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जानिए कब शिशु का एम्बिकल कॉर्ड उनसे अलग होता है

एम्बिकल स्टंप आपके शिशु के गर्भ में रहने की आखिरी निशानी है। स्टंप लगभग 2-3 सेंटीमीटर लम्बा होता है और बाद में सूखकर झड़ जाता है। लेकिन बहुत सी चिंतित और पहली बार मां बनने वाली महिलाएं यह जानने के लिए उत्सुक होती है कि उनके शिशु का एम्बिकल कोर्ड स्टंप कब झड़ता है और इसके झड़ने से पहले और इसके बाद इसका ध्यान कैसे रखें। अधिक जानकारी के लिए आगे पढ़िए:

एम्बिकल कॉर्ड स्टंप क्या है?

प्लेसेंटा, जो आपके शिशु को गर्भ में आक्सीजन और पोषण प्रदान करता है वह एम्बिकल कोर्ड के द्वारा शिशु से जुड़ा होता है। एम्बिकल कोर्ड की दो स्लैप आर्टिरीज होती है और एक लम्बी वेन। इसमें कोई नस नहीं होती है। शिशु को जन्म देने के बाद आपको डॉक्टर एम्बिकल कोर्ड पर क्लिप लगा देते हैं। चूंकि इसमें नस नहीं होती है इसलिए शिशु और मां किसी को भी इस प्रक्रिया के दौरान दर्द नहीं होता है। इसके कटने के बाद, टिशूज का स्टैंप शिशु की नाभि से जुड़ा रहता है और इसे एम्बिकल कॉर्ड स्टंप के तौर पर जाना जाता है। एम्बिकल कॉर्ड स्टंप झड़ जाता है और इसका निशान नाभि के रूप में हमेशा रहता है।

एम्बिकल कॉर्ड स्टंप कब झड़ता है?

शिशु के जन्म के बाद, आमतौर पर एम्बिकल स्टंप सूख जाता है (शुरुआत में यह बैंगनी नीला या नीला और सफेद लगता है, पर सूखने के बाद यह काला पड़ जाता है) और यह 7-21 दिन में झड़ जाता है। इसके बाद हल्का लाल चिन्ह छूट जाता है। एम्बिकल स्टंप के झड़ने के बाद दाग का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इसमें संक्रमण की संभावना होती है।

एम्बिकल कॉर्ड स्टैंप को कैसे साफ़ करें?

एम्बिकल कॉर्ड स्टंप को गर्म पानी और हल्के साबुन में डूबोई हुई रूई से साफ़ करें। अतिरिक्त पानी को निचोड़ना न भूलें।

ध्यान से स्टंप के किनारों और आसपास की त्वचा को रुई से साफ़ करें।

अगर स्टंप चिपचिपा या गंदा हो, तो इसे साफ़ पानी से साफ़ करें और स्टंप के आसपास का हिस्सा साफ़ कपड़े से सुखाएं। आप हवा से भी इसे सूखा सकते हैं।

स्टंप अपने आप जल्दी सूखता है। इसलिए किसी भी तरह का डिस्इनफेक्टेंट जैसे कि अल्कोहल या हाइड्रोजन परओक्साइड न लगाएं।

एम्बिकल स्टंप की देखरेख कैसे करें?

जब-तक कि शिशु का एम्बिकल कॉर्ड झड़ न जाए तब तक इन बातों का ध्यान रखें:

इस बात का ध्यान रखें कि डायपर एम्बिकल स्टंप से न लगे। डायपर को स्टंप से दूर रखें और मोड़ दें। या फिर ऐसे डायपर खरीदें जिसमें स्टंप के लिए जगह बनी हो।

स्टंप पर हवा लगने देने से इसे सूखने का अवसर मिलता है, जो कि इसके जल्द ठीक होने के लिए आवश्यक है।

शिशु को ढ़ीले सूती कपड़े पहनाएं जिससे हवा की आवाजाही में आसानी हो और यह जल्दी सूख सके।

स्टंप के झड़ने तक शिशु को टब में नहलाने के बजाए स्पोंज से नहलाएं।

कभी भी स्टंप को उखाड़ने की कोशिश न करें। इसे अपने आप झड़ने दें। वरना संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।

एम्बिकल कॉर्ड स्टंप में संक्रमण के क्या लक्षण है?

अगर एम्बिकल कोर्ड के संक्रमण को नज़रअंदाज़ किया जाए तो यह जानलेवा संक्रमण साबित हो सकता है जिसे ओमफालिटिस कहा जाता है। इसलिए अगर शिशु में यह लक्षण दिखाई दें तो फौरन चिकित्सीय जांच कराए:

अगर शिशु स्टंप या उसके आसपास की त्वचा को छूने पर रोए

अगर शिशु को बुखार या जरूरत से ज्यादा नींद आए

अगर स्टंप की सतह लाल हो जाए

अगर शिशु के स्टंप से मवाद निकले

अगर स्टंप से लगातार खून बहे

एम्बिकल कॉर्ड स्टंप झड़ने के बाद नाभि की देखभाल कैसे करें?

शिशु के एम्बिकल कोर्ड स्टंप के झड़ने के बाद, यह स्वाभाविक है कि थोड़े समय के लिए उसमें सूजन हो और साफ़ या हल्का पीला द्रव खून के साथ उसमें से निकलें। हालांकि, एम्बिकल कोर्ड के झड़ने के बाद संक्रमण से बचाव के लिए उसका ध्यान रखना आवश्यक है:

नाभि के हिस्से को साफ और सूखा रखें

उस हिस्से को डायपर से न लगने दें

अल्कोहल या अन्य किसी भी उत्पाद का प्रयोग नाभि पर न करें

नाभि के हिस्से को रुई से साफ़ करें और साफ़ कपड़े से सूखाएं

कभी-कभार उस हिस्से पर सिल्वर नाइट्रेट लगाने का सुझाव बाल-रोग विशेषज्ञ द्वारा दिया जाता है।

नवजात शिशु की नाभि को ठीक होने में कितना समय लगता है?

एम्बिकल कोर्ड के झड़ने के बाद उत्पन्न हुए छोटे से घाव को भरने में एक हफ्ते से लेकर दस दिन तक का समय लगता है।

एम्बिकल ग्रेनूलोमा क्या है?

एम्बिकल ग्रेनूलोमा टिशूज का लाल गांठ है जो शिशु की नाभि पर एम्बिकल कोर्ड के सूखने और झड़ने के बाद बनी रहती है। इससे दर्द नहीं होता है। इसमें से थोड़ा स्त्राव और द्रव निकल सकता है। आमतौर पर, यह अपने आप चला जाता है लेकिन इस हल्के संक्रमण को आपके डाक्टर आसानी से ठीक कर सकते हैं।

एम्बिकल कॉर्ड से संबंधित कुछ धार्मिक रस्में:

भारत और मैक्सिको में माना जाता है कि शिशु के एम्बिकल कोर्ड से खुशियां आती हैं इसलिए इसे शिशु की गर्दन के पास रखा जाता है। तुर्की में, इसे शुभ चिन्ह के रूप में घर में रखा जाता है।

कुछ जगह एम्बिकल कोर्ड स्टंप के झड़ने के बाद इसे पीपल के पेड़ के नीचे फेंका जाता है और कुछ लोग इसे जमीन में गाड़ देते हैं और इसमें पौधे लगाते हैं। यह माना जाता है कि शिशु की सेहत भी उस पौधे जैसी रहेगी।

यह भी माना जाता है कि सिक्का या कोई भी सपाट सतह वाली वस्तु शिशु की नाभि पर लगाने से नाभि अन्दर चली जायेगी।

यह याद रखें कि यह सब रस्में रिवाज़ है और इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। शिशु की नाभि बहुत ही संवेदनशील जगह हैं और इसलिए कुछ भी आजमाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

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