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इस ख़बर को पढ़ें और बताएं की क्या महिलाओं की सुरक्षा उनके कपड़ों पर निर्भर करती है?


आये दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की खबरें सुनने को आती है और इसी वजह से लड़कियों और महिलाओं को हमेशा काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।किसी लड़की या महिला के साथ कुछ छेड़छाड़ होती है तो समाज उन्हीं को दोष देता है की शायद उसी ने कुछ ऐसा वैसा पहना होगा। हर किसी की अपनी-अपनी सोच और धारणाएं होती है, लोग चाहे कितने भी आगे आ गए हों लेकिन सोच अभी भी वही है, भले ही हमारा देश तकनीक के मामले में एडवांस हो रहा हो पर लड़कियों की सुरक्षा और कानून के मामले में अभी भी कई समस्याएं हैं।

अगर किसी लड़की या महिला के साथ छेड़छाड़ होती है तो अब भी लोग पहले यह देखते हैं की उसने क्या पहना था जो उसके साथ ऐसा हुआ। भले ही लोग लड़की को सान्तवना दे या उसके लिए न्याय की मांग करे लेकिन इसी बीच कुछ लोग यह कहते भी पीछे नहीं हटते की लड़की का पहनावा ही उसके साथ होने वाली घटनाओं का कारण होता है। लेकिन शायद बैंगलुरु की जैस्‍मीन पाथेजा ने इस धारणा को बहुत हद तक गलत ठहरा रही है कि क्राइम्स का कपड़ों से कुछ लेना-देना नहीं होता है। जैस्मीन एक आर्टिस्ट एंड एक्टिविस्ट है और वो महिलाओं के कपड़ों से जुड़ी लोगों की मानसिकता के खिलाफ काम कर रही हैं।

जैस्‍मीन पाथेजा ने बैंगलुरु में अपने घर में एक रूम को म्यूजियम का रूप दिया है जिसमें उन्होंने सेक्सुअली असॉल्टेड लड़कियों के कपड़ों को रखा है। इस रूम में आम लड़कियों के डेली लाइफ के कपड़े हैं जो भले ही आम से दिखते हो लेकिन हर कपड़े के पीछे अपनी एक कहानी छिपी है। इन कपड़ों के बीच एक रेड एंड ब्लैक जम्पसूट भी है जो उस लड़की का है जिसके साथ 2016 के न्यू इयर में बेंगलुरू में छेड़छाड़ हुई थी।

उनकी इस कैंपेन का नाम है 'आई नेवर आस्क फ़ॉर इट' (I never ask for it) उनके इस कैंपेन को सोशल मीडिया के ज़रिये काफी सर्पोट मिल रहा है। उनके कलेक्शन को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है की लड़कियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ का उनके कपड़ों से कोई लेना देना नहीं होता, बल्कि यह आपराधिक सोच होती है जिसका शिकार बन जाती है महिलाएं क्यूंकि यहां इस म्यूजियम में स्कूल यूनिफॉर्म से लेकर गाउन तक रखा।

आज हर उम्र की लड़कियां और महिलाएं सेक्सुअल असॉल्ट का शिकार हो जाती है। एक स्कूल की लड़की से लेकर एक साड़ी पहनने वाली महिला भी सार्वजनिक स्थान पर आते-जाते सेक्सुअल असॉल्ट का शिकार हो जाती है, सिर्फ रेप करना ही सेक्सुअल असॉल्ट नहीं होता बल्कि ट्रैन, बस या कहीं आते-जाते जब महिला कोई अनचाहा स्पर्श महसूस करती है या उन्हें लगता है की कोई उन्हें घूर रहा है तो वो भी एक सेक्सुअल असॉल्ट ही माना जाता है।

 

लोगों को कोई हक़ नहीं कि वो एक महिला के चरित्र को उनके पहनावे से आंके। कमेंट्स में ज़रूर बताएं की क्या महिलाओं की सुरक्षा उनके कपड़ों पर निर्भर करती है ?

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