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दुनिया की 6 प्रोत्साहित करने वाली माँओ की कहानियाँ।

माताओं को शायद सबसे कम आंके जाने वाली, बिना कोई वेतन लिये सबसे अधिक काम करने वाली इंसान हैं। दुनिया की लगभग सभी माताएँ, अपने ही तरीके से, अपने नन्हें बच्चों के लिए कुछ करने को अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर सर्वोत्तम माँ के किरदार अदा करती है।  कई प्रोत्साहन देने वाली कहानियाँ, जो आपका दिल छू जाएँगी, यहाँ दी गई है।

1) चमत्कारी बच्चा।

केट औग शुरुआत से ही जटिल गर्भावस्था में थी। वह जुड़वा बच्चो को जन्म देने वाली थी और बच्चो के जन्म से पहले वह मात्र 27 हफ्तों के लिए ही गर्भावस्था में थी। मगर हादसा तब हुआ जब दोनों बच्चो में से एक बच्चे- जैमी औग की जन्म से पहले ही मृत्यु हो गई। डॉक्टरों ने जैमी को बचाने की बहुत कोशिश की मगर सब नाकाम। डॉक्टरों के द्वारा मृतक घोषित होने के बाद जैमी को आखिरी अलविदा कहने के लिए उसके परिवार को सौंपा गया। केट ने कसकर अपने शिशु को अपने शरीर से लगाये रख़ा और दो घंटे बाद उन्हें महसूस हुआ कि शिशु ने साँस ली। डाॅक्टरों ने इस बात को नकारते हुए कहा कि यह महज एक सहज क्रिया है।  केट संतुष्ट नहीं हुई,और उन्होंनें नन्हे जैमी को स्तनपान करवाने का ठान ली और अपनी ऊँगली से नन्हें जैमी को दूध पिलाने लगी कि जैमी ने अपनी माँ की उंगली थाम ली। केट ने डेली मेल को इंटरव्यू देते हुए कहा कि डाॅक्टरों को विश्वास नहीं हो रहा था ।उन्होनें सर झुकाते हुए कहा कि " वे विश्वास ही नहीं कर सकते"। माँ सबकुछ जानती है। अगर यह केट का मातृत्व इतना मज़बूत ना होता तो हो सकता था कि नन्हा जैमी आज ये दुनिया देखने के लिए जिंदा ना होता।

2) बारबरा ग्यूऐरा - वो माँ जिसके हाथ नहीं थे।

बारबरा ने अपने दोनों हाथ 2 वर्ष की आयु में खो दिए जब उन्हें बिजली की मार सहनी पड़ी और उसे दोनों बाहें कटवानी पड़ी। कुछ साल पहले इनकी कहानी डिसकवरी हेल्थ पर दिखाई गई। इनकी सबसे उत्तम बात यह है कि ये एक ननहे बच्चे की माँ है और उसके लिए वो सब करती हैं जो एक बिल्कुल स्वस्थ माँ करती हैं। वह अपने बच्चे का बदलाव करती हैं, उसे तैयार करतीं है, उसे खिलाती है और ड्राइविंग भी करतीं हैं। बारबरा ने अत्यंत निपुणता अपने पैरों में हासिल कर ली है और वह यह सभी कार्य अपने पाँव से करती हैं। यह माँ हम सब की तारीफ के काबिल है और यह सबके लिए प्रेरणा स्त्रोत है।

3) लौऊ ज़िआउयिंग।

लौऊ ज़िआउयिंग 88 वर्षीय महिला है ज़िन्हे कचरे में त्याग दिया गया था। लौऊ चीन के किसी गरीबी रहित भाग में कचरे की पुनरावृत्ति करती थीं। खुद की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण इन बच्चो की ज़िम्मेंदारी लेना आसान कार्य नहीं था। वो यह समझतीं थी कि अगर उनमें कचरा उठाकर उसकी पुनरावृत्ति करने की हिम्मत और साहस हैं तो फिर इंसान की जिंदगी जैसी कीमती चीज़ की पुनरावृत्ति क्यों नहीं कर सकतीं? उसने 4 त्यागे हुए बच्चो की खुद अपने बच्चों की तरह की परवरिश की और बाकियों को अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को सौंप दिया। जब वे 82 वर्ष की थी तब उन्होंने अपने सबसे छोटे पुत्र ज़ैग किलांग को कूड़ेदान से निकाला। उन्होंने उसकी स्वस्थ होने तक देखभाल की, और अब वह खुश हैं और सबसे महत्वपूर्ण है कि वह एक तंदरुस्त छोटा बच्चा है।

4) ली ऐन ऐलीसन।

ली ऐन ऐलीसन लाॅस एंजिल्स की फिटनेस उत्साही है। उन्होंने विवाद खड़ा कर दिया जब उन्होंने 8 महीने गर्भवती होने के बावजूद वज़न उठाकर अपनी तस्वीर पोस्ट की, परंतु उन्होंने यह भी समझाया कि जब वह गर्भवती हुई थी तब उनके चिकित्सक ने उन्हें कसरत करने की अनुमति दी थीं। वह महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान और पश्चात फिट रहने के लिए प्रेरित करती हैं। वह एक नन्हें बेटे की गर्वपूर्ण माँ है। वह किसी भी बुरा बोलने वाले के गर्व से सामना करती है। ये जरूर प्रेरित करने वाली और प्रबल माँ है।

5) मौनीक ज़िमरमन - स्टीन।

मौनीक एक असामान्य आनुवंशिक विकार के साथ जन्मी थीं जिससे अंधापन होता है, और दुर्भाग्यवश यह विकार उनकें बच्चो को भी प्राप्त हुआ। स्वास्थ्य बीमा होने के बावजूद परिवार को मैडीकल बिल की वजह से भारी कर्जा उठाना पड़ा क्योंकि वह पूरे परिवार के मैडीकल बिल का खर्चा नहीं बर्दाश्त कर सकते थे इसलिए मौनीक ने अपनी बेटी की आँखों के लिए खुद के टीकाकरण का त्याग कर दिया। इस कुर्बानी की वजह से मौनीक आज बिल्कुल अंधी हो चूकी है।
यह दिल पिघला देने वाली सच्ची कहानी हैं।

6) चैल्सी कैंप।

चैल्सी एक हिम्मती माँ है जिन्हें दुर्भाग्यवश अपनी दोस्त के कुत्ते के साथ एक भयानक घटना का सामना करना पड़ा जब वह उस कुत्ते का ध्यान रख रहीं थीं। कैंप कुत्ते को मैत्रीपूर्ण समझकर अपनी बच्ची को भी साथ ले गई। मगर कुत्ता उग्र होने लगा और उसने चैल्सी की बेटी पर हमला कर दिया। सामान्य मातृ वृत्ति से, चैल्सी अपनी बेटी का बचाव करने लगी और सीधा कुत्ते के मुँह पर मुक्का मारा तथा कान काट निकाला। उन्होंने फिर 911 पर फोन लगाया और अपनी बेटी को उल्टा लेकर खून की घुटन से बचाया। दोनों माँ बेटी चोटिल हुई मगर दोनों ही स्वस्थ हो गई। हमारी मातायें दृढ़ मातृत्व से भरी हैं और हम अपने बच्चों की हिफाज़त के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। यह एक भयंकर मगर प्रेरित करने वाली कहानी है।

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