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इस तरह करें अपने शिशु का शाकाहारी आहार से परिचय

डॉक्टर कहते हैं की शाकाहारी आहार शिशुओं के लिए अद्भुत रूप से पोष्टिक होता है। मांसाहारी आहार लेने वाले शिशुओं की तुलना में शाकाहारी आहार लेने वाले शिशु स्वस्थ और तंदुरुस्त रूप से वृद्धि करते हैं। माता-पिता को केवल यह जानने की जरूरत है की कब व कैसे इस आहार की शुरुआत करें।

जन्म लेने के पहले कुछ महीनों तक शिशु को केवल स्तनपान या फार्मूला मिल्क दिया जाता हैं क्योंकि उनका मुंह और गला अन्य भोजन को ग्रहण करने में सक्षम नहीं होता है और यह दूध उन्हें सभी आवश्यक पोषण प्रदान करता है।

लगभग चार से छह महीने की आयु के आसपास माता-पिता को सुझाया जाता है की उन्हें शिशु को अन्य प्रकार का आकार खिलाना शुरू कर देना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है की उन्हें स्तनपान या फार्मूला मिल्क देना बंद कर देना चाहिए हालांकि इसके साथ अन्य आहार के साथ उनका परिचय कराया जा सकता है। जो भोजन खिलाया जा रहा है उसके गाढ़ेपन को करीब से परखा जाना चाहिए। शुरुआत में आपको इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए की जो खाना आप अपने नन्हे मुन्ने को दे रहे हैं वह सही से मसला हुआ और जितना संभव हो पतला होना चाहिए। हमेशा अर्द्ध ठोस आहार से शुरूआत करें।

शाकाहारी आहार के लिए आप दालों, मुलायम पौधों का आहार/ प्लांट फूड,मसले हुए फल और अच्छी तरह पक्की व मसली हुई सब्जियों से शुरूआत कर सकते हैं। यह बात सुनिश्चित करना आवश्यक है की आपके शिशु को पर्याप्त मात्रा में आवश्यक पौष्टिक लोह और ज़िंक तत्व मिलें। आप यह सिरियल और कुछ सब्जियों द्वारा प्राप्त कर सकते हैं लेकिन शिशु को सब्जियां खिलाते वक्त सावधानी बरतें। इस बात को सुनिश्चित करें की आपका शिशु उस भोजन को खाने में सक्षम हो,जिस गाढ़ेपन के साथ आप उन्हें वो देती है, वरना भोजन के गाढ़ेपन में परिवर्तन करें।

निम्न आवश्यक आहार तत्व,जिनकी आवश्यकता आपके शिशु को निश्चित रूप से है :-

कार्बोहाइड्रेट – काम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह अनाज,सेम/बिन्स और अन्य सब्जियों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

फाइबर – यह सही पाचन-क्रिया में सहायक होता है और इस बात को सुनिश्चित करता है की आपके शिशु का पाचनतंत्र असरदार रूप से कार्य करे। यह आहार में दालों, फलों,ब्रेड,,मिलेट्स, मक्का और अन्य प्रकार के आधार द्वारा शामिल किया जा सकता है।

प्रोटिन – यह सामान्य विकास के लिए आवश्यक है। हालांकि उच्च मात्रा में लेना आवश्यक नहीं है। यह लेनटिल्स/फलियां,मेवे और बीज, सोया उत्पाद और टोफू, दालें,मक्के और दूग्ध उत्पादों से प्राप्त किए जा सकते हैं।

आयरन – यह मूल कुंजी है खून में हिमोग्लोबिन बनाने की जो आक्सीजन ले जाने के लिए आवश्यक है। आप अपने शिशु को हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, शिशु के लिए ब्रेकफास्ट सिरियल व आयरन सप्लिमेंट आदि शामिल कर के सुनिश्चित कर सकते हैं की आपके शिशु को पर्याप्त मात्रा में लोह तत्व मिलें।

विटामिन बी-12 – यह विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है, भोजन से ऊर्जा प्रदान करता है और फोलिक एसिड बनाता है। यह आहार में दूग्ध उत्पादों, सिरियल, फलियां और कम यिस्ट एकस्ट्रेक शामिल कर के लिया जा सकता है।

फैट – मस्तिष्क के विकास के लिए थोड़ा वसा का सेवन लाभकारी होता है और शिशु के सामान्य वृद्धि दर के सहयोग के लिए यह सामान्य है। वसा युक्त आहार में ओवेकेडो, सोयाबीन, चिज़ और दूग्ध उत्पाद,पिनट बटर आदि शामिल हैं।

कैल्शियम – यह स्वस्थ हड्डियों के विकास के लिए आवश्यक है और यह दूग्ध उत्पाद,हरी सब्जियां, शकरकंदी, चावल और दूध आदि द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

सबसे बेहतर होगा की आप शुरुआत सिरियल्स (चावल,ओट्स और बारहवें) से करें,दूध के साथ मिश्रित करें क्योंकि यह शरीर के पाचन के लिए उचित है। उसके लिए फल और सब्ज़ियाँ मसलकर दें। जब आपका शिशु अच्छी तरह खाना सीख लें तो आप उन्हें ब्रेड और सूखे मेवे देने से शुरुआत कर सकते हैं।

सबसे पहला और आवश्यक बिंदु है की आप धैर्य रखें और अपने शिशु को उनके समय अनुसार सीखने दें और अपने शिशु पर इसका दबाव ना बनाएँ। उनको भोजन खिलाने की शुरुआत के लिए सबसे बेहतर तरीका है की आप उन्हें स्वयं आहार चुनने दें और जब वह बड़े हो जाए तो उन्हें स्वंय भोजन करने दें।

 

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