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गर्भाशय के डिफेक्ट जिनसे गर्भ धारण में परेशानी आती है

गर्भाशय महिला के शरीर का वह महत्वपूर्ण अंग होता है जो एक शिशु का निर्माण करता है और उसे धरती पर लाता है। गर्भाशय का महत्व महिला माँ बनने पर बेहतर समझती है। अक्सर इस अंग में दिक्कतें होती हैं जो गर्भ न ठहरने का कारण बन जाती हैं। पति-पत्नी के बीच स्वस्थ्य यौन सम्बन्धों के बावजूद महिला माँ नहीं बन पाती या बीच में ही बच्चा गिर जाता है। इसका कारण होता है यूटरस की विकृति। इसे समझने के लिए अंदरूनी जाँच की ज़रूरत पड़ती है।

इस पोस्ट में अपने पाठकों को उन्ही समस्याओं के बारे में सरल शब्दों में बताएँगे।

1. महिला को माहवारी में असहनीय दर्द होना (dysmenorrhea)

कई महिलाएं पीरियड पेन को सामान्य दर्द समझ कर नज़रअंदाज़ कर देती हैं। इसलिए जब वे बच्चा चाहती हैं, तब गर्भ धारण नहीं हो पाता। पीरियड पेन योनि टाइट होने की वजह से या गर्भाशय का मुखद्वार छोटा होने की वजह से होता है। इसलिए आप इसकी जाँच करवाएं।

2. गर्भाशय मुख का कैंसर(Cervical Cancer)

इस स्थिति में महिला के कर्विक्स में असंख्य सेल्स पैदा होने लगते हैं जिस कारण महिला को दर्द और गर्भ धारण में परेशानी होती है।

3. Endometriosis

इस स्थिति में महिला के गर्भाशय के अंदर पनपने वाली रक्त नली उसके गर्भाशय के बाहर डेवलप होने लगती है।

4. Uterine Fibroids


यह कैंसर जैसे दिखते हैं पर होते नहीं। इसमें महिला के गर्भाशय में लच्छे/गाँठ जैसे पैदा हो जाते हैं जिनसे महिला को गर्भ धारण करने में दिक्कत आती है।

5. यूटेरस का न होना (hysterectomy)

कभी-कभी कुछ महिलाओं में जन्म से ही गर्भाशय नहीं होता या फिर किसी कारणवश निकलवाना पड़ता है जिससे गर्भ धारण करना नामुमकिन हो जाता है।

6. Retroverted uterus

इस स्थिति में महिला का यूटेरस जैसे स्थित होना चाहिए उतना नहीं होता और उसकी अवस्था बिगड़ जाती है। ऐसे में यूटेरस सामान्य जैसा नहीं होता और शरीर में उल्टा रहता है। इस स्थिति में महिला को यौन क्रिया में दर्द होता है और गर्भ धारण मुश्किल हो जाता है।

तो इन सभी बातों पर ध्यान दें और इनमें से कोई भी दिक्कत आपको हो रही है तो डॉक्टर से मिलें।

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