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गर्भावस्था के दौरान मोटापे के प्रभाव


अक्सर गर्भावस्था के दौरान मोटापा एक बड़ी समस्या होता है। चाहे आपकी गर्भावस्था शारीरिक रूप से बिल्कुल ठीक हो, अक्सर कहा जाता है की “ अगर आप गर्भवती हैं तो आप अपने शिशु की सेहत को जोख़िम में डाल रही है”। इसमें कुछ डर सभी गर्भवती महिलाओं को होता है अगर वह मोटी होती है लेकिन खुश खबरी यह है की अगर आपका वज़न अधिक है,तो भी आप स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है। इसमें मारिया कैरी से बेहतर और कौन हो सकता है, उन्होंने गर्भावस्था के दौरान तीस पाउंड वजन बढ़ाया,यह आपको गर्भावस्था के दौरान मोटापे के डर पर विजय पाने में मदद कर सकता है। गर्भावस्था के दौरान अधिक वजन बढ़ने के संभावित खतरे होते हैं लेकिन आपको उनके बारे में अधिक चिंतित होने की जरूरत नहीं है। अगर आप गर्भावस्था के दौरान मोटापे और उसके प्रभावों को लेकर भ्रमित है,तो हम यहां उन मिथकों के और उचित तथ्य के बारे में बताएँगे, जिन पर आप यकीन कर सकते हैं।

समय पूर्व प्रसव का जोखिम

क्या आप जानते हैं की अधिक वजन वाली महिलाओं को समय पूर्व प्रसव का जोख़िम होता है? अक्सर उनकी डिलीवरी समय से पहले होती है, जिससे उनके शिशु का स्वास्थ्य भी खतरे में होता है। यह कहने से हमारा अभिप्राय यह नहीं है की अगर आप गर्भावस्था के दौरान मोटी हैं तो आप खुद को भूखा रहें। क्यों ना आप पहले से ही खुद को इस रोमांचक दौर के लिए तैयार करें। गर्भधारण करने से पहले जिम में कुछ वजन घटाए और खुद को तंदरुस्त रखें।

गर्भावस्था के लाभ से वंचित

अधिक वजन वाली महिलाएं, अक्सर गर्भावस्था के रोमांच से वंचित रह जाती है। आपको मैटरनिटी कपड़े ढूंढने में दिक्कत होती है और अपने सहकर्मियों और साथियों से अधिक वजन पर मिलने वाले सुझाव से आपको तकलीफ़ होती है। जहां अन्य माएं ज्यादा भोजन करती है, वहीं दूसरी ओर आपको गलत भोजन चुनने पर आलोचना का सामना करना पड़ता है।

मोटापे के साथ तनाव भी आता है

तनाव सबसे बड़ी समस्या है, जिसका सामना अधिक वजन वाली महिलाएं करती है और इससे अन्य समस्याएं उत्पन्न होती है। चाहे यह अन्य लोगों द्वारा की गई टिप्पणी हो, इंटरनेट पर मोटापे से संबंधित संकेत, डॉक्टर द्वारा बताएं संभावित जोखिम, तनाव अधिक वजन वाली महिलाओं के आसपास सदैव रहता है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान आपको अपने जीवन में शांति बनाए रखनी चाहिए, ताकि आप और आपका शिशु स्वस्थ रहें।

प्रसव पीड़ा लाने में विफल

अनावश्यक एब्डोमिनल डिलीवरी का परिणाम होता है विफल प्रसव पीड़ा। अधिक वजन वाली महिलाएं अक्सर मेमबरेन रैपचूयर के बाद ओक्सिटोसिन छोड़ पाने में समर्थ नहीं होती है, जिससे प्रसव पीड़ा नहीं होती है। इससे बचने का सबसे बेहतर तरीका है की आप अपने डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें और उचित आहार लें। पहले से तैयार रहना उचित है। निश्चित रूप से उतार चढ़ाव होते हैं लेकिन वास्तविकता आपकी उम्मीदों से गुज़र कर जाती है और यह आनंद का सफर हमेशा आपके साथ रहेगा।

हमने अक्सर सुना है की स्वास्थ्यप्रद बीजों से स्वस्थ्यप्रद पौधे बनते है। बेहतर होगा की गर्भावस्था से पहले आप उचित वजन बनाए रखने पर ध्यान दें, ताकि आप गर्भावस्था के दौरान आने वाली समस्याओं से बच सकें। गर्भावस्था महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अभी भी बदलाव करने के लिए देर नहीं हुई है।

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