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एक अनोखी प्रेम कथा: प्यार को जब होना होता है वो हो ही जाता है


प्यार करना और बदले में प्यार पाना हर मनुष्य की चाहत होती है और इस बात में कोई दूसरी राये नहीं है क्योंकि इस दुनिया में सभी को प्यार चाहिए, प्यार के बिना कोई नहीं रह सकता| यहाँ तक की वो लोग जिन्हें अपना जीवन अकेले बिताने में दिलचस्पी होती है उनके जीवन में भी एक ऐसा मोड़ आता है जब उन्हें एक साथी की ज़रूरत पड़ती है(और कई लोग तो पचताते हैं की उनके जीवन में कोई प्यार करने वाला नहीं है)|

लेकिन फिर भी इसमें कुछ करना हमारे बस का नहीं होता, क्योंकि प्यार को जब होना होगा तभी होगा| कई बार प्यार को अधिक तलाश करना हमें खुदसे ही दूर करदेता है|

 

इसलिए हमारा कहना है की आपके कर्रिएर और प्रोफ़ेशन की तरह, प्यार एक ऐसी चीज़ है जिसे प्लैन नहीं किया जा सकता| आपको ये पता ही नहीं चलेगा की प्यार कब और कहाँ हो जाए|

जिन लोगों को लगता है की उन्हें कभी उनका प्यार मिल ही नहीं सकता, लेकिन वक़्त कब क्या मोड़ ले ले किसी को नहीं पता| और ठीक ऐसी ही चीज़ नोर्मन और वैष्णवी के साथ हुई| ये दोनों भी इस चीज़ के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन उनके साथ जो भी हुआ वो इतना अचानक और जल्दी था की उन्हें खुद समझ नहीं आया| आगे जान्ने के लिए पढ़ें:

अच्छे घराने की लड़की

वैष्णवी, उत्तराखंड के एक अच्छे परिवार से सम्बंध रखती थीं| अपने ग्रेजुएशन के बाद वो दिल्ली के एक अच्छे कॉलेज से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स कर रही थीं| मास्टर्स करते समय उन्हें अपने लिए वक़्त मिलगया और उसी समय उन्होनें अपनी डिबेटिंग स्कील और बेहतर करने की ठानी|

ट्रेनर

नोर्मन का जन्म गोवा में रहने वाले एक क्रिस्चन परिवार में हुआ| एक खुशहाल परिवार में पैदा होने के कारण, नोर्मन को अपने मन के लायक पढ़ाई करने का अवसर मिला| उसी समय नोर्मन ने बीट-बॉक्सिंग करने के बारे में सोचा और दिल्ली आकर अपनी किस्मत आज़मानी चाही|

लेकिन किस्मत के आगे कौन झुक सकता है, उनका साथ आना एक आसान काम नहीं था| बात को और बिगाड़ने के लिए, दिल्ली जैसे शहर में रहने के लिए काफ़ी कैश की आवश्यकता पड़ती है और अपना घर चलाने के लिए नोर्मन को एक डिबेट ट्रेनर की जॉब करनी पड़ी|

नोर्मन की मातृ भाषा इंग्लिश होने के कारण उन्हें इस भाषा की अच्छी पकड़ थी और इसी कारण उन्हें ये जॉब मिल गयी(आखिर एक 12 क्लास के पास हुए लड़के को दिल्ली में कोनसी जॉब मिलेगी)

घृणा

एक नए महीने के शुरुवात के साथ, डिबेटर का फ्रेश बैच नोर्मन के पास क्लासेस के लिए आना शुरू होगया| उस बैच में एक अनोखी लड़की थी, वो अनोखी इसलिए नहीं थी क्योंकि वो बहुत ब्रिलियंट या खूबसूरत थी बल्कि उसका ग्रैमर अच्छा ना होते हुए भी वो कॉंफिडेंट के साथ इंग्लिश बोलै करती थी| नोर्मन के हिसाब से उसमें डिबेटर बनने का कोई गुण नहीं था|

नापसंद

दूसरी तरफ़ वैष्णवी को इस बात से दिक्कत थी की उसका गुरु उससे कम पढ़ा लिखा है यहाँ तक की उसने ग्रेजुएशन भी नहीं किया है| अब वैष्णवी जैसी लड़की को ये बात बिलकुल सही नहीं लगी की वो एक ऐसी इंसान से पढ़ने वाली है जो गुरु कहलाने के लायक भी नहीं है|

जैसे-जैसे क्लास आगे बढ़ते गए

जो रिश्ता नफ़रत से शुरू हुआ उसने आहिस्ते-आहिस्ते दोस्ती का रूप ले लिया| वैषणवी का ज्ञान बढ़ता गया और उसे एहसास हुआ की नोर्मन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है और उसनें सीखने का कोई भी मौका अपने हाथ से जाने नहीं दिया|

वैष्णवी की ये बात नोर्मन को बेहद्द पसंद आयी, उसकी मेहनत और कठोर परिश्रम ने नोर्मन का दिल जीत लिया| उसके बाद ही वो दोनों डिबेट क्लास से पहले और उसके नाद मिलने लगे|

इस समय दोनों ने अपने दिल की सारी बातें एक दूसरे से बांटना शुरू करदिया| उनके बीच इतनी नज़दीकियां आगयीं की एक दूसरे से मिलने के लिए दोनों क्लास होने का बहाना ढूंढने लगे|

वो बड़ा कदम

उनकी बात चीत के बीच नोर्मन को पता चला की वैष्णवी का परिवार पुराने ख़यालात का है जिन्हें ये बात बिलकुल अच्छी नहीं लगेगी की वैष्णवी किसी लड़के को डेट करे(इस बात को तो छोड़ ही दें की लड़का दूसरे धरम का था!)

वैष्णवी को लेकर नोर्मन को अपनी भावनाओं के बारे में पता था| तो सबसे अच्छा जो नोर्मन सोच सकता था वो था ये...

रविवार की सुबह, नोर्मन ने दिल्ली से रुद्रपुर की बस ली और पहुँच गया वो वैष्णवी के घर! हिम्मत वाला और कॉंफिडेंट नोर्मन ने वैषणवी से शादी के लिए उसका हाथ माँगा|

 

अचानक आने वाला ट्विस्ट

नोर्मन ने वैष्णवी से उसके परिवार के बारे में जितना सुना था उसके बाद वो मानसिक रूप से डांट सुनने और पीटने के लिए तैयार था आखिर ये सारी बेइज़्ज़ती उसे वैष्णवी के ख़ातिर स्वीकार थी|

नोर्मन की बातें सुनकर वैष्णवी के पिता ने उसे गले लगा लिया और ऐसे व्यवहार के लिए नोर्मन तैयार नहीं था| वैष्णवी के पिता नोर्मन के जज़्बे से काफ़ी प्रभावित थे और इसे कारण उन्होनें उसे अपने पुरे दिलसे स्वीकार करलिया|

शादी

वैष्णवी और नोर्मन की शादी आने वाली पीढ़ी तक नहीं भूलेगी| सुबह के समय नोर्मन के फैमिली चर्च, गोवा में वैष्णवी ने दुल्हन के रूप में अपना क़दम रखा फिर रुद्रपुर में हिंदू प्रथा के अनुसार दोनों की धूम धाम से शादी हुई|

ये सफ़र चलता जाएगा..

शादी के 3 साल बाद, इस जोड़े की एक प्यारी सी बेटी है| ये दिल्ली के गोल्फ लिंक एरिया में रहते हैं, नोर्मन ने अपना खुदका कॉर्पोरेट ट्रेनिंग आर्गेनाइजेशन शुरू किया है और वैष्णवी अब एक मल्टीनेशनल कंपनी के लिए काम करती है|

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