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कुछ इस तरह पता लगाएं कि आपकी गर्भ में हैं जुड़वा बच्चे


कोई महिला जब प्रेग्नेंट होती है तो उसके मन में अपने अंदर पल रहे बच्चे को लेकर अलग अलग तरह के ख्याल आते हैं। इसी के साथ उन्हें अपनी डिलिवरी को लेकर भी कई सवाल बने रहते हैं। इसके अलावा एक सवाल और है जो उन्हें सताता है।

वो सवाल है कि कहीं उनकी गर्भ में जुड़वा बच्चे तो नहीं है। हालांकि जुड़वा बच्चों की मां बनना एक महिला के लिए दोगुनी खुशी होती है। लेकिन जुड़वा बच्चों की प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के लिए आसान नहीं होती। इसमें आपको अपना और अपने बच्चों का और भी ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है।

आपको बता दें कि महिला के लिए जुड़वा बच्चों को गर्भ में रखना सामान्य गर्भावस्था से अलग रहती है। आज हम आपको बताएंगे वो लक्षण जो दर्शाते हैं कि आपकी गर्भ में जुड़वा बच्चे हैं....

मॉर्निंग सिकनेस

 

यूं तो मॉर्निंग सिकनेस की समस्या हर प्रेग्नेंसी में होती है लेकिन जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती महिला को यह समस्या सामान्य से ज्यादा होती है। अधिकतर महिलाएं प्रेग्नेंसी के शुरुआती समय में ही मितली और जी मिचलाना की समस्या से जूझना शुरू कर देती हैं। वहीं जब महिला जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती है तो वो सामान्य गर्भवती महिलाओं की तुलना में मॉर्निंग सिकनेस का अनुभव अधिक करती है।

 महिला का वजन

चूंकि महिला की कोख में दो बच्चे हैं तो ज़हिर सी बात है कि ऐसे में वज़न भी सामान्य गर्भवास्था की तुलना में ज्यादा होता है। आपको बता दें कि एक सामान्य गर्भावस्था में सामान्य वजन 25 पाउंड होता है जबकि जुड़वा बच्चों के साथ गर्भावस्था में यह 30 से 35 पाउंड के बीच हो सकता है।

महिला की उम्र

अधिकतर जुड़वा बच्चे उन्हें होते हैं जिन महिलाओं की उम्र 35 साल से ज्यादा है। इस उम्र की महिलाएं FSH हार्मोन को कम उम्र कि महिलाओं की तुलना में ज्यादा मात्रा में बना सकती है। यह हार्मोन अंडाशय ओवुलेशन के लिए अंडे को रिहा करने की अनुमति देता है। ऐसे में जितना ज्यादा हार्मोन का स्तर होता उतने ही अंडे ओवुलेशन के लिए निकलेंगे।

आनुवांशिकता

जुड़वा बच्चों की संभावना अनुवांशिकता पर भी निर्भर करती है। अगर पति या पत्नी सें से कोई भी जुड़वा है या परिवार में कोई जुड़वा है तो आपको भी जुड़वा बच्चे होने की संभावना बढ़ जाती है।

दो दिल के ज़रिए

जब कोई माता-पिता अपने बच्चे की धड़कन को पहली बार सुनते हैं तोभव रह यह उनके लिए सबसे यादगार अनुभव रहता है। बच्चे के जन्म पहले आप डॉपलर सिस्टम की मदद से बच्चे के दिल की धड़कन को सुन सकते हैं। जैसे ही आपको नौवा सप्ताह लगेगा तो आपको दोनों बच्चों के दिलों की धड़कन अलग-अलग सुनाई देगी।

समय पूर्व डिलिवरी और सिजेरियन

आपको बता दें कि जो महिलाएं जुड़वा बच्चों के साथ प्रेग्नेंट होती हैं उनमें समय से पहले डिलिवरी की संभावना बढ़ जाती है। बताते चलें कि प्रसव पीड़ा के दौरान 36 या 37 सप्ताह के बीच हो सकती है। वहीं, इसके अलावा जुड़वा बच्चों की प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे अधिकतर बीच की स्थिति में होते हैं जिस कारण सिज़ेरियन डिलिवरी के चांस भी बढ़ जाते हैं। 

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