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फ्लेम टेस्ट से जानिए यह बेबी वाइप्स आपके शिशु के लिए सुरक्षित है या नहीं


हर मॉं को अपने शिशु की सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। वह जब भी कुछ अपने शिशु के लिए खरीदती हैं तो उसका पहला ध्यान और मकसद यही रहता है कि वो चीज़ उसके शिशु के लिए सर्वश्रेष्ठ हो। फिर चाहे वह बेबी वाश हो या बेबी वाइप्स।

आपकी सबसे पहली प्राथमिकता यही रहेगी कि यह आपके शिशु के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हो। लेकिन क्या कभी आपने इन चीज़ों को खरीदते समय इसे बनाने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्रियों पर नज़र डाली है? जी हां...कभी-कभी आप बिना इसकी सामग्रियों की जॉंच किए इन चीज़ों को खरीद लेते हैं लेकिन वहीं कभी अाप इसकी जांच करेंगे तो आप हैरान भी रह सकते हैं। आपको शायद इस बात का अंदाज़ा भी ना हो कि इसमें कितने सारे हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है।

आपको बता दें कि आपके शिशु की त्वचा एक वयस्क की त्वचा के मुकाबले 80 गुणा नाज़ुक होती है और ऐसे हानिकारक केमिकल से उनकी त्वचा को गहरा नुकसान हो सकता है। इन हानिकारक रसायन के कारण शिशु की त्वचा पर एलर्जी, रैशेज़, स्किन इन्फेकक्शन जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

जानिए क्यों होता है वाइप्स में रसायन और हल्की क्वालिटी के फैब्रिक का इस्तेमाल

अधिकतर शिशु उत्पाद आपके शिशु की त्वचा की रक्षा करने का दावा करते हैं और किटाणु रहित के साथ-साथ इन्हें मनमोहक महक देने के लिए ऐसे हानिकारक रसायन का इस्तेमाल कर लेते हैं। यह रसायन आपके शिशु की त्वचा को नुकसान पहुंचाने लगते हैं।

इसके अलावा इन वाइप्स को बनाने के लिए इसके फैब्रिक में सबसे ज्यादा ‘पॉलिस्टर’ का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इसे बनाने में जितना ज्यादा पॉलिस्टर का इस्तेमाल किया जाएगा इन बेबी वाइप्स की कीमत उतनी ही कम होगी।

दरअसल, पॉलिस्टर वाइप्स ठीक प्रकार से सोख नहीं पाते क्योंकि यह नेचुरल फैब्रिक नहीं है और यह अलग-अलग केमिकल प्रक्रिया के ज़रिये प्लास्टिक वेस्ट से बनाया जाता है और हम इन केमिकल से बने फैब्रिक का लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं जो रैशेज़ और एलर्जी का कारण बनते हैं। चूंकि हम इसके नुकसान से रू-ब-रू नहीं थे और इसका अंदाज़ा भी नहीं था कि कैसे ये घटिया क्वालिटी के वाइप्स आपके शिशु की त्वचा को नुकसान पहुंचाता है। जब आप इसका इस्तेमाल अपने शिशु की नाज़ुक त्वचा पर करते हैं तो इससे आपके शिशु की त्वचा पर ख़राब प्रभाव पड़ सकता है और उन्हें रैशेज़, एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती है। 

आपको बताते चलें कि यही पॉलिस्टर प्लास्टिक, पाइप्स और तारों को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आप इसी बात से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि अगर इस पॉलिस्टर का इस्तेमाल बेबी वाइप्स को बनाने के लिए किया जाता है तो यह आपके शिशु की त्वचा पर कितना बुरा प्रभाव डालता है।

कैसे पता लगाएं कि इन वाइप्स में पॉलिस्टर मौजूद है या नहीं? 

यहॉं आपको कुछ आसान से तरीकों से रू-ब-रू कराएंगे जिनसे आप इसकी पहचान कर पाएंगे कि आप जिन वाइप्स का इस्तेमाल अपने शिशु के लिए कर रहे हैं वो उसके लिए सुरक्षित है या नहीं। यह तरीका है फ्लेम टेस्ट। इस टेस्ट की खास बात यह है कि आप इसे घर बैठे कर सकते हैं।

इसके लिए आपको चाहिए:

बेबी वाइप्स

मोमबत्ती

माचिस

फ्लेम टेस्ट करने का तरीका

सबसे पहले माचिस से मोमबत्ती जलाएं।

इसके बाद एक बेबी वाइप लें और उसे थोड़ा सा सूखने दें ताकि यह आसानी से जलाया जा सके।

फिर एक कोने से बेबी वाइप को पकडे़ें और मोमबत्ती के लौ के पास ले जाएं।

ऐसे जानिए परिणाम

जलते हुए वाइप की महक इसका परिणाम जानने के लिए बेहद ज़रूरी है। अगर आपको इसमें से जलते हुए प्लास्टिक की बहुत तेज़ महक आए तो समझ लीजिए कि इसमें काफी ज़्यादा मात्रा में पॉलिस्टर का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब हुआ कि यह वाइप्स आपके शिशु की त्वचा के लिए हानिकारक हैं।

दूसरी ओर, अगर इसे जलाने के बाद किसी तरह के प्लास्टिक के जलने की दुर्गंध ना आए और इसकी बजाए आपको जलते हुए कागज़ या जलते हुए कपड़े की महक आए तो इसका मतलब यह हुआ कि इस वाइप को बनाने के लिए नेचुरल फैब्रिक का इस्तेमाल किया गया है और इसमें हानिकारक पॉलिस्टर के तत्व मौजूद नहीं हैं।

अगर जलने के बाद ऐसा हो जाए फैब्रिक

वहीं इसके अलावा अगर इन वाइप्स को जलाने के बाद आप कड़े और काली गांठें नज़र आने लगें तो इसका मतलब है कि इसमें पॉलिस्टर का इस्तेमाल किया गया है। आप नीचे दी गई तस्वीर में इसे देख सकते हैं।

इसके अलावा अगर इन वाइप्स को जलाने के बाद सिर्फ राख बचती है तो समझ जाएं कि यह पूरी तरह से कॉटन और प्राकृतिक तरीके से बनाया गया है। ऐसे वाइप्स नेचुरल फैब्रिक से बनाए गए हैं जो आपके शिशु की त्वचा को बिल्कुल हानि नहीं पहुंचाएंगे।

आपको बता दें कि हमने यह फ्लेम टेस्ट काफ़ी सारे जाने-माने बेबी वाइप्स पर किया जिनमें 99 प्रतिशत वाइप्स सस्ते फैब्रिक से बनाए गए हैं और अधिकतर ब्रैंड में पॉलिस्टर का इस्तेमाल किया गया है और जब इन्हें जलाया गया तो इसमें से प्लास्टिक की दुर्गंध और काली गांठें सामने आईं।

लेकिन इसमें एक ही ब्रैंड ऐसा पाया गया जो इस फ्लेम टेस्ट को पास कर सका और वो ब्रैंड है ‘मदर स्पर्श’। यही एक ऐसा वाइप पाया गया जिसमें 98 प्रतिशत पानी का इस्तेमाल किया गया है। इसे जलाने पर यह पूरी तरह राख में बदल गया और इसमें ज़रा भी मात्रा में प्लास्टिक के तत्व नहीं पाए गए।

इसी के साथ इस ब्रैंड ने यह तक उल्लेख किया हुआ है कि इसमें इस्तेमाल किया गया फैब्रिक शत प्रतिशत प्राकृतिक है और यह आपके शिशु की त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। यही नहीं, यह वाटर वाइप्स पूरी तरह कॉटन और प्लांट फैब्रिक से बनाए गए हैं जो इसे पूरी तरह से आपकी शिशु की त्वचा के अनुकूल बनाते हैं।

चूंकि आपके शिशु की त्वचा और साफ-सफाई एक अहम चीज़ हैं इसलिए अपनी नन्हीं सी जान के लिए आप कुछ भी लें उसकी तरीके से जांच कर लेना बेहतर है। साफ-सफाई आपके शिशु के अच्छे स्वास्थ्य का अहम हिस्सा है इसलिए आप कॉटन वाटर का या मदर स्पर्श वाटर वाइप्स का इस्तेमाल करें जो पूरी तरह से प्राकृतिक है और शिशु की त्वचा के लिए अनुकूल है। 

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