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गर्भावस्था को लेकर महिलाओं के आम भ्रम और उनका सच

  प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं की भावनाओं में अधिक उतार-चढ़ाव आते हैं। वे क्या से क्या सोच लेती हैं। इस पोस्ट के माध्यम से हम अपने पाठकों के ख्यालों के पीछे छुपे सही या गलत के बारे में बताएँगे। क्या जो वो सोच रही हैं वो स्वाभाविक है? सही है? प्राकृतिक है? चलिए जानें।

1. बिस्तर पर लेटना और बच्चे के चेहरे का आकार बिगड़ जाना

 

 

कुछ माओं को डर लगा रहता है की अगर वे पेट के बल लेटेंगी तो इससे उनके गर्भाशय पर दबाव पड़ेगा व नतीजा ये हो सकता है की शिशु के चेहरे का आकार बिगड़ जाये, या शिशु का चेहरा पिचक जाये।

परन्तु सच तो ये है की आप कुछ देर के लिए पेट के बल लेट सकती हैं। आपके शरीर में शिशु के पलने के लिए पर्याप्त जगह रहती है। आप पिलो और तकिया की मदद ले सकती हैं। लम्बे समय के लिए एक ही अवस्था में रहना ठीक नहीं होता इसलिए आप बीच बीच में करवट बदल लें।

2. नाक का मोटा होना

 

 

कुछ महिलाएं इस भ्रम को मानती हैं की गर्भावस्था में उनकी नाक मोटी हो जाएगी।

 

सच्चाई : जी हाँ। गर्भावस्था का समय बीतते बीतते आपका वज़न बढ़ता है। परन्तु सिर्फ नाक ही नहीं बल्कि अन्य अंग भी फूल जाते हैं। बच्चे के जन्म के बाद जैसे-जैसे आपका वज़न गिरेगा, चेहरे का मास कम हो जायेगा।

3. किसी चीज़ को खा लेने से बच्चे की जान को खतरा होना

 

 

कुछ गर्भवती ऐसा मानती हैं की कुछ ऐसा-वैसा खाने से आपके बच्चे का विकास रुक सकता है। इस तरह के ख्याल उन्हें गूगल, प्रेगनेंसी किताबें पढ़ने या फिर किसी सखी के कहने से आते हैं।

सच्चाई: कच्चा खाना, खुली दुकानों से खुला खाना लेना, अशुद्ध जूठा खाना या फिर सड़े/बासी पदार्थों का सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। संतुलित आहार, छोटे-छोटे मील्स समय पर लेने से आपके होने वाले शिशु को कोई खतरा नहीं होगा।

4. मिसकैरेज का डर

 

 

कुछ महिलाओं को डरावने या बुरे सपने/ख्याल आते हैं जिनमें वे बच्चे को बच्चा गिरने के कारण खो देने का अनुभव करती हैं। यह डर सदैव कहीं न कहीं उनके सर पर मंडराता है।

सच्चाई: दरअसल महिला को ऐसे भयभीत कर देने वाले ख्याल तब आते हैं जब उन्हें मुश्किल के बाद गर्भ धारण होता है, या फिर उन्हें किसी दिन-प्रतिदिन की गतिविधि के चलते तनाव होता है। ज़्यादातर मिसकैरेज प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में होते हैं। 15-25% महिलाओं में यह अनहोनी हो भी सकती हैं। गर्भावस्था के 12 हफ्ते सफलतापूर्वक पूरा होने से मिसकैरेज का खतरा कम हो जाता है। अगर आपने 14 हफ्ते पार कर लिए हैं तो आपको बच्चा गिरने कके नकारात्मक ख्यालों को अलविदा कर देना चाहिए।

 

 5. बच्चे में कोई गंभीर रोग या विकृति हो सकती है

 

कुछ महिलाओं में अचानक ऐसे ख्याल आ सकते हैं की उनका बच्चा लाइलाज बीमारी, गंभीर रोग या शारीरिक/मानसिक विकृति का शिकार हो जायेगा।

सच्चाई: प्रकृति में ऐसे हादसे या गलतियां कम ही होती हैं। प्रकृति अपना काम बखूबी करना जानती हैं। इन नेगेटिव विचारों में अपना कीमती वक्त ज़ाया न करें।

6. प्रेगनेंसी में जो वज़न बढ़ता है वो कभी नहीं जायेगा

कुछ महिलाओं को यह डर होता है की उनके बच्चे के जन्म के बाद भी उनका जो वज़न बढ़ा है वह उम्र भर तक रहेगा और वज़न कम नहीं होगा।

 

सच्चाई: जो महिलाएं प्रेगनेंसी के पहले और बाद में व्यायाम करती थीं, वॉक करती थीं, योग करती थीं व शारीरिक रूप से सक्रीय थीं, उनके वज़न घटाने के अवसर बढ़ जाते हैं। जो महिलायें आलसी होती हैं, काम नहीं करती,उन्हें वज़न घटने में वक्त लगता है। ज़्यादा घी तेल का खाना न खाने से वज़न नियंत्रित रहता है।

7. कहीं उनकी डिलीवरी किसी सार्वजानिक स्थल पर न हो जाये

कई महिलाओं को इस बात सोचने में भी शर्म आती है कि कही उनका बेबी सबके सामने न पैदा हो जाये। उन्हें ख्याल आते हैं कि कहीं वे बाहर निकलें और अचानक सब्जी खरीदते या रेस्टोरेंट में उनकी योनि से पानी छूटने लगे।

सच्चाई: कुछ स्थोतियों पर आपका बस नहीं चलता। अगर आपकी योनि से पानी का निकलता है, तो आप पास के लोगों से मदद लें। अपने साथ तौलिया हमेशा लेकर चलिए। वैसे भी आपको संकुचन होने लगेंगे तो इस प्रकार आपको आपका बदन संकेत दे देगा। घबराइए नहीं। धीरज रखिये।

8. समय से पहले बच्चे को जन्म दे देना

कुछ महिलाओं में बच्चे को समय से पहले जन्म देने का डर लगा रहता है। यह स्वाभाविक है। विशेष तौर पर जब महिला को पहली बार माँ बन रही है। उसे कई भय होते हैं क्योंकि उसने कई लोगों से डिलीवरी पेन के बारे में सुना होता है।

सच्चाई: बच्चे का जन्म उसके निर्धारित समय पर होगा। अक्सर डॉक्टर आपको बच्चे के जन्म के आस पास की तारीख बता देंगे। इससे आपको सहायता मिलेगी।

9. क्या वे नवजात को उठा पाएंगी और भविष्य में उसकी देखभाल सही से कर पाएंगी

कई महिलाएं मातृत्व को लेकर इस शंका में आ जाती हैं, की यदि सब कुछ ठीक भी हो जाये, परन्तु क्या वे अपने नन्हे मासूम बच्चे को अपने हाथों में ढंग से उठा पाएंगी? यदि उस दौर को पार भी कर लिया, तो क्या शिशु के आने वाले भविष्य में वे उसे अच्छे इंसान के रूप में पाल पायेंगी? इसी असमंजस में महिला फ़िज़ूल की चिंता अपने सर पे डाल लेती है।

 सच्चाई: घबराहट भी मातृत्व का ही एक हिस्सा है। नई माँ को यह ख्याल आते हैं इसका मतलब वह अपने शिशु की कद्र करती है। धीरे-धीरे सब ठीक हो जायेगा। आपके साथ और भी महिलाएं ऐसा अनुभव करती होंगी। अगर आप किसी से बात करना चाहती हैं तो इसके लिए आप अपने पति, माँ, सास व करीबी सखियों से बात कर सकती हैं।

चिंता, तनाव, गुस्सा व असहाय महसूस करना आम भावनायें हैं। यह सभी के साथ होता है। मुस्कुराइए और अपना हौसला बढ़ाइए। एक काबिल महिला बनें और अपने आने वाले शिशु के लिए प्रेरणास्त्रोत बनें। शिशु मुसीबत में आप ही को आदर्श मानेगा और आपकी मदद व सलाह पर निर्भर रहेगा। अच्छे विचारों को बाँटें।

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