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गर्भावस्था के दौरान नींद का महत्व


हर कोई जानता है कि नींद लेना या कम नींद लेना शिशु के आने के बाद सम्भवतः एक बहुत बड़ा बदलाव हो सकता है। हालांकि कई माताओं के लिए यह एक चौंकाने वाली बात होगी की गर्भावस्था के दौरान नींद एक बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अगर समय पर ध्यान ना दिया जाए तो, गर्भवती स्त्री की मातृत्व की दुनिया शुरू होने से पहले ही खराब हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त नींद क्यों महत्वपूर्ण है?

नींद सभी के लिए आवश्यक होती है चाहे वह गर्भवती हो या नहीं। जब लोग थके होते हैं तो वह बहुत चिडचिडे हो जाते हैं, काम पर भी उतने उत्पादक नहीं होते हैं और आमतौर पर उतना सक्रिय महसूस नहीं करते हैं।

नींद की कमी खतरनाक भी हो सकती है। कई सड़क हादसे इसी कारण होते हैं क्योंकि गाड़ी के ड्राइवर को गाड़ी चलाने के दौरान नींद आ रही होती है। अन्य कुछ मामूली हादसे तब होते हैं, जब आप थके होते हैं और आपके ध्यान देने की क्षमता कम हो जाती है जिससे घबराहट बढ़ती है और हादसे होने की संभावना जैसे कोई भारी या नाजुक सामान का गिरना आदि में भी वृद्धि होती है। इसलिए जब आप गर्भवती हो, तो पर्याप्त नींद लेना आपके लिए बहुत आवश्यक होता है क्योंकि आपने जो सामान अपने हाथ में पकड़ा है उसे गिराने का जोखिम आप नहीं उठा सकती हैं।

नींद की कमी को उच्च रक्तचाप और (preeclampsia) बढ़ने के जोखिम के साथ भी जोड़ा जाता है, जो की जितना सुनाई देता है, उतना ही खतरनाक है। स्त्रियों के लिए यह भी आवश्यक है कि वह आने वाली परिस्थितियाँ, जैसे प्रसव, शिशु को जन्म देना और मातृत्व आदि से गुजरने के लिए पर्याप्त आराम करें। प्रसव निर्विवादित रूप से बहुत थका देने वाला शारीरिक अनुभव होता है, तो इससे गुजरने के लिए पर्याप्त आराम करना बहुत आवश्यक है। एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान आमतौर पर जो महिलाएं अपने प्रसव की दी गई तारीख से पहले कम नींद ( पांच घंटे से कम) लेती हैं, उनमें लम्बा प्रसव सत्र या (caesarian section) यानी सर्जरी द्वारा डिलीवरी की संभावना अधिक होती है। ज्यादातर देखे जाने वाले प्रभावों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान कम सोने के कारण ज्यादा लम्बा और थकाने वाला प्रसव काल हो सकता है या (caesarian section) भी हो सकता है जिसे ठीक होने में ज्यादा समय लगता है और इन सब के साथ आपको नवजात शिशु की देखरेख भी करनी होती है।

घर पर नवजात शिशु के साथ आप अवश्य ही थक सकती हैं इसलिए आप अपनी मदद खुद कीजिए और अभी से शुरुआत करिए और अपने आखिरी तिमाही में पर्याप्त नींद लेने का प्रयास करें। स्वाभाविक रूप से शिशु के आ जाने के बाद आपकी नींद का पैटर्न बता पाना मुश्किल है क्योंकि नवजात शिशु को पहले महीने में दिन में आठ से बारह बार स्तनपान कराया जाता है। दुर्भाग्यवश यह स्तनपान का शिडयूल पूरे चौबीस घंटे में फैला होता है, इसके साथ नैपी बदलना और थोड़ा समय शिशु को शांत कराने में भी लगता है और तभी अचानक हमारे सामने परंपरा से चली आ रही नई मां की एक तस्वीर बनती है (जो हमेशा एक ड्रेसिंग गाउन में भारी आंखों के साथ बैठी होती है।)

बेशक, हर बच्चा अलग होता है और निश्चित रूप से आपको अपने प्रियजनों से बहुत मदद मिलेगी, तो ज्यादातर माताओं के लिए यह कोई समस्या नहीं बनेगी लेकिन इसके लिए पहले से तैयार रहना भी, फिजूल नहीं जाएगा।

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