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कुछ इस तरह गर्भ से ही बनाएं अपने शिशु को स्मार्ट और इंटेलिजेंट

  माँ बनना किसी भी महिला के लिए एक सुखद एहसास है, अपने शिशु को नौ महीने अपने गर्भ में महसूस करना और नौ महीने के कठिन इंतज़ार के बाद अपने दिल के टुकड़े को देखना तो मानो किसी स्वर्ग के एहसास से कम नहीं। लेकिन माँ बनना इतना भी आसान नहीं है, इसके लिए महिला को नौ महीने अपने अंदर होने वाले कई बदलावों को महसूस करना पड़ता है इसके अलावा गर्भवती होने का मतलब सिर्फ एक बच्चे को गर्भ में पालना ही नहीं होता बल्कि यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है।

  जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो हर कोई उन्हें तरह-तरह के सलाह देने लगते हैं ताकि माँ और उसका होने वाला शिशु दोनों ही स्वस्थ और तंदुरुस्त रहे। खासकर जब बात आये खाने की तब तो गर्भवती महिला को और सचेत रहना चाहिए क्यूंकि इस वक़्त जो भी माँ खाएगी उसका सीधा असर शिशु पर पड़ता है। सिर्फ खाना ही नहीं बल्कि आसपास के वातावरण, सोच-विचार, बोली और रहन-सहन का भी असर शिशु पर पड़ता है। हर कोई चाहता है की उनके शिशु का गर्भ से ही अच्छा विकास हो और गर्भ से ही उनका शिशु स्मार्ट, इंटेलीजेंट और तेज़ बने। अगर आप भी गुड न्यूज़ देने वाली हैं या आपके घर में कोई गुड न्यूज़ देने वाली हैं और अगर वो चाहतीं हैं की उनका बच्चा गर्भ से ही शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से स्वस्थ बनें तो नीचे दिए गए कुछ बातों का ज़रूर ध्यान दें।

 

1. खानपान का रखें ध्यान

  गर्भवती महिला का खानपान सही होना बहुत ज़रूरी है क्यूंकि जो भी होने वाली माँ खाएगी उसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी होगा। माँ अगर हेल्दी खाना खाएंगी तो शिशु हेल्दी, स्मार्ट और इंटेलीजेंट होगा और अगर खाने में कोई गलती हुई तो उसका असर भी गर्भ में पल रहे शिशु पर भी होगा। इसलिए अगर शारीरिक और मानसिक दोनों तौर पर अपने शिशु को हेल्दी देखना चाहते हैं तो हेल्दी खाना खाएं।

2. म्यूजिक भी है बेहद काम की चीज़

संगीत हर किसी के मूड को रिलैक्स करता है, यह आपको सुकून पहुंचाता है इसलिए गर्भावस्था के दौरान अच्छा और सूदिंग म्यूजिक सुनें यह आपके शिशु के लिए अच्छा होगा क्यूंकि इससे ब्रेन में सेरोटोनिन (serotonin) नामक केमिकल निकलता है जो की ना सिर्फ आपके बल्कि आपके होने वाले शिशु के मूड को भी अच्छा करेगा।

3. माँ का एहसास होता है अनमोल

माँ और शिशु का रिश्ता उसी दिन से जुड़ जाता है जिस दिन से शिशु माँ के गर्भ में आता है। एक माँ का प्यार ही सबसे निश्छल होता है क्यूंकि एक माँ ही होती है जो अपने बच्चे को बिना देखे ही उससे प्यार करने लगती है। होने वाली माँ को अपने बच्चे को उनका स्पर्श कराना चाहिए इसलिए जब भी आप अकेले बैठी हो अपने बेबी बम्प पर अपने हाथों को हल्का-हल्का फेरे और मसाज करें यह ना सिर्फ बेबी के ब्‍लड फ्लो को बढ़ाएगा बल्कि आपके बच्चे की ब्रेन की केपैसिटी भी बढ़ाएगा। इसके अलावा आपका शिशु आपके स्पर्श को महसूस करके खुद को आपसे और बाहरी दुनिया से जोड़ने की कोशिश करेगा और आप उसके मूवमेंट से यह अंदाज़ा लगा सकते हैं की आपका शिशु स्वस्थ है या नहीं और वो आपके गर्भ में कितना एक्टिव है।

4. सूरज की धूप है वरदान

सूरज की किरणें हर किसी के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है क्यूंकि इसमें विटामिन डी होता है और यह हड्डियों के लिए सबसे ज़्यादा रामबाण है। अगर गर्भवती महिला कम से कम 10 से 20 मिनट भी सुबह की ताज़ी हवा में टहलें और सुबह की धुप में बैठे तो यह उन्हें और उनके गर्भ में पल रहे शिशु को बहुत सी बिमारियों से बचाएगा, हड्डियां मज़बूत करेगा और साथ ही साथ आपके होने वाले शिशु को स्मार्ट और स्वस्थ भी बनाएगा।

 

5. एक्सरसाइज भी है ज़रूरी

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का एक्टिव रहना बहुत ज़रूरी है इसलिए इस दौरान महिला एक्सरसाइज करना भी ज़रूरी है क्यूंकि एक्सरसाइज से ना सिर्फ मधुमेह, कब्ज़ जैसी समस्याओं से निजात पा सकेंगी बल्कि ऐसा करने से लेबर पेन के दौरान मुश्किलें भी कम होगी। इसके अलावा एक्सरसाइज करने से फील गुड हार्मोन निकलता है जिससे माँ और होने वाला बेबी दोनों खुश रहते हैं। लेकिन हमेशा याद रखें एक्सरसाइज करने से पहले अपने डॉक्टर से एक बार सलाह ज़रूर कर लें और किस तरह के एक्सरसाइज आपको करने चाहिए यह भी ज़रूर पूछ लें।

6. बेबी से बात करें

माँ और शिशु का रिश्ता सबसे अलग और सबसे गहरा होता है, एक माँ अपने बच्चे के कहने से पहले उसकी बातें, मुश्किलें और चाह समझ जाती है। आप माने या ना माने गर्भ में पल रहा शिशु भी आपसे उतना ही कनेक्टेड होता है वो आपकी आवाज़ें सुन सकता है इसलिए अपने शिशु से बात करने का वक़्त निकालें और उनसे प्यारी-प्यारी बातें करें, ऐसा करने से वो आपको और आपके स्पर्श को समझ सकेंगे और इससे उनका ब्रेन पावर बढ़ेगा और उनके सोच-विचार की क्षमता भी बढ़ेगी।

इन सबके अलावा यह बहुत ज़रूरी है की आप अपने चारो तरफ सकारात्मक माहौल बनाकर रखें क्यूंकि अगर आप तनाव में रहेंगे और दुखी रहेंगे तो इसका सीधा असर आपके शिशु पर पड़ेगा इसलिए जितना हो सके खुश रहें अपने आसपास पॉजिटिव माहौल बनाकर रखें ताकि आपका आने वाला नन्हा मेहमान भी खुश रहे और उसके अंदर भी पॉजिटिविटी रहे। माँ बनना एक बहुत ही अनमोल ख़ुशी है इसलिए इस पल को एन्जॉय करें, हां हो सकता है आपको कुछ मुश्किलों का भी सामना करना पड़े लेकिन यह बस कुछ वक़्त की बात है क्यूंकि जब आप नौ महीने बाद अपने नन्हें मेहमान को अपने सामने देखेंगी तो आपकी सारी तकलीफ दूर हो जायेगी।

हैप्पी प्रेगनेंसी !

 

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