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जानें अपने शिशु के बारे में कुछ अद्बुध बातें - आप अचंभित हो जायेंगे -


अगर हम आपको बताएं की आपका बच्चा जानता है की वो क्या कर रहा है तो आप शायद हसेंगी क्योंकि आपको ये मज़ाक लगेगा, लेकिन ये सच है! आपके बच्चे के पास प्यारा बनने के साथ और हर चीज़ अपने मुँह में डालने के साथ और भी बहुत कुछ करने की क्षमता रहती है| जी बच्चे दिखने में ज़रूर मजबूर और अपना ध्यान ना रखने के काबिल लगते हों लेकिन हम आपको बता दें की वो उनका सिर्फ नाटक रहता है| सुनने में थोड़ा आश्चर्यजनक लगता है है ना? इस बात को अच्छी तरह जान्ने के लिए नीचे दी गयी बातों पर नज़र डालें:

1. बच्चों की नीकैप(kneecap)नहीं होती

बच्चे बिना नीकैप के पैदा होते हैं, जी आपने बिलकुल सही पढ़ा| बच्चों के घुटनों की जगह कई कार्टिलेज होते हैं जो नीकैप जैसे दीखते हैं, ये कार्टिलेज बच्चों के 6 महीने के होने के बाद विकसित होते हैं| हालांकि बच्चे पैदा होते साथ ही रेंगना शुरू कर सकते हैं, हम सच कह रहे हैं! यकीन ना हो तो अपने बच्चे को स्तनपान कराने के लिए अपनी छाती पर स्तन से थोड़ी दूर रखें और कुछ मिनटों बाद उसे दूध पिता देखें|

2. नवजात शिशु को रोना नहीं आता

बच्चों को जो चाहिए होते है उसके लिए वो चीखते और चिल्लाते हैं लेकिन रोते नहीं! बच्चों के पैदा होने के 3 हफ़्तों तक उनके आंसू नहीं बनते क्योंकि उस समय तक आंसुओं की वाहिनी(tear duct) विकसित नहीं होती| बच्चों की आँखों को स्वस्थ रखने के लिए उनमें नमी ज़रूर आती है लेकिन कई हफ़्तों तक उनसे आंसू नहीं निकलते| कई बच्चे तो 4-5 महीने बाद आंसू निकालना शुरू करते हैं जो की काफ़ी अनोखी बात है|

3. बच्चों के शरीर में 300 हड्डियाँ होती हैं

बड़ों से भिन्न, बच्चों के शरीर में 300 हड्डियाँ होती हैं जो की बड़ो से 50% ज़्यादा होती हैं| बच्चे के बढ़ते सालों में उनकी हड्डियाँ एक दूसरे से जुड़ कर 206 हो जाती हैं| जैसे की बच्चे की खोपड़ी में बहुत सारी हड्डियाँ होती हैं जो की एक दूसरे पर ओवरलैप होकर डिलीवरी के समय बच्चे को गर्भ से निकलने में मदद करती हैं| बच्चे के सर पर एक काफ़ी मुलायम हिस्सा होता है जिसे फोंटानेल कहते हैं, खोपड़ी का अच्छी तरह से विकास होने से पहले वो एक बहुत ही सेंसिटिव एरिया रहता है|

4. नवजात शिशु हमारी तरह सुन सकते हैं, देख सकते हैं और सूंघ सकते हैं

नवजात शिशु बड़ों की तरह अच्छे से सुन सकते हैं| किसी भी आवाज़ को सुनकर वो चौंक जाते हैं, इसलिए नहीं की वो आवाज़ आहिस्ते से तेज़ हो जाती है बल्कि वो उनके लिए नयी होती है| वो अपनी माँ की आवाज़ बस एक शब्द सुनकर ही पहचान लेते हैं, वो आवाज़ उनके दिमाग को एक्टीवेट करता है| हैरानी की बात ये है की नवजात शिशु पैदा होते ही अपनी माँ की आवाज़ पहचान लेते हैं, जब बच्चा पैदा होता है तो उसके सुनने की शक्ति पूरी तरह नहीं बनती क्योंकि उसके कान तब भी तरल पदार्थ से भरे होते हैं जिसकी वजह से उन्हें सारी आवाज़ें सुनाई नहीं देतीं| वो एक ही आवाज़ पहचान पाते हैं और वो है उनकी माँ की आवाज़! इस स्तिथि में उनके सूंघने की शक्ति अच्छी होती है लेकिन देखने की शक्ति कमज़ोर रहती है, नवजात शिशुओं को केवल पास कि चीज़ें दिखाई देती हैं क्योंकि इस अवस्था में उनका दिमाग सही से चीज़ों को समझ नहीं पाता| बच्चों के दिमाग में 100 बिलियन न्यूरॉन शामिल रहते हैं और इसी कारण वो अपने आस-पास की सारी चीज़ों पर ध्यान देते हैं| बच्चों को अपनी माँ और दूसरे लोगों के बीच अन्तर करने में कई हफ्ते लगते हैं|

5. उनके बाल झड़ते हैं

आपके बच्चे के सीर पे भले ही अभी काले और घने बाल होंगे लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है की वो सदैव वैसा ही रहेगा| पहले कुछ हफ़्तों में बच्चे के बाल झड़ते हैं और कुछ सालों में वापस बढ़ जाते हैं, कुछ हफ़्तों में उनके बाल स्ट्रेट से कर्ली भी हो सकते हैं|

6. बच्चों को हर समय नींद आती है

बच्चे हर समय नींद में होते हैं| अपने बढ़ने के पहले साल में वो रात के मुकाबले दिन के हर घंटे में केवल 3 मिनट के लिए चौकन्ना रहते हैं| एक बच्चे का दिमाग 60% तक ग्लूकोज़ का उपयोग करता है और इसी कारण उन्हें अधिक मात्रा में नींद की आवशयकता होती है|

7. मुस्कुराना

बच्चों की असली मुस्कराहट उनके पैदा होने के एक महीने बाद ही आती है| उनकी मुस्कराहट देखने के लिए आप बच्चे को कुछ हसाने वाली आवाज़ या चेहरा बनाकर ट्राई करें अगर एक बार में वो ना मुस्कुराये तो दोबारा कोशिश करें|

8. बच्चे एक दिन में 300 मर्तबा हस्ते हैं

बच्चे दिन भर में 300 मर्तबा हस्ते हैं जबकी बड़े केवल 60 मर्तबा| ये इस कारण है क्योंकि बच्चे ने अभी हसना सीखा है और उसे हसने में मज़ा आता है, इससे हमें ये सीखना चाहिए की बच्चे हमसे ज़ायदा जीवन का मज़ा लेते हैं|

9. गर्भ में बच्चों की मूछें आती हैं

बच्चे का गर्भ में जब 4 महीना हो जाता है उसकी मूछें निकल आती हैं जो एक महीना होते-होते उसके पुरे शरीर में फैल जाती हैं, इस बाल को लानूगो कहते हैं| ये बाल बच्चे के पैदा होने से पहले गर्भ में ही झड़ जाते हैं और बच्चा उसे खा लेता है, ये पचा हुआ बाल बच्चे का पहला पोट्टी होता है|

10. जो बच्चियाँ लड़की होती हैं उन्हें पीरियड्स होता है

जब बच्चे माँ की गर्भ में होते हैं, वो अपनी माँ के हॉर्मोन को सोकते हैं| इसलिए पैदा होने के बाद बच्चियों की युटरीन लाइनिंग झड़ती है, उनके स्तन से थोड़ा दूध निकलता है और छोटी-मोती पीरियड्स भी होती है| कभ-कभी उनके निप्पल से खून भी निकलता है, ये थोड़ा डरावना है लेकिन सच है|

है ना ये चौंका देने वाली बातें? इन बातों को पढ़ें और अपने बच्चे के प्रति जानकारी पाएं!

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