन, टखनों में दर्द और मांसपेशियों में दर्द होना आदि गर्भवती महिला को इन आम स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ता है खासतौर पर तीसरे तिमाही में। इस मामले में इमली के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को राहत पहुंचाते हैं।

8. पाचन-क्रिया को संतुलित करना - इमली पाचन-क्रिया को संतुलित करती है।‌ अगर किसी व्यक्ति को डायरिया हो, तो इमली का सेवन करने से उसकी यह समस्या हल हो सकती है।

9. प्री-मैच्यौर बर्थ की समस्या को कम करना - इमली में मौजूद लौह तत्व से गर्भावस्था के दौरान शरीर में रक्त का स्तर बढ़ने में मदद मिलती है। गर्भावस्था के दौरान इमली का सेवन करने से शरीर में आयरन की मात्रा की पूर्ति होती है और प्री-मैच्योर बर्थ की संभावना कम होती है। इमली को बच्चे के लो बर्थ वेट की संभावना को कम करने के लिए भी जाना जाता है।

10. शिशु के विकास को बढ़ाना - इमली में मौजूद नियासिन बच्चे के लिए भी फ़ायदेमंद होता है। इमली शिशु के पाचन-तंत्र, त्वचा और नसों के विकास में सहायक सिद्ध होती है।

11. अत्याधिक वज़न बढ़ने से रोकना - इमली में मौजूद डायट्री फाइबर गर्भावस्था के दौरान बढ़ने वाले वज़न को नियंत्रित करते हैं। इससे आपको पेट भरा लगता है और अधिक भूख नहीं लगती है। इससे गर्भावस्था के दौरान होने वाली भोजन की लालसा यानी कि क्रेविंग से भी राहत मिलती है।

12. मार्निंग सिकनेस से राहत - गर्भावस्था के दौरान मार्निंग सिकनेस की समस्या आम है। लेकिन इमली का सेवन करने से इस समस्या से बचा जा सकता है। इमली में मौजूद तत्त्व पेट को शांत रखते हैं और उल्टी होने की संभावना कम होती है। प्रथम तिमाही के दौरान इमली बहुत फायदेमंद साबित होती है।

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गर्भावस्था के दौरान इमली खाने के नुक़सान (Tamarind Side effects during pregnancy in Hindi)

हर चीज़ के फ़ायदे के साथ-साथ कुछ नुकसान भी होते हैं। गर्भावस्था के दौरान इमली के कुछ दुष्प्रभाव इस प्रकार है:

1.अत्याधिक विटामिन-सी - अत्याधिक विटामिन-सी का सेवन करने से गर्भवती महिलाओं को नुक़सान हो सकता है। इससे गर्भवास्था के पहले महीने में प्रोगेस्ट्रोन के उत्पादन का स्तर कम हो जाता है और इससे गर्भपात भी हो सकता है। अत्याधिक विटामिन के कारण प्रीटर्म बर्थ भी हो सकता है।

2. लेक्सेटिव - इमली को लेक्सेट के तौर पर भी जाना जाता है लेकिन अत्याधिक सेवन करना खतरनाक साबित हो सकता है। इससे डायरिया हो सकता है, जो कि आपके और शिशु के लिए नुकसानदायक है। डायरिया के कारण डिहाइड्रेशन हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान अधिक मात्रा में इमली का सेवन करने से यूट्रस कोनट्रैकशन हो सकता है और इससे प्रीटर्म बर्थ होने की संभावना बढ़ती है।

3. दवाइयों से प्रतिक्रिया - इमली के कारण एस्पिरिन और ब्रोफिन का अवशोषण बढ़ सकता है। इससे गर्भपात के साथ-साथ नवजात शिशु को हृदय रोग और फेंफड़ों से संबंधी समस्या होने की संभावना बढ़ती है। इमली के ब्रोफिन के साथ प्रतिक्रिया करने से शिशु के दिल और फेंफड़ों की जगह पूरी तरह बन्द हो सकती है और इससे शिशु की मृत्यु तक सो सकती है।

4. बच्चे को नुक़सान - अगर मां को फ़्लोरोसिस है तो इमली का सेवन करना खतरनाक हो सकता है। इमली का रस और इमली का पेस्ट मां और शिशु के लिए ख़तरनाक हो सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

अगर आपको गर्भावस्था के दौरान कुछ खट्टा खाने का मन हैं, तो इमली आपके लिए फ़ायदेमंद है और सुरक्षित भी। लेकिन गर्भावस्था के दौरान इमली का सेवन संतुलित मात्रा में ही करें। अत्याधिक सेवन से आपको और आपके शिशु को नुक़सान हो सकता है। इसलिए संतुलित मात्रा खाएं और अपने शिशु का ध्यान रखें। 

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