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एचआईवी से पीड़ित होना बन सकता है गर्भवती महिला के बच्चे के लिए खतरा


यदि आप गर्भवती हैं और एचआईवी से पीड़ित हैं तो आपके बच्चे को भी इसका ख़तरा हो सकता है| एचआईवी का वायरस उस तक पहुँचने की सम्भावना बनी होती है, ये बात तय है की यदि माँ-बाप एचआईवी से पीड़ित हैं तो बच्चे तक फ़ैलने का ख़तरा रहता है|

अगर समय रहते हुए एचआईवी पॉजीटिव गर्भवती डॉक्‍टर से अपना ईलाज करवाना शुरु करवा देना चाहिए ताकि समय रहते बच्‍चें को एचआईवी के खतरे से बचाया जा सकें। आइए जानते है कि एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती कैसे प्राकृतिक गर्भधारण से एक एचआईवी निगेटिव या स्वस्थ बच्चा पा सकते हैं?

एचआईवी के सम्‍पर्क में ऐसे आता है शिशु गर्भावस्था के दौरान, अपरा को पार करते हुए जन्म के दौरान, शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से स्तनपान के दौरान, स्तनदूध के जरिये

एंटी रेट्रोवाइरल थेरेपी

अगर आप एचआईवी पॉजीटिव हैं, तो गर्भावस्‍था के दौरान आपकी विशेष देखभाल देखभाल की जरुरत होती है इस दौरान एंटी रेट्रोवाइरल थेरेपी (एआरटी) गर्भवती को दी जाती है जो कि वायरस के इलाज में मदद करता है। ये दवाएं वायरस को नहीं मारती लेकिन उनकी प्रगति धीमी कर देती है और वायरस के विकास को रोकती हैं। यह एचआईवी वायरस की प्रक्रिया को पूर्ण विकसित एड्स में बदलने के समय को आगे धकेल देता है। इन उपचारों से गर्भावस्था और जन्म के दौरान शिशु तक संक्रमण पहुंचने की संभावना काफी कम हो सकती है।

सेफ सेक्‍स

एचआईवी पॉजिटिव लोगों को हमेशा सुरक्षित सेक्स करना चाहिए। इसका कारण यह है कि अगर एक साथी का वायरल लोड अधिक है तो दूसरे के लिए दवाओं के प्रति शक्तिशाली रेज़िस्टेंस प्रतिरोधी वायरल निशान को पार करने का एक मौका है। इसलिए यदि दो एचआईवी पॉजिटिव लोग बच्चे को जन्म देने और स्वाभाविक रूप से गर्भ धारण करने की योजना बनाते हैं तो उन्हें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उनका वायरल लोड कम है, जो एआरटी केंद्रों पर समुचित परीक्षण और परामर्श के द्वारा किया जा सकता है।

नॉर्मल या सीजेरियन डिलीवरी

एचआईवी से ग्रसित गर्भवती महिला का प्रसव सामान्‍य होगा या फिर सीजेरियन होगा, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका संक्रमण कितना नियंत्रित है| अगर, ब्लड टेस्ट में पता चलता है कि विषाणुओं का स्तर काफी ज्यादा है, तो शायद आपको सीजेरियन ऑपरेशन करवाने की सलाह दी जा सकती है।

एचआईवी पॉजिटिव मां बच्‍चें को स्‍तनपान न कराएं

एचआईवी विषाणु स्तनदूध के जरिये माँ से शिशु तक पहुंच सकता है। इसलिए, अगर आप एच.आई.वी. पॉजिटिव हैं, तो आपको शिशु को डिब्बाबंद दूध (फॉर्मूला दूध) पिलाने की सलाह दी जाएगी।

18 महीनें के बाद कराए शिशु का ब्लड टेस्ट

एच.आई.वी. ग्रस्त मां से जन्मे शिशु अपने रक्त में इस विषाणु के खिलाफ एंटीबॉडीज लेकर पैदा होते हैं। हालांकि, अगर शिशु को एच.आई.वी. नहीं है, तो ये एंटीबॉडीज धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। कई बार ऐसा होने में 18 महीने भी लग सकते हैं। इसलिए 18 महीने के बाद आपके शिशु को एक ओर रक्त परीक्षण करवाने के लिए कहा जाएगा।

हमारे ब्लॉग को पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, हम आशा करते हैं की ये नया साल आपके लिए ढेर सारी खुशियाँ लेकर आये| टाइनीस्टेप की ओर से न्यू यर के लिए आपके लिए एक तोहफ़ा, क्लीक करें और पाएं खुशियाँ यहाँ

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