Link copied!
Sign in / Sign up
25
Shares

आप किस तरह के माँ -पिता बन सकते हैं?? - कैसे करें सही परवरिश

 

भारत देश ,दुनियाँ के देशों के लिए एक अजूबे से कम नहीं ! इसके 3.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर के विस्तार में इतनी विविधता औरअविश्वसनीय तथ्य है !

हमारे देश के नागरिक अलग-अलग तरह की भाषा बोलते हैं और विभिन्न धर्मों का पालन करते हैं। यहां तक ​​कि हमारे अपने छोटे समुदायों के भीतर,भी समानता नहीं हैं| प्रत्येक घर में किसी काम को करने का अलग तरीका है| इतने सारे अलग परंपराओं, रीति-रिवाजों और विश्वासों के साथ, हम एक साथ रहते है और हमेशा एक-दूसरे की सहायता करते हैं, क्योंकि इसी को भारतीयता कहते है।

प्रेम की भाषा, हँसी की खिलखिलाहट और मानवता पर गर्व की भावना हर दिल महसूस करता है। यह एक भावना है जो सभी मनुष्यों को एक साथ जोड़ती है और यही कारण है कि हम अपने छोटे बच्चों को अपनी ही दुनिया में देख कर खुश होतें हैं। वे खुशियों के पिटारा होतें है और शुद्ध प्रेम से परिपूर्ण भी !

हम सभी माता -पिता अपने बच्चों के लिए एक सा महसूस करतें है और वो इस बात से बिलकुल परे है कि हम कौन सही भाषा बोलतें है और किस प्रांत से जुड़े हुए हैं |

भारत में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पेरेंटिंग शैलियों के बारे में नीचे बताया गया है :

1. अनुशासन में रखने वाली माँ और पिता का प्यार भरा अंदाज़

यह सबसे सामान्य परिदृश्यों में से एक है| बच्चे पाते हैं कि अगर वे अपने पिता से किसी चीज़ के लिए पूछते हैं तो उन्हें वो आसानी से मिल जाती हैं, लेकिन जब माँ की बात आती है, तो वह वो सिर्फ हर चीज़ के लिए ना बोलकर सारा मज़ा बिगाड़ देती है| यह आमतौर पर तब होता है, जब पिता को अपने बच्चे के साथ बहुत कम समय मिलता है ,इसलिए उन्हें जो भी समय मिलता है वो उन्हें खुश रखना चाहतें है । अनुशासन में रखने वाली सख्त माओं को बच्चे के साथ सारा समय बिताना पड़ता है और वो उन बातों को जानतीं है, जिनका पता पिता को नहीं होता है| शायद बच्चे ने कोई दुर्व्यवहार किया हो या अपने स्कूल के होमवर्क को समय पर पूरा नहीं किया हो और इसलिए वो चाहती है कि बच्चा बाहर खेलने नहीं जाये ,जब तक वो अपना काम पूरा नहीं कर लेता |ऐसे समय में जब पिता घर आतें हैं और उसे बाहर ले जातें है |

2. अनुशासनप्रिय सख्त पिता और माँ के साथ सुखद रिश्ता

ऐसे माता पिता के बच्चों को लगता है कि वे अपनी माताओं को आसानी से सभी बातें बता सकते हैं जो उनको चाहिए होती हैं, और उनकी माताएं उन्हें बस सलाह देंगी कि क्या गलत या सही है | जब वही बात अपने पिता को बताने की बात आती है, तो वे उन्हें सावधानी से बतातें हैं | वे उन्हें सोच समझकर हल्का सा विवरण देंतें हैं| इसका कारण यह है कि उन्हें डर रहता है कि उनके पिता उन्हें डांटेंगे या उन्हें दंड देंगे। ऐसी बातों में स्कूल में पाए बुरे मार्क्स या बहुत सारी चॉकलेट खाना भी हो सकता है |

3 . व्यस्त माता पिता

आज के समय में दोनों माँ -बाप काम कर रहे होतें है | उन्हें बच्चे की देखभाल और घर के कामों के लिए नैनी रखनी पड़ती है | ऐसे में अगर माता -पिता बच्चों के साथ अगर ज्यादा वक़्त ना बिता पाएं तो बच्चे अपने माता -पिता से अधिक अपने नैनी से ज्यादा जुड़ाव महसूस करतें है | इस स्थिति से बचा जा सकता है, अगर माँ -बाप जल्दी काम से आकर बच्चों के साथ समय बिताएं | ऐसा सुनिश्चित कर ले कि नाश्ते और खाने के समय सारा परिवार एक साथ बैठकर खाये | काम से आने के बाद आप उनको नहा सकते है और सोते समय उन्हें कहानियाँ सुना सकतें हैं | सप्ताहांत सिर्फ अपने परिवार के लिए ही रखें |

4. दार लेकिन रूढ़िवादी माता पिता

कुछ परिवारों में, दोनों माता-पिता उदार होते हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा से संबंधित मामलों में उनके नियम काफी दृढ होते है हैं। वे इन सब बातों पर कड़ी नज़र रखते है जैसे उनके दोस्त कैसे है ? वे क्या खातें है ?कैसी जगहों में घूमने जातें है ? माता-पिता को अपने बच्चों को हर नए भोजन को खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। अगर माता पिता के पास किसी चीज़ पर रोक लगाने का कोई वैध कारण हो ,तो आप ऐसा ज़रूर कर सकतें है |

5. सख्त और रूढ़िवादी माता -पिता

कुछ माता पिता बच्चों के लिए नियम बनातें है, जिनका पालन करना उनके लिए अनिवार्य होता है जैसे सब्जी खाना या वीकेंड के पहले होमवर्क समाप्त कर लेना आदि | यद्यपि ऊपर दिए गए इन दो उदाहरणों में कोई नुकसान नहीं है, लेकिन अपने बच्चे पर जबरदस्ती अपने विचार थोपना उचित नहीं । यदि उन्हें किसी विशेष उपकरण को बजाने में कोई रूचि नहीं है तो उनपर ज़बरदस्ती न करें , उन्हें कुछ और चीज़ में दिलचस्पी हो सकती है| शायद आपका उन्हें लोगों के सामने जीन्स या शॉर्ट्स पहनने देने का मन नहीं हो सकता है लेकिन इस तरह की पाबंदियां उनके स्वाभाविक विकास को रोकती है और उनका आत्मविश्वास घटाती है |

बेस्ट पेरेंटिंग के लिए कुछ लिखे नियम कानून नहीं हैं | हर माता -पिता बस यही चाहतें है कि उनके बच्चे खुश रहें ,जिम्मेदार और स्वाबलंबी बने | माता पिता पेरेंटिंग तरीकों में कुछ बदलाव सिर्फ इन्ही बातों को ध्यान में रखकर करतें है कि ऐसे करने से बच्चों का भला होगा | कठोरता और उदारता के सही संयोजन के साथ, आप धीरे धीरे समझ जातें हैं कि आपके बच्चे के लिए सबसे अच्छा क्या काम करता है। आपको जो अपने बच्चे के लिए सही लगता है वही करें और सारी चीज़ें सही होंगीं ।

इस्पे निर्भर करता है आपके शिशु का भविष्य - सही परवरिश दें और इस शेयर करके राह चुनने में मदद करें -

Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon