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गर्भावस्था में वातावरण का शिशु के चहरे, व्यव्यक्तित्व, भाषा पर असर

एक नई ज़िन्दगी को जन्म देने के लिए आप कितनी उत्साहित होंगी ? उसके लालन-पालन से लेकर उसके पोषण तक सभी का ख्याल आपको करना होगा। ऐसे में उसके लिए सही पर्यावरण भी होना बेहद ज़रूरी है। आप शिशु को किन परिस्थितियों में कैसे जन्म देती हैं यह उसके आने वाले जीवन में ज़रूर प्रभावित करता है।

ऐसा देखा गया है की महिलाएं आने वाले खतरों का आभास कर लेती हैं और शिशु को सुरक्षित जगह पैर सुकून से जन्म देना चाहती हैं। इसीलिए कभी कभार महिलाओं को शहर या घर से कोई दिक्कत होती है तो वे अपने पतियों से बात करके उन्हें बदलने का प्रयास करती हैं।

हालाँकि छोटे तंग घर या शहर बदलने से सकारात्मक प्रभाव पड़ता है परन्तु गर्भवती महिला का ज़्यादा श्रम करना ठीक नही है। इसके पीछे कारण यह है की आप किसी परिचित जगह से अपरिचित जगह जा रही हैं, जहाँ आपको हर नई चीज़ से फिरसे तालमेल बैठाना होगा। कभी कभार नई जगह से एडजस्ट करने में महिला को स्ट्रेस हो सकता है जिससे शिशु की ग्रोथ पर प्रभाव पड़ता है।

कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखिये जब आप घर बदलती हैं

1. घर बदलने से पहले उस जगह का जायज़ा ले लें की क्या वहाँ पानी और इलेक्ट्रिसिटी आती है। अपने आस पास के पड़ोसियों से भी इस बात के बारे में पूछ लें क्योंकि कभी कभी एक दो बार में नए घर के बारे में पता नहीं चलता।

2. जहाँ घर लेना हैं वहाँ बारिश में पानी तो नहीं भरता इसका पता लगा लें। कुछ जगहों में पानी भरने से उन जगहों में रहना मुश्किल हो जाता है।

3. प्रोफेशनल पैकर्स और मूवर्स से बात कर लें। आप और आपके पति को कार के बजाय प्रोफेशनल कर्मचारियों की सहायता लेनी चाहिए ताकि सामान ले जाने में आसानी हो। इस प्रकार महिला के शरीर पर अत्यधिक श्रम नहीं पड़ेगा।

4. आपको घर कब बदलना है इसको अपनी डिलीवरी डेट के अनुसार चुनिए। बेहतर रहेगा की आपकी मकान बदलने और डिलीवरी डेट में पर्याप्त अंतराल हो अन्यथा आप स्ट्रेस में आ जाएगी। हड़बड़ी में मकान बदलने से तनाव आपके शिशु की गर्भ की गतिविधियों को प्रभावित करेगा।

इसके साथ ही समय पर घर बदलने से आप अपनी पड़ोसियों और आस पड़ोस से भली भांति परिचित हो जाएँगी।

5. तीसरी तिमाही में मकान / शहर बदलने की गलती न करें। क्योंकि इस वक्त आपका आराम करना अधिक ज़रूरी है। अत्यधिक भरी भरकम काम करने से मिसकैरेज( बच्चा गिरने) का खतरा होने की सम्भावना होती है। इसीलिए माताओं को आराम करने को कहा जाता है।

6. नई जगह मकान लेने के साथ साथ आप वहाँ के प्रसिद्द और भरोसेमंद डॉक्टर का पता मालूम कर लें, आस पास के सब्ज़ी बाजार जान लें, नज़दीकी फ़ोन रिचार्ज दुकान, दवाई दुकान और फलों के मार्केट का पता लगा लें।

7. घर बदलने से पहले ही तैयारी शुरू कर दें। आप चीज़ों को व्यवस्थित तरीके से रखें। बेडरूम, रसोई, गुसलखाने इत्यादि के सामान को एक जगह रखने से घर बदलने के समय पति पत्नी को सामान खोलने में आसानी रहेगी।

8. गर्मी के मौसम में मकान बदलने से बचें। गर्मी का आप पर दुष्प्रभाव पड़ता है। सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट रेज़ आपके शिशु को विकृत बना सकती हैं।

9. मकान बदलते समय आप किसी शांत जाने का प्रयास करें। इससे आप के बच्चे पर ध्वनि प्रदूषण का असर नहीं पड़ेगा। आपका शिशु शांत वातावरण में आपसे अधिक सम्बन्ध बना पायेगा।

10. मई से सितम्बर में अधिक्तर मकान बदले जाते हैं जिससे आपका खर्चा बढ़ जाता है। राष्ट्रीय छुट्टियों, महीने के आखरी या पहले कुछ दिन को भी मकान बदलना ठीक नही रहेगा।

याद रहे की किसी भी चीज़ की चिंता न करें। अपने बच्चे के लिए आपको थोड़ी दिक्कत का सामना तो करना पड़ सकता है लेकिन आप खुद पर भरोसा रखें। अपनी सास, माँ और पति की सहायता लेना न भूलें।

इसके पहले की आप कहीं ट्रांसफर लें, या घर लें यह सब दिमाग में रखना बहुत ज़रूरी है। दूसरों को जागरूक करने के लिए इसे ज़रूर शेयर करें -

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