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जानें अपने बच्चे के साथ सोने के अद्बुध फ़ायदे


  हालांकि लोकप्रिय मिडिया ने साथ सोने के कई नकारात्मक प्रभाव बताएं हैं, लेकिन वैज्ञानिक तथ्य कुछ और ही बयां करते हैं। परिवार में सभी के लिए साथ सोने के बहुत फ़ायदे है। अपने बच्चों के साथ सोने के छह प्रमुख फ़ायदे इस प्रकार है –

 

आत्मानिर्भता को प्रोत्साहित करना – हालांकि आमतौर पर यह माना जाता है कि साथ सोने से बच्चे स्वयं पर निर्भर नहीं हो पाते हैं लेकिन शोध में इसके विपरीत ही पता चला है। जो बच्चे अपने माता-पिता के साथ सोतो है वह जल्दी आत्मनिर्भर बनते हैं और उन्हें किसी ट्रांजिशनल ओबजेक्ट जैसे चादर या खिलौनों की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि वह माता-पिता से दूर होने के तनाव का अनुभव नहीं करते हैं। डॉ जय गोर्डन, “गुड नाईट: हेपी पैरेंट” के लेखक लिखते हैं “ जब बच्चे नियमित रूप से अपने बड़ों की मौजूदगी या उन्हें पकड़कर सोते हैं,तो यह बहुत ही कम देखा जाता है की वह अंगूठा चूसने या सुरक्षा के लिए किसी सामान को ढूंढ़े।”

इससे आत्मसम्मान बनता है – जो बच्चे परिवार के साथ सोते हुए बड़े होते हैं उनका आत्मसम्मान बढ़ता है,वह व्यवहार संबंधी समस्याओं का सामना कम करते हैं, उन्हें पियर प्रेशर का कम दबाव होता है और जीवन के साथ वह ज्यादा खुशहाल और संतुष्ट होते हैं। इन बच्चों में तनाव संबंधी विकार,उन बच्चों से कम होता है जो माता-पिता के साथ नहीं सोते हैं।

शारीरिक और मानसिक कल्याण को बढ़ाना – मानसिक स्वास्थ्य लाभ की दृष्टि से भी जो बच्चे माता-पिता के साथ उन्हें लाभ होता है। पेरेंटिंग के विशेषज्ञ और बालरोग विशेषज्ञ डॉ विलियम सिर्यस बताते हैं की “ बीते तीस सालों में हमारी पिडियाट्रीक प्रैक्टिस के दौरान साथ सोने वाले परिवारों का अध्ययन करने के दौरान हमने शिशुओं पर‌ इसके कई स्वास्थ्य लाभों देखें हैं। यह वृद्धि और शारीरिक व भावनात्मक, बौद्धिकता सभी में फ़ायदेमंद है। यह अतिरिक्त स्पर्श विकास को बढ़ाता है।

तनाव के जोख़िम को कम करना – साथ सोने पर आधारित अपने एक शोध में हावर्ड के मनोवैज्ञानिक माईकल कोमोन ने यह खोजा है कि जो शिशु अकेले सोते हैं उन्हें तनाव और (STD) का अधिक खतरा होता है।साथ सोने वाले बच्चे अपनी मां के साथ मनौवैज्ञानिक सामंजस्य रखतें हैं। मां और शिशु की निकटता नवजात शिशु की नींद,श्रीवास्तव, हृदय दर और शिशु के तापमान को नियंत्रित रखता है। जो बच्चे अकेले सोते हैं और रोने का अनुभव करते हैं उनमें तनाव वाले हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो उनके विकासशील मस्तिष्क को प्रभावित करता है। डॉ कॉमन्स बताते हैं की “यह आपको तनाव, बीमारी साथ ही दिमागी बीमारी की संभावना को बढ़ाता है और इससे उभरना भी मुश्किल होता हैं।”

 

 

नर्सिंग मां के लिए सरल – जो माताएं अपने शिशु के साथ सोती है वह जल्द बेहतर महसूस करती है। क्योंकि शिशु की देखभाल के लिए उन्हें बार-बार बिस्तर से नहीं उठना पड़ता है और उनके सोने का पैटर्न कम प्रभावित होता है वह दिन के समय ज्यादा केंद्रित और सतर्क रहती है।

नज़दीकियां बढ़ती है – जो बच्चे अपने माता-पिता के साथ सोते हैं उनमें उन बच्चों की अपेक्षा परिवार से प्रेम और नज़दीकी अधिक होती है,जो बच्चे अकेले सोते हैं। साथ सोने से परिवार को एक-दूसरे के साथ और अधिक समय बिताने का अवसर मिलता है और वह प्रेम और मधुर फल साथ व्यतीत करते हैं।

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