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क्या आप स्तनपान के दौरान चॉकलेट का सेवन कर सकती है? जानें इसके प्रभाव (Can You Eat Chocolates When You Are Breastfeeding? In Hindi)

महिलाओं को चॉकलेट बहुत पसंद होती है।‌ नौ महीने कठोर आहार का पालन करने के बाद कौन नहीं चाहेगा कि वह स्वादिष्ट, मीठी और लाज़वाब चॉकलेट का सेवन करें। आखिरकार यह हमारा मूड भी बेहतर बनाता है। लेकिन क्या स्तनपान कराने के दौरान चॉकलेट का सेवन करना आपके शरीर आपके शिशु के लिए सुरक्षित है? क्या स्तनपान के दौरान चॉकलेट को आहार में शामिल करना सुरक्षित है? या स्तनपान के दौरान चॉकलेट को आहार में शामिल करना सुरक्षित नहीं है? इस लेख में इन सभी सवालों के जवाब देंगे ताकि आप खुद सही निर्णय लेने में सक्षम हों।

लेख की विषय सूची

चॉकलेट के बारे में जानकारी (An introduction to Chocolate in Hindi?)

स्तनपान के दौरान चॉकलेट का सेवन करना - आपको इसकी लालसा क्यों होती है? (Eating Chocolate While Breastfeeding - Why Do You Crave It in Hindi?)

क्या मैं स्तनपान के दौरान चॉकलेट का सेवन कर सकती हूं? (Can I Eat Chocolate While Breastfeeding in Hindi?)

चॉकलेट की कितनी मात्रा का सेवन करना सुरक्षित है? (How Much Chocolate Is Safe in Hindi?)

कौन सी सामग्री आपके शिशु के लिए हानिकारक है? (Which Ingredients Are Bad For baby in Hindi?)

चॉकलेट का शिशु पर प्रभाव (Effects Of Chocolate On Your Baby in Hindi)

निष्कर्ष (Conclusion)

चॉकलेट के बारे में जानकारी (An introduction to Chocolate in Hindi?)

दुनियाभर के लोग चॉकलेट को बहुत पसंद करते हैं और इसलिए चॉकलेट का परिचय देने की विशेष आवश्यकता नहीं है। यह गाढे भूरे रंग की होती है, इसका स्वाद मीठा होता है और यह भूनें व ग्राउंडीड किए हुए थियोब्रोमा काकाओ के बीज से तैयार की जाती है। चॉकलेट में निम्न सामग्री होती है: चॉकलेट लिकर, काकाओ बटर, चीनी। चॉकलेट में वसा, प्रोटीन, विटामिन, मिनिरल्स, पानी, कैफ़ीन, कोलेस्ट्रॉल और थियोब्रोमीन जैसे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं।

थियोब्रोमीन तत्व (ठोस कोकोआ में पाया जाने वाला तत्व) स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए चिंता का विषय है, जो स्तनपान के दौरान चॉकलेट का सेवन करती है। यह तत्व कॉफी में मौजूद कैफ़ीन की तरह ही होता है। लेकिन महिलाओं के लिए राहत की बात यह है कि चॉकलेट में पाया जाने वाला थियोब्रोमीन तत्व पूरी तरह से सुरक्षित है, जब-तक की आप स्तनपान के दौरान अधिक मात्रा में चॉकलेट का सेवन नहीं करती है।

स्तनपान कराने के दौरान किस प्रकार की चॉकलेट का सेवन करना सुरक्षित है? सफेद चॉकलेट/वाइट चॉकलेट? थियोब्रोमीन जो शिशु को प्रभावित कर सकता है, वह ठोस कोकोआ में मौजूद होता है। डार्क चॉकलेट का रंग भी गाढ़ा होता है क्योंकि उसमें ठोस कोकोआ की अधिकता होती है। चॉकलेट में ठोस कोकोआ की अधिकता के कारण थियोब्रोमीन तत्व की भी अधिकता होती है और इसी कारण शिशु पर इसका अधिक दुष्प्रभाव पड़ने की संभावना भी होती है। सफेद चोकलेट में ठोस कोकोआ नहीं होता है और इसलिए इसमें थियोब्रोमीन नहीं होता व‌ शिशु पर इसका कम से कम प्रभाव पड़ता है।

स्तनपान के दौरान चॉकलेट का सेवन करना - आपको इसकी लालसा क्यों होती है? (Eating Chocolate While Breastfeeding - Why Do You Crave It in Hindi?)

स्तनपान कराने वाली महिलाओं को रात भर जागना पड़ता है और यह बहुत आम बात है क्योंकि उन्हें शिशु को दिन रात स्तनपान कराना पड़ता है। आपका स्लीप साइकल यानी कि नीद्रा चक्र बहुत प्रभावित होता है। नींद की कमी के कारण आपके निर्णय लेने की क्षमता में कमी आती है। इसलिए आपको अनियंत्रित क्रेविंग यानी कि भोजन की लालसा होती है और भूख भी ज्यादा लगती है।

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क्या मैं स्तनपान के दौरान चॉकलेट का सेवन कर सकती हूं? (Can I Eat Chocolate While Breastfeeding in Hindi?)

क्या स्तनपान कराने वाली मां चॉकलेट का सेवन कर सकती हैं? यह सवाल अधिकतर महिलाओं के मन में उठता है! अगर आप भी उनमें से एक है, तो इसका जवाब है, निस्संदेह हां। जी हां, स्तनपान कराने के दौरान चॉकलेट का सेवन करना सुरक्षित है लेकिन इसकी मात्रा आपको संतुलित रखनी होगी और विशेष ध्यान देना होगा। जैसे कि अगर आपको स्तनपान के दौरान चॉकलेट का सेवन करने के कारण स्वयं में या शिशु में कोई समस्या दिखाई देती है, तो आपको फौरन चॉकलेट का सेवन बंद कर देना चाहिए।

स्तनपान के दौरान कम मात्रा में चॉकलेट का सेवन करना पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि चॉकलेट में मौजूद सामग्री स्तनों के दूध के कारण आपके शिशु तक पहुंच सकती है और इसका प्रभाव शिशु पर पड़ता है। रोज़ाना चॉकलेट के दो पीस या चॉकलेट केक की एक स्लाइस खाने से शिशु पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कुछ चॉकलेट में अतिरिक्त कैफ़ीन होता है। अगर आप स्तनपान के दौरान कैफ़ीन के अन्य पदार्थ चाय, कोक, कॉफी के साथ कैफ़ीन युक्त चाकलेट का सेवन करते हैं, तो इससे शिशु पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। क्या आप स्तनपान के आहार में चॉकलेट शामिल करना चाहती है? तो अन्य कैफ़ीन उत्पादों को सीमित कर दें।

क्या स्तनपान कराने वाली महिलाएं चोकलेट का सेवन कर सकती हैं? जी हां, स्तनपान के दौरान किस प्रकार की चॉकलेट का सेवन करना सुरक्षित होता है? वाइट चॉकलेट! आपको डार्क चॉकलेट के सेवन से बचना चाहिए। मिल्क चॉकलेट भी मध्यम श्रेणी में आती है लेकिन सफेद चॉकलेट आपके शिशु और आपकी सेहत के लिए उपयुक्त होती है।

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चॉकलेट की कितनी मात्रा का सेवन करना सुरक्षित है? (How Much Chocolate Is Safe in Hindi?)

क्या चॉकलेट से स्तनों के दूध के स्वाद पर प्रभाव पड़ता है? जी हां, बिल्कुल। आपका शिशु स्तनों के माध्यम से उन तक पहुंचने वाली चॉकलेट की कितनी मात्रा को संभालने में सक्षम होता है? तो यह है जवाब।

आपका शिशु स्तनों के दूध के माध्यम से उन तक रोजाना पहुंचने वाली चॉकलेट की 750 मिलीग्राम थियोब्रोमीन अर्थात कैफ़ीन से कम मात्रा को संभालने में सक्षम होता है। इससे अधिक मात्रा के‌ बढ़ने से शिशु में चिड़चिड़ापन हो सकता है और उन्हें तकलीफ़ हो सकती है।

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि बेहतर होगा कि आप स्तनपान के दौरान अपने आहार में वाइट चॉकलेट को शामिल करें न कि डार्क चॉकलेट को। वाइट चॉकलेट का सेवन करना सुरक्षित है क्योंकि इसमें थियोब्रोमीन की मात्रा कम होती है। आपके शिशु पर वाइट चॉकलेट के दूध के स्वाद से कोई विशेष अंतर नहीं पड़ेगा।

कौन सी सामग्री आपके शिशु के लिए हानिकारक है? (Which Ingredients Are Bad For baby in Hindi?)

चॉकलेट में कई सामग्री और तत्व मौजूद होते हैं। लेकिन चॉकलेट में मौजूद कौन से तत्व आपके शिशु को प्रभावित कर सकते हैं? हमने इसकी एक सूची तैयार की है। इससे प्रभावों को जानें और इसके दुष्प्रभावों को कम करने का प्रयत्न करें।

थियोब्रोमीन:-

आपने चॉकलेट में मौजूद कैफ़ीन तत्व के बारे में सुना होगा। इसे थियोब्रोमीन कहा जाता है। थियोब्रोमीन का असर वह प्रभाव कुछ उसी प्रकार का है जैसे कि कैफ़ीन का होता है। स्तनपान कराने वाली मां के रोज़ाना 50 आउंस से अधिक चॉकलेट का सेवन करने से उनका शिशु इससे प्रभावित होता है।

कैफ़ीन:-

कुछ चॉकलेट में वास्तविक कैफ़ीन भी होता है। थियोब्रोमीन‌ और कैफ़ीन दोनों की मौजूदगी से शिशु पर अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए हमेशा चॉकलेट का सेवन करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि उसमें मौजूद तत्वों का अनुपात क्या है।

चीनी:-

चॉकलेट में मिठास उसमें मौजूद चीनी के कारण होती है। इससे शिशु को कोई विशेष हानि नहीं होती है और इसलिए स्तनपान के दौरान इसका सेवन सुरक्षित है। लेकिन इस सामग्री से आप हाइपर हो सकते हैं।

दुग्ध उत्पाद:-

क्या आपका शिशु दुग्ध उत्पादों के प्रति अति-संवेदनशील हैं? तो‌ बेहतर होगा कि आप अधिक मात्रा में चॉकलेट का सेवन न करें। चॉकलेट में मौजूद दुग्ध उत्पाद की अधिकता के कारण स्तनों के दूध के माध्यम से यह शिशु को प्रभावित कर सकता है।

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चॉकलेट का शिशु पर प्रभाव (Effects Of Chocolate On Your Baby in Hindi)

स्तनपान कराने के दौरान चॉकलेट का सेवन करना सुरक्षित है। अगर संतुलित मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो यह शिशु को प्रभावित नहीं करता है। लेकिन इसके दुष्प्रभावों को ध्यान में रखना उचित है। अगर शिशु पर इसका कोई दुष्प्रभाव दिखाई देता है, तो बेहतर होगा कि आप चॉकलेट का सेवन तब-तक न करें जब-तक की आप शिशु को स्तनपान करा रही हैं। चॉकलेट की अधिकता के कारण शिशु पर निम्न प्रभाव पड़ सकता है:

शिशु में चिड़चिड़ापन:-

अगर आप अधिक मात्रा में चॉकलेट का सेवन करने के बाद शिशु को स्तनपान कराती है, तो इससे शिशु आसानी से चिड़चिड़ा हो जाता है। यह चॉकलेट में मौजूद सामग्री- थियोब्रोमीन और कैफ़ीन के कारण होता है। अगर ऐसा होता है, तो स्तनपान के आहार से चॉकलेट को हटा दें या इसका सेवन कम कर दें।

दस्त और उल्टी:-

अगर आपका शिशु चॉकलेट के प्रति अति-संवेदनशील है और स्तनपान करने के बाद चॉकलेट की थोड़ी सी मात्रा से ही आपका शिशु प्रभावित हो जाता है और इससे दस्त, उल्टी या गैस होती है तो इसे ठीक करना बहुत मुश्किल हो सकता है और ऐसे में बेहतर होगा कि आप अपने स्तनपान के आहार में चॉकलेट को शामिल न करें।

ठीक से नींद न आना:-

नींद आपके और आपके शिशु के लिए बहुत जरूरी है। शिशु की नींद पूरी होना उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। लेकिन अगर आप शिशु को सुलाने से पहले स्तनपान कराती है तो आपके शिशु को चॉकलेट में मौजूद थियोब्रोमीन और कैफ़ीन तत्व के कारण सोने में दिक्कत हो सकती है।

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निष्कर्ष (Conclusion)

चॉकलेट पूरी तरह से सुरक्षित है अगर सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जाए। लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन न करें। क्योंकि अधिक मात्रा में चॉकलेट का सेवन करना आपके शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। स्तनपान के दौरान उचित आहार का सेवन करना और सावधानी बरतना बहुत आवश्यक है इसलिए अपना और अपने शिशु का ध्यान रखें। 

 

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