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जिस गर्भाशय(uterus) से खुद जन्म लिया, उससे ही अपने शिशु को जन्म दिया - जानें यह दिलचस्प कहानी -


महिला ने ट्रांस्प्लांट द्वारा अपनी मां के गर्भाशय से शिशु को जन्म दिया।

गोल मटोल गाल और हल्के भूरे बालों के साथ यह शिशु बिल्कुल अन्य नौ महीने के शिशुओं की तरह लगता है। लेकिन इसके आने की कहानी अनोखी है। सबसे पहले तो यह की शिशु उसी गर्भ में पोषित हुआ है जिसमें की उसकी मां हुई थी।

शिशु की मां ने कैंसर के कारण बीस वर्ष की उम्र में ही अपना गर्भाशय खो दिया था और वह अपनी मां के बाद ही गर्भ धारण करने में सक्षम थी। शिशु की नानी ने ट्रांसप्लांट के लिए अपना गर्भाशय दान दिया।

स्विडन से इस नयी मम्मी ने बताया है की कैसे उनका बेटा उनकी जिंदगी में खुशियां लेकर आया है। “हम बता नहीं सकते हैं की हम कितने खुश हैं” महिला ने अपने शिशु की निजता को बनाए रखने के लिए बिना नाम बताएं यह बयान दिया। “यह सबकुछ है जिसकी मैंने उम्मीद की थी, बल्कि उससे ज्यादा”।

शिशु का जन्म एक लम्बी प्रक्रिया का परिणाम है,जो तब शुरू हुआ जब महिला ने अपनी मां से पूछा की क्या वह अपना गर्भाशय दान करेंगी।

महीला की मां ने फौरन हां कहा और इस बारह घंटे की प्रक्रिया जिसमें ट्रांसप्लांट आपरेशन शामिल हैं,वह शुरू हुआ।

डॉक्टर ने बारह महीने का इंतजार किया यह सुनिश्चित करने के लिए की आपरेशन में कोई समस्या नहीं है।

महीला फिर आई.वी.एफ से गुजरी जिसमें उसके अंडे और उसके पति के वीर्य के द्वारा भ्रूण बनाना था। हालांकि आरोपण के पहले तीन प्रयास विफल रहे और चौथा प्रयास सफल रहा।

परेशानियों से मुक्त गर्भावस्था के बाद शिशु पहले से नियोजित सीजेरियन सेक्शन के द्वारा हुआ। “ शिशु को अपने गाल के पास महसूस करना, सबसे अद्भुत एहसास था” अपने शिशु को पहली बार पकड़ने के बाद इस मां ने कहा।

डॉ मैट ब्रानसट्राम ने शिशु के धारण और जन्म को संभव बनाया। इन्होंने गर्भाशय के ट्रांसप्लांट का बीड़ा उठाया था।

तीन अन्य शिशु भी,सभी लड़के थे, गर्भाशय के दान बाद हुए। लेकिन पहली बार एक नानी ने गर्भाशय दान किया था।

“इस एक गर्भाशय ने तीन पीढ़ियों को पोषित किया है” डॉ ब्रानसट्राम का कहना है। डॉक्टर ने एक परिक्षण टेस्ट के तौर पर नौ महिलाओं में गर्भाशय का ट्रांसप्लांट किया है, जिसमें यह महिला भी शामिल हैं। तो को समस्या के कारण हटाना पड़ा। वह अब अन्य परिक्षणों पर काम कर रहे हैं।

इस माता को उम्मीद है की एक दिन वह अपने बेटे को एक भाई या बहन दे पाए। योजना के अनुसार दूसरा बच्चा हो गया और उनके गर्भाशय को हटा दिया गया है ताकि उन्हें एंटी-रिजेक्शन दवाइयाँ ना लेनी पड़े।

“परिवार ने बताया की शिशु को उसके जन्म के बारे में सारी जानकारी तब दी जाएगी,जब वह उसे समझने योग्य हो जाएगा। “ हमारे लिए वह हमारा बेटा है,एक अद्भुत नन्हा-सा बच्चा और जो चीज उसे लेकर आई है वह खास और अनोखी है। लेकिन हम उसे अन्य शिशुओं की तरहा एक साधारण शिशु की तरह देखते हैं। मेरा विचार है कि उसे पता होना चाहिए की हमे उसकी कितनी चाहत थी। आशा करती हूं की जब वह बढ़ा हो, तो गर्भाशय का ट्रांसप्लांट मेरी जैसी महिलाओं के लिए स्वीकार्य हो और उसे पता हो की इससे संभव बनाने में वह भी शामिल था।”

उस व्यक्ति को धन्यवाद देने के लिए जिन्होंने उनके माता-पिता बनने का सपना पूरा किया, महिला ने अपने बेटे का मध्य नाम मैट रखा है।


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