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इन युक्तियों द्वारा रोकें अपने शिशु की ना-रुकने वाली हिचकियाँ


जब आप अपने नवजात शिशु को अपनी बाहों में लेते हैं और उसके मासूम चेहरे को देखते हैं तो आपको सिर्फ यह महसूस होता है की आप उसके प्यारे चेहरे की प्रशंसा ही करते रहे। फिर आप बार-बार आती हिचकियों की आवाज़ सुनते हैं। आप अपने शिशु के चेहरे पर अजीब असहजता देखते हैं और आपको समझ नहीं आता है की अब आगे क्या करें।

हिचकियां नवजात शिशुओं के बीच आम बात है और तथ्यात्मक रूप से आपके शिशु को गर्भ में भी हिचकियां होती है। जी हां भ्रूण को भी हिचकियां होती है और आप इसे महसूस कर सकती हैं और दूसरे तिमाही से इसका अनुभव कर सकती हैं।

आपके गर्भ में हिचकियों का कारण होता है एमिनोटिक द्रव को निगल लेना लेकिन बाहरी दुनिया में ऐसे बहुत से कारण हैं जिनकी वजह से हिचकियां होती है:
गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट की सामग्री एसोफैगस की ओर मुड़ती है। चूंकि शिशुओं के पास विकसित एसोफैगल स्पिंटचर नहीं होता है और यही रिफ्लक्स का कारण होता है। यह एसिड बढ़ाता है और भोजन का वापस आना डायफ्रॉम के आसपास की नसों को झपकाता है, जिसके परिणामस्वरूप हिचकियां होती है।

अधिक भोजन करना

यह स्तनों के दूध के कारण भी हो सकता है और पेट में यह ब्लोटिंग का कारण बन सकता है। अचानक हुई ब्लोटिंग से डायफ्रॉम खिंचता है और इससे आपके शिशु को हिचकियां आती है।

हवा में अशुद्धि 

शिशुओं का प्रतिरक्षा तंत्र और रेस्पिरेटरी सिस्टम संवेदनशील होता है। इसलिए प्रदूषित कण और धूल मिट्टी से खांसी होती है और सांस लेने में दिक्कत के कारण हिचकियां होती है।

अधिक हवा भीतर लेना

अगर आपका शिशु बोतल से दूध पीता है तो इस बात की संभावना है की वह अधिक मात्रा में हवा निगल लें। क्योंकि बोतल का दूध आपके स्तनों के दूध की अपेक्षा धीमें जाता है। इसलिए इसके लक्षण अधिक दूध पीने के समान ही है। इससे शिशु को दिक्कत होती हैं और यही हिचकियों का कारण होता है। अब आपको संभावित कारणों का पता लग गया है की आपके शिशु को हिचकियां क्यो होती है,तो आप आसानी से उनकी मदद कर सकते हैं।

यह है हिचकियों को रोकने के कुछ उपाय:
शिशु के पीठ की मालिश करें

अपने शिशु को सीधे बैठाएं और उनकी पीठ रगड़ें। शिशु की पीठ को सर्कियूलर मोशन में रगड़ें पीठ के निचले हिस्से से कंधों तक। अधिक दबाव ना डालें क्योंकि इसका मकसद डायफ्रॉम को ढीला कर के उन्हें हिचकियों से आराम पहुंचाना हैं।

उन्हें चीनी दें

पुराने समय से चला आ रहा घरेलू नुस्खा जो एकदम हिचकियों से राहत दिलाता है। अगर आपका शिशु ठोस पदार्थो का सेवन करता है, तो आप उन्हें चीनी के कुछ दाने दे सकते हैं। अगर नहीं,तो चीनी का ताजा घोल तैयार करें या अपनी उंगली उसमें डालें और अपने शिशु को वह चूसने के लिए दें। चीनी में डायफ्रॉम पर पड़ रहें दबाव को शांत करने का गुण विद्यमान होता है, जिससे हिचकियों को रोका जा सकता है।

शिशु का ध्यान भटकाएं

जब भी आपके शिशु को हिचकियां आएं उन्हें उनके मनपसंदीदा खिलौने या रंग-बिरंगी चीजें दिखाएं, इससे उनका ध्यान आसानी से हिचकियों से हट जाएगा। नर्व में होने वाला बदलाव शिशु को शांत करेगा व साथ ही हिचकियों की गति को भी कम करेगा।

ग्राइप वाटर

हालांकि ग्राइप वाटर की अच्छाई का कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है,यह नवजात शिशुओं में गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह मां और शिशु दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि यह फौरन हिचकियों को दूर करता है। ग्राइप वाटर को साफ पीने के पानी में मिलाएं और इसे अपने शिशु को दें। लेकिन हमेशा शिशु को कुछ भी देने से पहले अपने बालरोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। अगर उन्हें इससे एलर्जी हुई तो यह खतरनाक हो सकता है।

शिशु को कभी भी खाते या पीते समय सोने ना दें

बोतल से दूध पीने की प्रक्रिया स्तनो से दूध चूसने की प्रक्रिया की तरह नहीं है। बोतल से दूध निकलता रहता है और इससे ना केवल हिचकियां होती है बल्कि कैविटी भी होती है।


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