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इंटरमिटेन्ट फास्टिंग के छह अद्भुत फ़ायदे


लोग अलग-अलग कारणों से उपवास रखते हैं, किसी धार्मिक या अन्य कारणों से। अगर आप यह स्वास्थ्य या वज़न संबंधी कारणों से करना चाह रहे हैं, तो इसे करने के कई आकर्षक कारण है। लगातार कम कैलोरी का आहार या अत्यधिक भोजन, जिसमें कि कार्बोहाइड्रेट जैसे पदार्थों को हटा दिया जाता है, इसके विपरीत इंटरमिटेन्ट फास्टिंग में एक भोजन के बाद दूसरा छोड़ दिया जाता है। इसका यह मतलब होता है की एक या दो दिन के अंतराल में उपवास रखा जाता है। यह वजन घटाने से लेकर स्वास्थ्य तक इसके कई फायदे हैं।

इंटरमिटेन्ट फास्टिंग क्या है?

इंटरमिटेन्ट फास्टिंग मैटाबॉलिक स्वास्थ्य को बढ़ाने और वजन कम करने के लिए किया जाता है। इसमें आप कुछ समय के लिए उपवास रखते हैं या अपने खाने की मात्रा को सीमित करते हैं जैसे कुछ पेय पदार्थ और इसके बाद आप कुछ समय के लिए आप सामान्य भोजन खा सकते हैं,जब तक कि आप दोबारा उपवास ना करें। उपवास कोई कठिन कार्य नहीं होना चाहिए। वास्तव में जब आप सोने जाते हैं,तब आपका शरीर आठ घंटे के उपवास में होता है। उपवास का समय आपके शरीर को अन्य प्रक्रियाओं पर ध्यान देने का मौका देता है। ऐसे बहुत से लोग होते हैं, जो हर रोज नाश्ता नहीं करते हैं। जिससे रात के खाने और अगले दिन के भोजन के बीच सोलह घंटे का अंतर होता है। इसे 16/8 मैथड कहा जाता है। अन्य हफ्ते के एक दिन उपवास ले सकते हैं,आप अपनी सुविधानुसार यह चुन सकते हैं। यह है इंटरमिटेन्ट फास्टिंग के छह फ़ायदे–

सूजन को कम करना – आपका शरीर रसायनों और प्रिजर्वेटिव खाद्य, ट्रांस फैट के सेवन और अन्य पदार्थों और रोज़ाना टोक्सिन आदि पदार्थों के सम्पर्क में आने से सूजन का अनुभव करता है। लम्बे समय तक बनी रहने वाली सूजन कई बिमारियों के कारण होते हैं, जिनसे आजकल लोग पीड़ित हैं, जैसे अल्जाइमर रोग, मधुमेह, गठिया, हृदय रोग , तनाव और कैंसर आदि। जब आप उपवास रखते हैं तो यह आपके शरीर को इससे लड़ने में मदद करता है। एक अध्ययन में पाया गया है कि यह सूजन से होने वाली बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है। इसके लिए आप 16/8 फास्टिंग मैथड अपना सकते हैं।

वजन पर प्रभाव – बहुत से लोग वज़न कम करने के लिए उपवास रखते हैं। हालांकि लम्बे समय तक उपवास रखने के अलग-अलग परिणाम हो सकते हैं, इंटरमिटेन्ट फास्टिंग यदि सही तरीके से कि जाती है, तो वह इसमें सहायक होती है। एक अनुसंधान में पाया गया है कि 48 घंटों का उपवास मैटाबॉलिज्म पर काफी असर डालता है। इससे 3.6% की दर से मैटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है। एक अन्य अनुसंधान में 84 घंटों के उपवास के बाद मैटाबॉलिज्म रेट में 14% की वृद्धि हुई है। क्योंकि जल्दी फास्टिंग से परिणाम शीर्घ आते हैं। इंटरमिटेन्ट फास्टिंग आपको बड़े हुए मैटाबॉलिज्म को घटाने में मदद करता है।वह भी लम्बी अवधि का विकास रखें बिना।

इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार – इंटरमिटेन्ट फास्टिंग से इंसुलिन संवेदनशीलता को सुधारने में मदद मिलती है। यह मधुमेह में इंसुलिन कोशिकाएं उत्पादित करता है जो पैंक्रियाज को प्रभावित करती है। इस बात का ध्यान रखें कि आप यह अक्सर या लम्बे समय तक ना करें। यही इंटरमिटेन्ट फास्टिंग का मूल है। अगर आप लगातार उपवास लेंगे, तो सुबह ग्लूकोज सहनशीलता और इंसुलिन के कारण आपके पेट की चर्बी और बढ़ेगी।

अस्थमा के लक्षणों को सुधारता है – अगर आप अस्थमा के मरीज हैं या आपका वजन ज्यादा है, तो इससे आपके लक्षणों में सुधार हो सकता है। यह उनपर लागू होता है, जिन्हें न्यून श्रेणी का अस्थमा है। अध्ययन में पाया गया है कि प्रत्येक दिन 400-500 कैलोरी का भोजन ना करने से सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों से बचा जा सकता है। इससे ओक्सिडेंट तनाव का स्तर भी कम होता है।

इससे फैट बर्न बढ़ता है – इससे फैट बर्न बढ़ता है। जब आप उपवास करते हैं, आपके शरीर का इंसुलिन गिरने लगता है। और इसके परिणाम स्वरूप ग्लूकोज की अनुपस्थिति कारण फैट बर्न होता है। फास्टिंग के बाद इंसानो के हार्मोन स्तर भी बढ़ता है।यह हार्मोन फैट बर्न और मांसपेशियों की बढ़त में सहायक होते हैं।

इससे न्यूरोप्रोटेक्टिव फायदे भी होते हैं – इससे न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव पड़ता है। यह प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाकर, अल्जाइमर जैसे रोगो से लडने की क्षमता देता है। कुछ शोधों से पता चला है कि भोजन का सीमित उपभोग करने से,महंगी दवाइयों के सेवन से बचा जा सकता है। ताकि इसके लक्षण से बचा जा सके।

सावधान रहें, क्योंकि इंटरमिटेन्ट फास्टिंग सबके लिए नहीं है।

किसी भी तरह का उपवास किसी डाइटिशियन की देखरेख में किया जाना चाहिए। जो आपके लिए पोष्टिक आहार योजना तैयार कर सकें। हालांकि इंटरमिटेन्ट फास्टिंग नुकसानदेह नहीं है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह हानिकारक हो सकती है। यह है कुछ स्थितियां जहां उपवास करना,एक अच्छा विचार नहीं है।

-अगर आप गर्भवती हैं

-अगर आपको मधुमेह है और आपको शुगर लेवल संबंधी समस्या है, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर ही आपको यह करना चाहिए।

-अगर आपको खाने से संबंधित कोई समस्या है।

-अगर आप सही से नहीं होते हैं।

-अगर आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या है।

-अगर आप व्यस्क नहीं है।

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