Link copied!
Sign in / Sign up
720
Shares

प्रेगनेंसी और उसके बाद का यह अमृत - गोंद के लड्डू - कैसे बनाएं (विधि) और लाभ


 गर्भावस्था के बारे में बात करते समय उन नौ महीनों के बारे में सोचते हैं, जिस दौरान मां का आहार महत्वपूर्ण होता है। इस स्थिति में जिन बातों का पालन किया जाता है उसे तर्क द्वारा नकार दिया जाता है। यह पता चलता है की पहली बार गर्भवती हुई मां नाजुक होती है, गर्भधारण के दौरान उन्हें उचित देखभाल और सही आहार की जरूरत होती है। पारंपरिक रूप से भारत में मां को प्रसव के चालीस दिन के दौरान शक्ति और पोषण प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष व्यंजन दिए जाते हैं और इसी तरह का एक प्रसिद्ध व्यंजन है “ गोंद के लड्डू”।

यह लड्डू खाने योग्य गोंद, देसी घी, चीनी, किशमिश और बहुत सारे सूखे मेवों से बनता है। यह लड्डू उच्च कैलोरी से युक्त होता है,जिसकी आवश्यकता मां को शिशु को स्तनपान कराने के दौरान होती है। यह माना जाता है की यह लड्डू जल्दी ठीक होने और शिशु की डिलीवरी के बाद उन्हें शक्ति और आवश्यक पोषण प्रदान करता है।

इस लड्डू को घर में तैयार करना सास और दादी के लिए आम परंपरा हैं। अगर हम इतिहास में वापस जाएं तो,यह माना जाता है की लड्डू का वास्तविक आविष्कार चिकित्सीय उद्देश्य के लिए भारतीय सर्जरी और चिकित्सा के जनक सुश्रुत द्वारा किया गया था। उदाहरण के लिए तिल का लड्डू, जो आज हम सभी बेहद पसंद करते हैं। चौथी सदी ईसा पूर्व, में सुश्रुत ने अपने मरीज़ों के इलाज के लिए इसे एंटीसेप्टिक के रूप में इस्तेमाल किया। तिल के बीज, गुड़ और मूंगफली के सम्मिश्रण को इसके उपचार गुणों के लिए जाना जाता है। गोंद का लड्डू इसी विरासत की देन है।

इस लड्डू की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करना उचित नहीं माना जाता है लेकिन मां को पोषित करने के लिए यह अद्भुत हो सकता है। यह लड्डू भारत के उत्तरी छोर जैसे हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में प्रसिद्ध है। यह प्रसिद्ध लड्डू सर्दियों के दौरान भी खाया जाता है क्योंकि यह शरीर को गर्म रखने के लिए जाना जाता है। यह महाराष्ट्र में दीनकच्चे लड्डू के नाम से प्रसिद्ध है। महाराष्ट्र में कई जगह इसमें मेथी के बीज भी डाले जाते हैं। गुजरात में इसे गुंडर लड्डू कहा जाता है।

 

मेहर राजपूत, फिटपास में पोषण विशेषज्ञ का कहना है की “ गोंद के लड्डू के बहुत से पौष्टिक और आयुर्वेदिक लाभ हैं। यह स्वाद रहित और गंधरहित होता है व पानी में डालने पर यह जैल जैसे तत्व में बदल जाता है। इसे अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिश्रित किया जा सकता है जैसे मेथी दाना,सौंफ,काली मिर्च,तिल के बीज और अजवायन।

यह लड्डू जोड़ों को लूब्रिकेंट करने मे मदद करते हैं और कमर दर्द के साथ जोड़ों के अन्य दर्द को कम करते हैं। यह स्तनपान कराने वाली मां के शरीर के पोषण के लिए उन्हें दिया जा सकता है। यह वसा और रेशे से भरपूर होता है और स्तनपान कराने वाली मां को प्रतिरक्षा के लिए दिया जा सकता है क्योंकि यह प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है।

इसका कोई प्रमुख दुष्प्रभाव नहीं है लेकिन अधिक सेवन से कब्ज और पेट में असुविधा हो सकती है। यह सुझाया जाता है की अगर आप किसी भी प्रकार से गोंद का सेवन कर रहे हैं तो पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि कब्ज या आंतों मे तकलीफ़ से बचा जा सके।”

सोनिया नारंग ओरिफ्लेम इंडिया की वैलनेस एक्सपर्ट का कहना है की “ गोंद बहुत ही पौष्टिक होता है और यह कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने और कमर दर्द को कम करने में मदद करता है। केवल एक गोंद का लड्डू पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करता है,जो घंटों तक बनी रहती है। यह बहुत ही पौष्टिक सामग्री से बना होता है इसलिए यह मिड मील के लिए उचित आहार है। गोंद को स्तनो के दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए जाना जाता है।

गोंद के लड्डू बनाने की विधि –

 

 

सामग्री :

खाने योग्य गोंद - 125 ग्राम

छुहारा - 500 ग्राम

सूखा नारियल - 500 ग्राम

गुड़। - 500 ग्राम

घी - 500 ग्राम

बादाम। - 125 ग्राम

खसखस - 50 ग्राम

हालीम - 50 ग्राम

इलाइची - 50 ग्राम

मेथी दाना। - 30 गल्ला

जायफल - 1

 

विधि –

सूखे नारियल (जबतक की भूरे ना हो जाए), जायफल,हालीम,मेथी दाना, सौंफ, खसखस, बादाम और इलाइची को भूनें।

सभी भूनी हुई साम्रगी को ब्लेंड करें,जबतक की यह थोड़ा मोटा पाउडर ना बन जाए।

एक कढ़ाई में एक टेबलस्पून घी डालें और गर्म होने पर एक टेबलस्पून गोंद डालें और 3-5 सेकेंड पकने दें जब तक की गोंद के बुलबुले ऊपर ना उठें। एक बड़े बर्तन में इसे निकाल लें और एक तरफ रख दें।

यह प्रक्रिया बची हुई गोंद के साथ दोहराएं और इस बात का ध्यान रखें की सारा गोंद एक ही बार में घी में ना मिलाएं, इससे गोंद बीच में बिना पकी हुई रह‌ सकती है।

उसी कढ़ाई में एक टेबलस्पून घी डालें और एक बार गर्म हो जाने पर गुड़ मिला दें और तब तक पिघलने दें,जबतक की उसमें से बुलबुले ना निकले। इसके बाद आंच बंद कर दें।

इस पिघले गुड़ को गोंद के साथ मिश्रण के बर्तन में डालें।

सभी ब्लेंड की गई सामग्री को इसमें मिला दें और तबतक मिलाएं जबतक की यह पूरी तरह मिश्रित ना हो जाए।

हथेली पर घी लगाएं और इस मिश्रण की गोलियां बनाएं। और हवाबंद डिब्बे में बंद कर दें।

 

Click here for the best in baby advice
What do you think?
100%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon