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जानिए पत्नी की प्रेगनेंसी से क्यों घबराते हैं पति

 

नन्हे मेहमान के आने की खबर सुनते ही माता-पिता फूले नहीं समाते हैं। साथ ही परिवार, रिश्तेदार और क़रीबी दोस्तों की शुभकामनाओं की मानों बौछार होने लगती है। पहली बार माता-पिता बनने वाले लोग बहुत ही उत्साहित होते हैं और समय रहते इससे जुड़ी योजनाएं बनाते हैं।‌ गर्भावस्था के दौरान स्त्री के शरीर में कई बदलाव होते हैं और प्रमुखता उन्हें ही इन बदलावों से प्रत्यक्ष रूप से गुजरना पड़ता है तो दूसरी ओर उनके साथी अर्थात पुरुष को भी अप्रत्यक्ष रूप से कई परिवर्तनों को स्वीकार करना होता है। कुछ ऐसी ही कशमकश में संबंध, व्यवहार और विचारों में बहुत सारे बदलाव आते हैं। जिस तरह यह दौर स्त्री के लिए बिल्कुल नया होता है उसी तरह पुरुषों के लिए भी यह एक नया अनुभव होता है। इन बदलावों के साथ ही पुरूषों को कुछ बातों की चिंता होने लगती है और वह उन सभी चीजों को सोचकर घबरा जाते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि अपनी पत्नी की गर्भावस्था को लेकर पतियों को किन बातों का डर सताने लगता है और क्यों? यह पांच भय कुछ इस प्रकार हैं:-

1. आदर्श पिता न बन पाने का भय

 

एक ओर तो पिता बनने की खबर सुनते ही पुरुष खुशी से मदमस्त हो जातें हैं और दूसरी ओर उन्हें यह डर भी सताने लगता है कि वह एक आदर्श पिता बन भी पाएंगे या नहीं? उन्हें इस बात की चिंता रहती है कि अपने बच्चे के लिए वह अच्छे पापा की इमेज को कैसे बरकरार रखेंगे। दरअसल बच्चे को किसी चीज़ पर रोकने-टोकने के लिए पहले उन्हें खुद उन चीजों को छोड़ना होगा और तभी वह अपने बच्चे के लिए एक आदर्श पापा की छवि बना पाएंगे और इस सुधार की प्रक्रिया का भय उन्हें बहुत कचोटता है।

2. ज़िम्मेदार पिता न बन पाने का डर

खुशियों के साथ ही यह डर भी पुरुषों के मन में बैठने लगता है कि वह अपने बच्चे और परिवार की बढ़ती जिम्मेदारियों को संभालने में सक्षम होंगे या नहीं? जिम्मेदारियों का स्तर पर अलग-अलग होता है। एक ओर उनपर भावनात्मक ज़िम्मेदारी बढ़ने लगती है जैसे कि पत्नी को संभालना और सहयोग देना तो दूसरी ओर परिवार और नन्हीं सी जान को समय देने, परवरिश व उसके संरक्षण का दायित्व भी पिता पर होता है। साथ ही ऐसे समय पर वित्तीय ज़िम्मेदारी को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। ऐसे में पुरुषों को इन बातों का तनाव होने लगता है।

3. अपनी आज़ादी को खोने का ख़ौफ़

हर इंसान को सबसे ज्यादा प्यार अपनी आज़ादी से होता है और जब वह उसे ख़तरे में पड़ता देखते हैं तो उन्हें एक अजीब सा डर सताने लगता है। इसी तरह की भावना पुरुषों के दिलो-दिमाग पर छा जाती है उन्हें लगता है कि अब दोस्तों के साथ बाहर जाना, देर रात घर आना या अपने लिए समय निकालने का वक्त उन्हें नहीं मिलेगा। उन्हे दफ्तर से समय पर घर आना होगा और साथ ही अपने साथी का घर के कामों में हाथ बंटाना उनके लिए अपने पसंदीदा मैच देखने और आउटींग से ज्यादा जरूरी होगा। इन बातों से उन्हें बंदिश लगने का भय होता है।

 

4. पत्नी के साथ समय न मिल पाने का डर

गर्भवती होते ही अधिकांश महिलाओं का सारा ध्यान अपने शिशु की ओर हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान हो या उसके बाद, महिला का सारा समय शिशु की देखभाल में जाता है और उनके लिए अपने लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। पुरुषों के लिए भी शिशु की अहमियत उतनी ही होती है लेकिन अपनी पत्नी के साथ बिताए जाने वाले प्यार के पलों को वह बहुत याद करते हैं और उन्हें यूं व्यस्त देखकर उन्हें दूरियों का डर सताने लगता है।

 

 

5. डिलीवरी की प्रक्रिया का भय

डिलीवरी के दौरान होने वाला दर्द और अपने साथी को उस दर्दनाक दौर से गुजरते हुए देखने का भय सभी पुरुषों को होता है। साथ तस्वीर सामान्य डिलीवरी या सी-जेरियन डिलीवरी के बाद की दिक़्क़तों का अनुमान लगाकर वह इसकी सभी संभावनाओं को लेकर डरने लगते हैं।

इन कुछ अहम बातों को लेकर पुरुष अपनी पत्नी के गर्भवती होने के बाद खुशी के साथ-साथ थोड़ा सहम भी  जाते हैं  और इसलिए यह आवश्यक है कि समय के साथ इन बदलावों को खुले दिल से और उचित सूझबूझ के साथ स्वीकार किया जाए‌। ‌

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