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गर्भावस्था में घी का सेवन माँ और शिशु को कैसे प्रभावित करता है?


पुराने ज़माने में गर्भवती महिलाओं को कैलोरी की मात्रा की पूर्ति करने के लिए घी और संपूर्ण मलाई वाला दूध (फुल क्रीम) लेने की सलाह दी जाती थी। परन्तु आज कल डॉक्टर और सेहत विशेषज्ञ(नूट्रिशनिस्ट) गर्भवती को ऐसा करने के लिए दबाव नहीं डालते। ऐसा कहा जाता है की अगर महिला को उल्टी आये या जी मिचलाये तो इनका सेवन ठीक नहीं। गर्भवती को अपने शरीर की हालत देखकर ही घी या तैलीय पदार्थ का सेवन करना चाहिए।

1. कुछ बड़े बुज़ुर्ग आज भी गर्भवती को घी और मलाई वाला दूध लेने के लिए कहते होंगे। उनके अनुसार यह गर्भवती और होने वाले शिशु के लिए अच्छा है। सच तो यह है की अगर गर्भवती महिला संतुलित आहार का सेवन कर रही है, तो घी के रूप में अतिरिक्त कैलोरी जोड़ने का कोई तर्क नहीं है।

2. एक नई शोध से पता चला की एक गर्भवती माँ को उसकी आखिरी तिमाही में प्रतिदिन केवल 200 अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता होती है। अधिकतर डॉक्टर दूसरी व तीसरी तिमाही में प्रतिदिन 300 अतिरिक्त कैलोरी लेने की सलाह देते हैं। गर्भधारण से पहले महिला का वजन कम था या ज्यादा, यह जानने के बाद ही डॉक्टर महिला को बतायेंगे की उसे कितनी कैलोरी की जरुरत है।

3. घी में अत्यधिक फैट्स की मात्रा होने के कारण कोलेस्ट्रॉल लेवल में वृद्धि हो सकती है।

4. गाय का दूध और घी एक गर्भवती महिला के शरीर के लिए सबसे अच्छा उपचार है क्योंकि इसको पीने से यह प्रसव में होने वाले दर्द को कम करता है और बच्चे का जन्म भी बड़ी आसानी के साथ हो जाता है इसलिये हमारे घर के बड़े बुजुर्ग गर्भावस्था के तीसरे माह से ही मां को दूध के साथ घी पिलाने लगते है। यदि इस विषय पर तर्क की बात करें तो घी का सेवन गलत नहीं हैं पर इसकी एक सीमित मात्रा की खुराक होना जरूरी है।

5. एक कटोरी घी की जगह रोजाना एक-दो चम्मच घी का सेवन करना बेहतर समझती हैं। इसे रोटी या परांठे पर चुपड़ कर या दाल में छौंक के रूप में डालकर खाना आम है।

6. गर्भावस्था में, मलाईरहित दूध (टोन्ड/डबल टोन्ड दूध) पीना भी ठीक है। इसमें मलाई युक्त दूध का बस एक तत्व यानि वसा छोड़कर, अन्य सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

अगर आपको सादा दूध पीना पसंद नहीं है, तो आप अन्य दुग्ध उत्पाद जैसे दही, लस्सी, मिल्कशेक, छाछ और पनीर ले सकती हैं।

स्वस्थ गर्भावस्था के लिए यह जरुरी है कि सभी पोषक तत्वों का संतुलित मिश्रण में सेवन किया जाए। अपने अनुपूरक समय पर लेने और एक अच्छे व्यायाम कार्यक्रम का पालन करने से भी मदद मिलती है। अगर आपको पता नहीं चलता कि आपको कितनी वसा का सेवन करना चाहिए, तो अपनी डॉक्टर से परामर्श करें। वह आप के लिए एक आहार योजना बना सकती हैं या फिर एक आहार विशेषज्ञ से मिलने का सुझाव दे सकती हैं।

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