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एक मां ने नहीं काटने दी अपने बच्चे की प्लेसेंटा,जानिए क्यों


जब बच्चा गर्भ में होता है तो उसे सारे पोषण गर्भनाल यानी अम्बलीकल कार्ड से मिलते है। नौ महीन तक बच्चा मां के गर्भाशय में मौजूद प्लेसेंटा के अंदर ही रहता है। जन्म के तुरंत बाद इस गर्भनाल को कुछ दूर से काटकर अलग कर दिया जाता है और जो बच्चे की नाभि के साथ छोटा सा हिस्सा रह जाता है, वह कुछ दिनों में अपने – आप सूखकर गिर जाता है। यह परंपरा या प्रक्रिया सदियों से चली आ रही है। लेकिन एक मां ने इस परंपरा को तोड़कर कर अपने बच्चे के गर्भनाल को अलग नहीं किया और यह बात चर्चा का विषय बन गया।

अमेरिका के टेक्सास में रहने वाली वेनेसा फिशर पेशे से फ्लाइट अटेंडेंट हैं और दो बच्चों की मां है। वेनेसा का बड़ा बेटा 11 साल का है और छोटे बेटे का जन्म इस साल जनवरी में हुआ। उसका नाम एश्टन रखा। यह खबर भी छोटे बेटे एश्टन से जुड़ी हुई है।

दरअसल जब वेनेसा गर्भवती थी तो उन्होंने इंटरनेट पर गर्भावस्था और बच्चे के जन्म को लेकर खूब सारी जानकारी जुटाई। इंटरनेट से ही उन्हें लोट्स बर्थ के बारे में पता चला और उन्होंने फैसला लिया कि वह अपने बच्चे का जन्म लोट्स बर्थ प्रक्रिया से ही करेंगी।

क्या है लोट्स बर्थ

लोट्स बर्थ की प्रक्रिया में बच्चे के जन्म के बाद उसकी गर्भनाल यानी अम्बलीकल कार्ड नहीं काटी जाती है। इस नाल को बच्चे से जोड़े हुए ही रखते है। बाद में यह सूखकर खुद ही अलग हो जाती है। इससे गर्भनाल में मौजूद खून और सभी पोषण बच्चे में ट्रांसफर हो जाते हैं।

बता दें कि वेनेसा ने इसकी जानकारी खुद अपने फेसबुक पर अपने बच्चे की तस्वीर पोस्ट करके दी है। वेनेसा को जब लोट्स बर्थ के बारे में पता चला तो उन्हें यह बहुत इमोशनल कर देने वाला लगा। वेनेसा को लगा कि जिस गर्भनाल से बच्चा नौ महिने तक जुड़ा रहता है, उसे अचानक से यूं अलग कर देना बच्चे के लिए दर्दनाक अनुभव होता होगा। उन्हें लगा क्यों ना बच्चे को गर्भनाल को तब तक बच्चे से जुड़ा रहने दिया जाए, जब तक वह खुद प्राकृतिक तरीके से अलग ना हो।

वेनेसा की कजिन ने एश्टन को खूबसूरत सा प्लेंसेटा बैग गिफ्ट किया है। इंफेक्शन से बचने के लिए वेनेसा ने गर्भनाल और प्लेंसेंटा में एस्ट्रिजेंट युक्त खुशबूदार हर्ब्स से कवर करके रखा है। वेनेसा ने अनुभव किया कि प्लेंसेंटा से जुड़े बच्चे ज्यादा शांत होते हैं क्योंकि उन्हें जन्म के बाद भी गर्भनाल से जुड़ा हुआ महसूस करते हैँ।

विश्व स्वास्थय संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार गर्भावस्था के दौरान प्लेंसेंटा में खूब सारा आयरन और पोषक तत्व जमा होते हैं और जन्म के बाद गर्भनाल को बच्चे से ज्यादा देर तक जुड़े रहने पर यह पोषक तत्व बच्चे में ट्रॉसफर हो जाते हैं और बच्चे को आयरन की कमी भी नहीं होती है।

लोट्स बर्थ पर डॉक्टरों की राय

लोट्स बर्थ पर अलग – अलग डॉक्टरों के अलग – अलग मत हैं। कुछ डॉक्टर्स का मानना है कि लोट्स बर्थ बच्चे के लिए अच्छा होता है बशर्ते देखभाल बहुत सावधानी से की जाए। वहीं कुछ डॉक्टर्स प्लेसेंटा को डेड टिशू मानते हैं। जिसका बच्चे से जोड़े रखने का कोई औचित्य नहीं है।

अमेरिका के एक कॉलेज के अध्यनन में पाया गया है कि बच्चे की गर्भनाल को अलग करने में अगर 30 से 60 संकेड़ तक की देरी की जाए तो बच्चे को प्लेसेंटा में मौजूद रक्त, पोषक तत्व और आयरन प्राप्त हो जाते हैं लेकिन लंबे समय तक गर्भनाल को बच्चे से जोड़े रखने से होने वाले लाभों को लेकर अभी संदेह है।

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