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गर्भावस्था में महिला गणेश चतुर्थी कैसे मनाएं? और इसका शिशु पर प्रभाव

गणेश चतुर्थी जिसे विनायक चतुर्थी बोलते हैं, भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की भक्ति में मनाया जाता है। भारत में अंग्रेज़ों के राज़ के कारण इस त्यौहार की अहमियत कम हो गई थी। परन्तु उनके देश छोड़ने के बाद इस त्यौहार की अहमियत बढ़ गई। गणेश जी शिव जी और पार्वती माँ के छोटे बेटे हैं। उन्हें गणपति के नाम से भी सम्भोधित किया जाता है। इसके साथ ही हम आपको बता दें की गणेश कला,कृति और ज्ञान के देवता माने जाते हैं।

गणेश चतुर्थी कब मनाया जाता है ?

गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 25 अगस्त को पड़ रही है। यह चतुर्थी साल भर की चतुर्थियों में सबसे अहम होती है।

गणेश चतुर्थी को क्या क्या किया जाता है?

इसी दिन भगवान गणेश की मूर्ति घर में स्थापित की जाती है। इसके बाद दस दिन तक घर में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। बताया गया है कि भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और संपन्नता आती है। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं, माना जाता है कि व्रत रखने से भगवान गणेश खुश होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

इस साल क्या ख़ास होगा गणेश चतुर्थी पर?

ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार गणेशोत्सव 10 दिन नहीं बल्कि 11 दिन चलेगा। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि इस बार दो दशमी तिथि पड़ रही हैं। इस बार 31 अगस्त और एक सितंबर दोनों ही दिन दशमी तिथि रहेगी।

गर्भवती महिलाओं गणेश चतुर्थी कैसे मना सकती हैं?

जिन महिलाओं को अभी अभी शिशु हुआ है या वे महिलायें जो शिशु प्राप्ति का इंतेज़ार कर रहीं हैं, वह बेशक त्यौहार मना सकती हैं। परन्तु उनको मंत्र नहीं पढ़ना चाहिए। 

महिलाएं गणेश जी की मूर्ति खरीद कर घर ला सकती हैं। इसके बाद वह पूजा वाले दिन उस पर स्वच्छ कपड़ा डाल सकती हैं, इसके साथ ही वे उसे आभूषणों से सजा सकती हैं। गणेश जी की मूर्ति पर फूलों की माला भी चढ़ाई जा सकती है। पूजा कमरे में रंगोली बनाई जा सकती है। इसके बीच में गणेश जी को बैठा सकती हैं। गणेश चतुर्थी पर भगवन को प्रसन करने के लिए महिलाएं मोदक नामक मीठी मिठाई बना सकती हैं। इसे चावल, गेहूँ के आटे, घिसे हुए नारियल और गुड़ तथा मेवे के मिश्रण से बनाया जाता है। मोदक के अलावा महिलाएं नमकीन भी बना सकती हैं। सुंदल नामक खाद्य पदार्थ चने की दाल से बनता है। कुछ महिलाएं खीर भी बनाती हैं। पूजा ख़ुद करने के बजाय अपने पति से या घर के अन्य किसी व्यक्ति से करवा लें। पूजा पश्चात् भोजन किया जा सकता है। ईश्वर की अर्चना करने से शिशु का जन्म आराम से बिना किसी गंभीरता के हो जायेगा।

आज कल पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए बाजार में मिट्टी, घास और अन्य पर्यावरण को सुरक्षित रखने वाले चीज़ों से बनी गणेश मूर्ति मिलने लगी हैं जिनको पानी में विसर्जित करने से पर्यावरण को हानि न पहुंचे।

गणेश चतुर्थी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हिंदू धर्म के मुताबिक इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसी के उपलक्ष्य में इस त्योहार को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पड़ता है। महाराष्ट्र और उसके आस-पास के क्षेत्रों में गणेश चतुर्थी के बाद 10 दिन तक गणेशोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु अपने घर में भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं और पूरे दस दिन गणेश भगवान की पूजा करते हैं। गणेशोत्सव के आखिरी दिन यानि अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति जी का विसर्जन किया जाता है।

गणेश भगवान से जुड़ी प्रसिद्ध कथायें:

भगवान गणेश के जन्म को लेकर कई तरह की पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक पौराणिक कथा के मुताबिक माता पार्वती ने खुद के शरीर को हल्दी का लेप लगाया गया था। जब उन्होंने अपना लेप हटाया तो उन टुकड़ों से उन्होंने एक मूर्ति बनाई। इसके बाद उन्होंने उसमें प्राण डाल दिए। इस तरह से भगवान गणेश का जन्म हुआ। इसके बाद वे भगवान शिव और माता पार्वती के बेटे कहलाए जाने लगे। इसके अलावा भी उनके जन्म को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं।

ध्यान देने योग्य बात: भगवान गणेश की पूजा करने के दौरान यह बात जरूर ध्यान रखें कि उन्हें तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है।

यदि आप गणेश जी की भक्त हैं तो इस पोस्ट को बेशक शेयर करें और आपको भगवान का आशीर्वाद मिलेगा।

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