Link copied!
Sign in / Sign up
255
Shares

एक ऐसा मंदिर जहां देवी को होते हैं मासिक धर्म (पीरियड्स) - होती है इसकी पूजा


  भारत बहुत से रीतिरिवाज़ों और संस्कारों का देश है, यहां के पर्व-त्यौहार और संस्कृति किसी को भी अपनी ओर आसानी से खींच लेते हैं । यहां के मंदिर-मस्जिद और उनसे जुड़ी रोचक कहानियां हर किसी को हैरान कर देती है और इन्हीं में से एक है भारत का कामाख्या मंदिर।

असम की राजधानी दिसपुर से 7 किलोमीटर दूर कामाख्या मंदिर शक्ति की देवी माता सती का मंदिर है। यह माता के सभी शक्तिपीठों में से एक है । लोगों का मानना है की माता सती के प्रति भगवान शिव का मोह भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के मृत शरीर के 51 भाग किए थे और जिस-जिस जगह पर माता सती के शरीर के अंग गिरे उन्हें शक्तिपीठ कहा गया।

जानिये कामाख्या मंदिर की कुछ रोचक बातें -

 

 कामख्या देवी मंदिर की कहानी काफ़ी रोचक है कहा जाता है कि अपने पिता के खिलाफ जाकर देवी सती ने भगवान शिव से शादी की थी और इस कारण देवी सती के पिता दक्ष उनसे नाराज थे, फिर एक बार राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन करवाया परन्तु उन्होंने अपनी बेटी देवी सती और दामाद को नहीं बुलाया। इस बात से नाराज़ देवी सती बिना बुलाए ही अपने पिता के घर पहुँच गई जहां उनके पिता ने सती और उनके पति शिव का अपमान किया और इससे नाराज़ होकर वो हवन कुंड में कूदकर आत्महत्या कर ली और जब इस बात का पता भगवन शिव को चला तो वो देवी सती के जले शरीर को अपने हाथों में लेकर तांडव करने लगे । इस बात को देखकर भगवान् विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के जले शरीर को काट कर शिव से अलग कर दिया क्यूंकि उन्हें पता था कि इससे ब्रह्मांड का विनाश होना तय है। और जहां-जहां देवी सती के कटे शरीर के हिस्से गिरे वो आज शक्ति पीठ के रूप में जाने जाते हैं।

-  इस मंदिर से जुड़ी एक और कहानी है। ऐसा कहा जाता है कि नराका नाम के एक दानव को कामाख्या देवी से प्यार हो गया था। नराका दानव ने कामाख्या देवी के सामने शादी का प्रस्ताव रखा लेकिन वो उससे शादी नहीं करना चाहती थीं। इसके लिए कामख्या देवी ने नराका के सामने शर्त रखी कि अगर वो पर्वत पर एक रात में सीढ़ियां बना देगा तो वो उससे शादी कर लेंगी। फिर दानव ने देवी की शर्त मान ली और एक रात में काम करने की ठान ली। जैसे ही उसका काम पूरा होने वाला था इतने में देवी ने एक चाल चली और सुबह होने से पहले ही मुर्गे से बांग दिला दी। ऐसे में नराका का काम अधूरा रह गया।

-  इस जगह पर देवी सती की योनि गिरी थी जिसकी यहां पूजा होती है।

-  इसके अलावा जो सबसे ज़्यादा चौंकाता है वो यह की मंदिर में निवास करने वाली देवी को मासिक धर्म भी होता है जो की तीन दिन तक रहता है इस दौरान देवी का पट आम भक्तों के लिए बंद कर दिया जाता है और इन तीन दिनों के लिए मंदिर के अंदर सफ़ेद रंग का कपड़ा बिछा दिया जाता है। इसको अम्बुवाची पर्व कहते हैं और इस दौरान मेला लगता है और इन तीन दिनों के दौरान मां के रजस्‍वला होने का पर्व मनाया जाता है और कहा जाता है कि इस समय ब्रह्मपुत्र नदी का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है।

-  मंदिर में एक नया साफ-स्वच्छ कपड़ा रखते हैं और ऐसा कहा जाता है की मासिक धर्म के दौरान यह कपड़ा ‘खून’ से भीग जाता है। फिर तीन दिन बाद जब चौथे दिन मंदिर खुलता है तो भक्तों की भीड़ लग जाती है और यहां प्रसाद के रूप में भक्तों को एक गीला कपड़ा दिया जाता है और यह माना जाता है की यह कपड़ा देवी कामाख्या के रज (मेंसट्रूएल फ्लियूड) से भीगा होता है और इस कपड़े को अम्बुवाची वस्त्र कहते हैं।

तो ये थी कामख्या देवी मंदिर की कुछ रोचक बातें। हमें उम्मीद है कि आपको इस मंदिर से जुड़ी ये बातें जानकर काफी कुछ नया पता चला होगा। तो ना सिर्फ इस जानकारी को अपने साथ रखें बल्कि इसे शेयर करके ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे अवगत कराएं। 

जय माता की!

Tinystep Baby-Safe Natural Toxin-Free Floor Cleaner

Dear Mommy,

We hope you enjoyed reading our article. Thank you for your continued love, support and trust in Tinystep. If you are new here, welcome to Tinystep!

We have a great opportunity for you. You can EARN up to Rs 10,000/- every month right in the comfort of your own HOME. Sounds interesting? Fill in this form and we will call you.

Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon