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इन टिप्स को अपनाकर सुनें अपने शिशु की पहली बोली


  आपके नन्हे-मुन्ने की खिलखिलाहट, मुस्कराहट और उसकी छोटी-छोटी नटखट हरकतें ही आपको इतना खुश और रोमांचित कर देती है, तो ज़रा सोचिये जब वो टूटे-फूटे शब्द में बोलेगा और तोतली जुबां से प्यारी-प्यारी बातें करेगा तब तो आपके ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहेगा। बच्चे की मासूम आवाज़ और उनकी प्यारी बातचीत सुनने के लिए हर माता-पिता बेचैन रहते हैं। कुछ बच्चे जल्दी बोलना शुरू करते हैं तो कुछ थोड़े देर से और यह बिल्कुल ही नॉर्मल है। अगर आप चाहते हैं की आपका शिशु सही वक़्त पर बोलना सीखे तो अपनाये नीचे दिए गए कुछ ख़ास तरीके जिससे की आपके शिशु को बोलना सीखने में मदद होगी।

 

 माता-पिता दें वक़्त 

 

बच्चों का बोलना घर के वातावरण पर भी निर्भर करता है, यह माता-पिता की ज़िम्मेदारी है की वो शिशु के साथ वक़्त बिताएं। उन्हें गोद में बैठाकर उनके सामने अपने होठों को हिलाकर उन्हें ये यकीन दिलाएं की आप उनसे बात कर रहे हैं फिर धीरे-धीरे अपने शिशु के साथ बैठकर प्यारी-प्यारी बातें करें। इससे उनमें बातें करने की चाह जागेगी और वो बोलने की कोशिश करेंगे।

उच्चारण करें 

जब भी आप अपने बच्चे के साथ बैठे या खेलें तो उसे एक नया शब्द सिखायें, बार-बार उस शब्द का उच्चारण करें, और चीज़ों को दिखाकर शब्दों को समझाएं इससे बच्चे जल्दी सीखेंगे। जैसे अगर आपका शिशु खिलौनों जैसे गाड़ी या बॉल से खेलता है तो उस चीज़ को दिखाकर वो शब्द बोलें, इससे बच्चे के दिमाग में उस चीज़ का एक चित्र बन जाता है जो उनके दिमाग़ में ज़्यादा दिनों तक रहता है।

उन्हें सामाजिक बनाये

अपने बच्चे को दूसरे बच्चों से घुलने मिलने दें, उन्हें बाहर घुमाने ले जाएँ। दूसरों के साथ मिलकर आपका शिशु बोलने की कोशिश करेगा और साथ ही साथ मिलनसार भी बनेगा। इसके अलावा आपका शिशु जब बाहर घूमने निकलेगा तो उसकी ख़ुशी और बढ़ जायेगी और जब वो खुश होगा तो चीज़ों को सीखने की और ज़्यादा प्रयास करेगा और जल्दी बोलना सीखेगा।

बच्चों को टीवी दिखाएं, खिलौने दें

आजकल बच्चे टीवी देखकर कुछ भी जल्दी सीख जाते हैं इसलिए बच्चों को टीवी में कार्टून्स दिखाएं, पोएम्स दिखाएं जिससे की ना सिर्फ उनका मनोरंजन हो बल्कि वो बोलना भी जल्द सीखें। इसके आलावा आप अपने शिशु के लिए बोलने वाले खिलौने लाएं इससे भी उन्हें जल्द बात करने में मदद होगी।

सोते वक़्त सुनाये लोरी या कहानी 

ध्यान रहे रात को आप अपने शिशु को प्यारी-प्यारी लोरी या कहानी ज़रूर सुनाएं क्यूंकि रात को पूरी शान्ति रहती है और आपके शिशु का भी मन शांत रहता है इससे वो बातों को जल्दी समझेंगे और आपके कहानी सुनाने के बीच में आपसे बात करने की भी कोशिश करेंगे। यह नुस्खा आपके बच्चे पर बहुत जल्दी असर करेगा और आपके बच्चे के कम्युनिकेशन स्किल को बढ़ाएगा।

ध्यान रखें-

1. जब आपका शिशु बोलना सिख रहा हो तो कभी उनके सामने लड़ाई-झगड़ा या चिल्लाएं नहीं इससे शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

2. हर वक़्त शिशु के साथ रहें और ध्यान रखें की आपके शिशु को कोई कुछ अपशब्द तो नहीं सीखा रहा है क्यूंकि कभी-कभी लोग बच्चों को मज़ाक-मज़ाक में बुरे शब्द सीखा देते हैं।

3. अपने शिशु के सामने हमेशा शांत होकर बात करें इससे उनका व्यवहार भी शांत होगा।

4. सरल शब्द सिखाएं ताकि उन्हें सीखने में आसानी हो और वो जल्दी सीखें।

5. उनपर शब्दों को सीखने के लिए दबाव ना डालें उन्हें ख़ुशी से सिखाएं और उन्हें खुश रखें, इससे वो जल्दी बात करना सीखेंगे। 

इन बातों को ज़रूर आपनायें और अगर आपके शिशु की बोलने की उम्र थोड़ी पार कर गई है और अगर वो फिर भी नहीं ठीक से बोल रहा तो घबराएं नहीं एक बार डॉक्टर से ज़रूर मिलें और उनसे परामर्श लें।  क्यूंकि हर माता-पिता के लिए अपने शिशु के जादुई आवाज़ जितनी मधुर स्वर कुछ नहीं हो सकती।

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