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भारतीय महिला के साज-श्रृंगार के फायदे और उनका महत्तव

भारतीय महिलायें कई प्रकार के आभूषण पहनती हैं जो न केवल उनकी खूबसूरती बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी असर डालते हैं। चलिये पढ़ते हैं।

स्त्री की साज सज्जा का महत्व

महिला के रिश्तेदारों की आर्थिक स्थिति उसके बदन पर पहने हुए आभूषणों से होती है। जितने ज़्यादा गहने उतने अच्छे घर से महिला को माना जाता है। इसके साथ ही आर्थिक तंगी के समय में गहने बेचे भी जा सकते हैं जिनसे इंसान को पैसे मिल जाते हैं जिससे उनकी निजी दिक्कतें दूर की जा सकती हैं। महिलाओं के लिए कई प्रकार के रत्न मिलते हैं जिनमें से वे चुन सकती हैं जैसे की सोना, चाँदी, हीरा, प्लैटिनम आदि।

प्रत्येक गहने की अहमियत

1. मांग टीका

इसे महिला के माथे पर सजाया जाता है और यह कान पर डाला है। माना जाता है की महिला के माथे में एक विशेष चक्र का केंद्र स्थित है। यह केंद्र स्त्री और पुरुष के मिलन का चक्र माना जाता है। जिस प्रकार अर्धनारीश्वर के माथे के केंद्र में टीका लगा होता है ठीक उसी प्रकार महिला के माथे के केंद्र में टीका स्त्री-पुरुष के चिरस्थायी मिलन का प्रतीक होता है। इसीलिए माथे के मध्य में टीका लगाना या पहनना स्त्री-पुरुष के शारीरिक और मानसिक मिलन का चिन्ह है।

2. नथनी/नथ/नाक की बाली

विज्ञान ऐसा मानता है की जिन महिलाओं की नाक छिदी होती है उन्हें प्रसूति में कम दर्द कम होता है। उनकी यौन इच्छा भी अधिक होती है और प्रजनन शक्ति भी अच्छी होती है। यह महिला को सम्मोहित होने से बचाता है क्योंकि यह मस्तिष्ट की स्वर तरंगों को नियमित करने की क्षमता रखता है।

3. कान की बालियां

एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार, प्रेत और बुरी आत्माएं शरीर के खुले छेदों कके माध्यम से उसमें प्रवेश आरती थीं। कान में बाली पहनने से, महिला पर आत्मा/काला साया नहीं आ पाता था। कान पर सही दबाव डालने पर महिला का गर्भाशय ग्रीव(cervix),दिमाग और किडनी स्वस्थ्य रहते हैं। इसके साथ ही मूत्राशय भी सही से काम करता है।

4. गले का हार

गले जिन्हें ह्रदय के पास पहना जाता है, वह दिल की सेहत को फायदा पहुंचाता है और साथ ही प्यार बढ़ाता है। इससे बुरी नज़र से बचा जा सकता है। हार महिला को उसके अंदरूनी शक्ति के करीब रखता है। गले का हार महिला पर शुभ सौभाग्य लाता है। यह भी सम्मोहन से बचाता है।

5. कड़े,कंगन और चूड़ियाँ

कंगनों, चूड़ियों और कड़ों की खन खन सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह लाता है। यह लकड़ी, कांच से लेकर कीमती रत्नों जैसे की सोने, चांदी के रूप में मिलते हैं। यह हाथों का आकर्षण भी बढ़ाते हैं। हाथसूना भी नहीं लगता और इसका प्रयोग अधिक्तर विवाहित महिलाएं करती हैं।

6. पैरों की अंगूठी/बिछिया

इसके पीछे छुपा वैज्ञानिक कारण यह कहता है की इन्हें पैरों की उँगलियों में पहनने से महिला का मासिक धर्म/माहवारी नियमित और सुनिश्चित होता है। उनमें होने वाला दर्द कम होता है क्योंकि अंगूठी का आकार गोल होता है। पैरों की नसें गर्भाशय तक जुड़ती हैं जिससे उसमें सेहतमंद ऊर्जा पैदा होती है।

पैरों की अंगूठी ज़्यादातर चांदी की बनी होती है, इसलिए वह पृथ्वी से नकारात्मक ऊर्जा खुद में ग्रहण कर लेती हैं और शरीर को तरोताज़ा और पुनःनिर्माणित करती है।

7. हाथों की ऊँगली की अंगूठी

मनुष्य की चौथी ऊँगली सीधा दिमाग की कोशिका और नस से जुड़ी होती है। इसलिए यहाँ से होना वाला कोई भी दबाव सीधा दिमाग तक पहुँचाता है। धातु और ऊँगली की रगड़ से महिलाओं की शारीरिक सेहत और दिमागी सेहत सुधरती है। उनमें अपनी ज़िन्दगी परेशानियां झेलने की शक्ति आती है।

उन्हें अपनी भावनाएं काबू करने में भी मदद मिलती है।

8. मंगलसूत्र

माना जाता है की मंगलसूत्र बदन के दबाव स्थलों को नियमित करता है। इसके साथ है वह पहनने वाली महिला का रक्त प्रवाह नियंत्रित करता है। यह शादीशुदा महिला के लिए बहुमूल्य आभूषण है। इसे पति के द्वारा महिला को उसके विवाह पर दिया जाता है। यह विवाहित जीवन की खुशहाली के लिए पहना जाता है।

9. करधनी/कमरबंध

इन्हें ज़्यादातर शादी-विवाह जैसे समारोहों में पहना जाता है। यह महिलाओं के पेट और कमर पर बढ़ती चर्बी को नियंत्रित करता है जिससे उनका मोटापा काबू होता है। साथ ही यह महिलाओं की कमर को और भी आकर्षक और मोहक बनाता है।

अब आपको समझ आया होगा की आभूषण पहनने के पीछे भी एक ख़ास वजह है। इन्हे यूँ ही नहीं पहना जाता। इन्हें अपनी सभी सखियों में शेयर करें।

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