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दिन ढलते ही शिशु क्यों होते हैं बेचैन - जानें कारण और करें इसका इलाज


  नवजात शिशु को समझना बहुत ही मुश्किल कार्य होता है क्यूंकि वो अपनी समस्याएं बड़ों की तरह बोलकर शेयर नहीं कर पाते हैं। नवजात हर रोज़ नए-नए अनुभव करते हैं जिनमें से कुछ अच्छे होते हैं कुछ बुरे, उनकी बहुत सी आदतें माता-पिता को चिंता में डाल देती हैं। कुछ कारणों में से एक है शिशु का शाम के वक़्त रोना, अक्सर देखा गया है की शिशु शाम के वक़्त कुछ ज़्यादा ही बेचैन हो जाते हैं और रोना शुरू कर देते हैं और माता-पिता के लिए यह समझ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है की आखिर उनके दिल का टुकड़ा इतना बेचैन क्यों है। हर दिन का एक ऐसा वक़्त होता है जब शिशु बहुत ज़्यादा बेचैन हो जाते हैं और रोने लगते हैं, अगर देखा जाए तो यह वक़्त होता है शाम से रात के बीच का जब शिशु सबसे ज़्यादा शोरगुल करते हैं। आईये जानते हैं क्या है इसके कारण, क्यों रोते हैं बच्चे इस वक़्त...

 

1. घूमने का होता है मन 

जैसे की हम बड़े पुरे दिन एक जगह पर नहीं रह सकते और हमें भी बदलाव और खुली हवा की ज़रूरत होती है वैसे ही शिशु के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। आप खुद सोचिये एक बच्चा पुरे दिन घर पर रहता है, उसको भी खुली हवा की ज़रूरत होती है और यही कारण है की वो पुरे दिन घर पर रहकर बेचैन हो जाते हैं और रोना शुरू कर देते हैं। इसलिए यह ज़रूरी है की आप अपने शिशु को हर रोज़ थोड़ा बाहर की खुली हवा में घुमाएं इससे शिशु को अच्छा लगेगा।

 

2. जब होती है रूटीन में बदलाव 

जैसा की हमने ऊपर लिखा है की शाम को थोड़े देर अपने शिशु को बाहर घुमाने का एक रूटीन बना लें, इसलिए अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो आप इस चीज़ को कंटिन्यू रखें क्यूंकि जब आप शिशु को बाहर नहीं ले जाएंगे तो उनको यह महसूस होगा और वो ठीक शाम के उसी वक़्त रोयेंगे जब उन्हें बाहर निकलना होगा। इसलिए अगर कभी बारिश या मौसम खराब हो या कभी किसी कारण से आप बाहर ना जा सके तो ध्यान रहे की आप अपने शिशु के साथ थोड़े देर खेल लें या उसे घर पर ही घुमा दें जिससे उसका मन बहल जाए।

 

3. अगर लगी हो भूख 

जैसे शाम के वक़्त बड़ों को कुछ हल्का खाने का मन होता है वैसे ही हो सकता है आपके शिशु को भी शाम के वक़्त भूख लग जाती है और इसलिए वो रोते हैं। इसलिए आप अपने शिशु को थोड़े-थोड़े अंतराल पर स्तनपान ज़रूर कराएं।

4. अगर हो कोई शारीरिक परेशानी 

कभी-कभी ऐसा होता है की शिशु स्तनपान करने के बाद या बाहर घूमने के बाद भी बहुत रोते हैं, अगर आपका शिशु भी ऐसा कुछ कर रहा है तो हो सकता है की उसे कोई शारीरिक तकलीफ जैसे पेट में दर्द, बुखार या कोई अन्य परेशानी हो इसलिए आप इस बारे में ज़रूर पता करें और अगर ज़्यादा हो तो शिशु को डॉक्टर के पास ले जाएँ।

5. मौसम भी है एक कारण 

कभी-कभी शिशु को ज़्यादा ठंडी या गर्मी लगने से भी शिशु शाम के वक़्त रोने लगते हैं क्यूंकि शाम से रात के बीच में मौसम में कभी-कभी कई बदलाव आते हैं । तो हो सकता है आपका शिशु उन बदलावों को सहन नहीं कर पा रहे होते हैं तो इसलिए भी वो रोने लगते हैं।

 

क्या करें उपाय -

आप अपने शिशु को शाम को घुमाने ले जाएँ और उन्हें खुली हवा महसूस कराएं।

अगर आप किसी कारण से हर रोज़ शिशु को बाहर नहीं ले जा पा रहे हैं तो शाम को उसके साथ खेलें और उनका मन बहलायें।

उनका डायपर चेक करते रहें क्यूंकि शिशु का डायपर गीला हो जाने पर या रैशेज़ हो जाने से भी उसे असहजता होती है और वो रोने लगता है।

शाम के वक़्त स्तनपान ज़रूर कराएं क्यूंकि कभी-कभी भूख लगने से भी शिशु रोता है।

शिशु पर ध्यान रखें और उसे हर कुछ-कुछ देर पर छूकर ज़रूर देखें क्यूंकि कभी-कभी शिशु को बुखार होता है, या ज़्यादा ठंडा या गर्मी लगने से शिशु बेचैन हो जाता है और रोने लगता है।

अगर आप इन सब बातों का ध्यान रखेंगी तो आप अपने शिशु के शाम के वक़्त रोने के कारण को कुछ हद तक समझ सकेंगी और उसका उपाय कर सकेंगी। इसके अलावा शान्ति से काम लें और चिंता ना करें क्यूंकि हर शिशु का अपना एक अलग अंदाज़ होता है। हो सकता है आपका शिशु दूसरों के शिशुओं की तरह शाम को ना रोता हो बल्कि दिन या रात को रोता हो इसलिए इसमें घबराने की बात नहीं है ज़रूरत है तो थोड़ी ज़्यादा ध्यान देने की। 

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