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क्या आपके घर के भीतर की हवा शिशु व आपके लिए सुरक्षित है-जानिये


जिस हवा में हम सांस लेते हैं वह रसायन,धूल, बैक्टीरिया,धुंए आदि के मिश्रण से प्रदूषित है, यहां तक की स्वास्थ व्यक्ति भी ज़ुखाम और एलर्जी से बीमार पड़ सकता है। दीवाली के पटाखें और फ़ैक्टरियों से निकलने वाले प्रदूषित तत्व प्रदूषण में सहयोग देते हैं। यहां तक की वायु प्रदूषण ही दिल्ली में धुंध का कारण है।

कुछ लोग सोचते हैं की एक बार घर के भीतर जाने के बाद वह इस ज़हरीली धुंध से सुरक्षित होते हैं। लेकिन एक अध्ययन में पाया गया है की हमारे घर के अंदर की हवा बाहर की हवा की तुलना में दस गुना ज्यादा प्रदूषित होती है। अगर यह हवा व्यस्कों के लिए इतनी हानिकारक है,तो ज़रा सोचिए शिशुओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ता होगा।

बढ़ते बच्चों और शिशुओं का प्रतिरक्षा तंत्र व्यस्कों की तुलना में कमज़ोर होता है। उन्हें घर के अंदर की हवा से कई एलर्जी जैसे अस्थमा होने की अधिक संभावना होती है। बुजुर्गो का भी प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता और उनके भी बीमार होने की संभावना होती है। अपने माता-पिता और बच्चों के लिए हमें इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए की घर में सुरक्षित और शुद्ध हवा का संचार हो।

आपको इसकी पूरी हक़ीक़त बताने के लिए यह हैं,घर की हवा को लेकर कुछ कड़वे सच:

रसोईघर में खराब वायु संचालन

 

खाना‌ पकाने के दौरान बहुत सा धुआं,गर्मी,एयरबर्न ग्रीस,भाप,कम्बयूशन प्रोडक्ट और फ्यूम्स निकलता है। इन सब को निकालने के लिए एक्ज़ोस्ट फैन उतना असरदार नहीं होता है। ग्रीस और नमी उपकरण,खाने और रसोईघर के आसपास चिपक सकती है। बहुत ही खतरनाक उत्पाद जो खाना बनाने के दौरान उत्पादित होते हैं, उनमें नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड शामिल हैं। इन्हें चिमनी या एयर प्यूरीफायर द्वारा निकाला जाना चाहिए।

एयर कंडीशनर

हो सकता है अब सोचते हो की एयर कंडीशनर के कारण,जो हवा उनके घर में है, वह सांस लेने के लिए सुरक्षित है। लेकिन जब एयरकंडीशनर को अंदरूनी संचालन पर चलाया जाता है,तो वह घर के भीतर की हवा को ही संचालित करता है। जब उसे स्पलिट एयरकंडीशनर मोड पर चलाया जाता है तो वह बाहर की प्रदूषित हवा का संचालन करते हैं। इसलिए एयरकंडीशनर का इस्तेमाल करना, घर पर शुद्ध हवा पाने का समाधान नहीं है।

रंग

शीर्घ वाष्पीकृत हो जाने वाली भभक,जो कुछ विशेष रंग से निकलती है, खतरनाक हो सकती है। जब शिशु इन हानिकारक रसायनिक भभक के संपर्क में आते हैं,तो इससे उनहें श्वास लेने में समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए ऐसे पेंट या रंगों का इस्तेमाल करें जिनमें (VOC- volatile organic compounds) मौजूद ना हो। अगर आपने पहले ही इसका इस्तेमाल कर लिया है तो आपको अपने बच्चों के लिए हवा साफ करने और श्वास लेने योग्य हवा में मदद के लिए एयर प्यूरीफायर लगाना चाहिए।

 

कार्पेट या पायदान

धूल और एलर्जी के तत्व छोटे और मुलायम कार्पेट में मौजूद होते हैं,जो आप अपने शिशु के कमरे में बिछाते हैं। करोड़ों धूल के कण, एलर्जी के प्रमुख कारण बैक्टिरिया और गंदगी जो इन नर्म कार्पेट के अंदर होती है वह कई एलर्जी जैसे आंखों से पानी आना, खांसी, ज़ुखाम आदि का कारण बन सकती है। इससे सुरक्षित रहने के लिए कार्पेट का प्रयोग ना करें या फिर ऐसे कार्पेट का इस्तेमाल करें, जिन्हें साफ करना आसान हो। इनके भीतर से गंदगी निकालने के लिए इसे साफ करें। एयर प्यूरिफायर, हवा को साफ कर के यह काम पूरा कर देंगे।

पौधों से पौलेन एलर्जी

डॉक्टरों ने ऐसी एलर्जी का पता लगाया है जो लोगों को हवा में मौजूद पौलेन से होती है। घर में फूलों से पौलेन के कारण एलर्जी हो सकती है और कुछ लोगों में यह एक वर्ष तक रहती। यह कुछ कण होते हैं जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते हैं। पौलेन एलर्जी से बचने के लिए हमें घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना चाहिए।

सिलन भरी दिवार

फफूंदी गर्म,खराब और नमी आदि स्थिति में कहीं भी पनप सकती है। घर के किसी भी नमी वाले हिस्से में फंफूदी हो सकती है। इससे कई प्रकार की एलर्जी हो सकती है, यहां तक की शिशुओं में विज़लिंग। घर के अंदर फंफूदी की बढ़त को रोकने के लिए नमी को नियंत्रित रखना सबसे बेहतर तरीका है।

डस्ट माइट

आपके घर में करोड़ों अदृश्य और बीमारी फैलाने वाले डस्ट माइट हो सकते हैं। यह माइक्रोस्कोप से ही दिखने वाले जीव होते हैं और आपकी सेहत पर दुष्प्रभाव डालते हैं और आपको सांस लेने में दिक्कत होती हैं और बच्चों और शिशुओं को एलर्जी हो सकती है। यह गर्म जगह पर पनपते हैं खासतौर पर बिस्तर, सोफ़ा, कार्पेट आदि और लगातार कई गुना बढ़ते हैं। एयर प्यूरीफायर आपको इनसे छुटकारा दिलाने और आपके घर को स्वस्थ व साफ स्थान बनाने में मदद करेगा।

जानवरों के बालों की रूसी

जानवर हमारे परिवार और घर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं लेकिन उनके बाल और फर जो वह पूरे घर में फैलाते हैं,वह शिशुओं में एलर्जी का कारण बन सकता है। समस्याओं से बचने के लिए यह सुझाया जाता है की जितना हो सके अपने पालतू पशुओं को घर से बाहर रखें। खासतौर पर आपको उन्हें बैडरूम या ऐसी जगह पर नहीं आने देना चाहिए जहां आपका शिशु सोता हो।इसी के साथ अगर उनके बाल और फ़र पड़े रहते हैं तो उसके लिए आपको रोजाना सफाई और उच्च गुणवत्ता के एयर प्यूरीफायर को इस्तेमाल करने की जरूरत है।

 

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