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दूध पीना प्रेग्नेंसी में क्यों जरूरी है—जानें दूध के प्रकार और फायदों के बारे में(Drinking Milk During Pregnancy: What You Need To Know In Hindi)

गर्भावस्था सभी महिलाओं की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण दौर होता है। किसी भी भोजन को आहार में शामिल करने या हटाने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि यह प्रमाणित है कि दूध विटामिन और कैल्शियम से भरपूर होता है लेकिन क्या गर्भावस्था के दौरान दूध पीना सुरक्षित है?

डॉक्टर के अनुसार गर्भावस्था के दौरान दूध पीना बहुत जरुरी है। यह न सिर्फ मां को स्वस्थ रखता है बल्कि गर्भ में बढ़ते शिशु को भी पोषण प्रदान करता है। लेकिन अन्य सभी खाद्य पदार्थों की तरह दूध और दुग्ध उत्पादों का सेवन करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। साथ ही आप अधिक मात्रा में दूध नहीं पी सकती हैं क्योंकि इससे आपके शिशु को नुक़सान हो सकता है। तो यह आजकल गर्भवती महिलाओं के बीच एक ज्वलंत मुद्दा है कि गर्भावस्था में दूध पीना सुरक्षित है या नहीं।

लेख की विषय सूची

गर्भावस्था के दौरान दूध पीना क्यों आवश्यक है? (Why Is It Essential To Drink Milk During Pregnancy in Hindi?)

गर्भावस्था के दौरान दूध पीने के क्या फायदे हैं? (What Are The Benefits Of Milk During Pregnancy in Hindi?)

गर्भावस्था के दौरान किस प्रकार का दूध पीना चाहिए? (What Kind Of Milk Should Be Drunk in Hindi?)

गर्भावस्था के दौरान किस प्रकार के दूध के सेवन से बचना चाहिए? (What Kind Of Milk Should Be Avoided in Hindi?)

गर्भावस्था के दौरान दुग्ध उत्पाद आवश्यक है (Milk Products Essential For Pregnancy in Hindi)

निष्कर्ष (Conclusion)

गर्भावस्था के दौरान दूध पीना क्यों आवश्यक है? (Why Is It Essential To Drink Milk During Pregnancy in Hindi?)

दूध पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है और यह सदियों से वृद्धि व हड्डियों को मज़बूती प्रदान करने के लिए जाना जाता है। गर्भावस्था के दौरान यह मां की ज़िम्मेदारी होती है कि वह शिशु को पौष्टिक आहार प्रदान करे क्योंकि यह समय शिशु के लिए बहुत आवश्यक होता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान पाश्चुराइज दूध को आहार में शामिल करना बहुत आवश्यक हो जाता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर की मुद्रा बेहतर होती है, हड्डियाँ मजबूत होती हैं और कुशाग्र बुद्धि होती है।

कुछ शोधों में पाया गया है कि जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान दूध नहीं पीती है, वह सामान्य से छोटे और कम वज़न वाले शिशु को जन्म देती है। साथ ही जिन महिलाओं में कैल्शियम की कमी होती है, गर्भावस्था के दौरान उनका बोन मास कम हो जाता है क्योंकि भ्रूण अपनी कैल्शियम की आवश्यकता मां से पूरी करता है। गर्भावस्था के दौरान दूध पीने के कई फायदे हैं और इसलिए इसका सेवन करने का सुझाव दिया जाता है क्योंकि यह मां और शिशु के स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद साबित होता है।

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गर्भावस्था के दौरान दूध पीने के क्या फायदे हैं? (What Are The Benefits Of Milk During Pregnancy in Hindi?)

वैज्ञानिक गर्भावस्था के दौरान दूध पीने के फ़ायदों पर शोध कर रहे हैं और कई अध्ययनों में दूध पीने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

– दूध कैल्शियम से भरपूर होता है, जो कि हड्डियों की वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है।

– दूध एमिनो एसिड और प्रोटीन से भरपूर होता है, यह सैल डिविज़न, सामान्य वृद्धि और मांसपेशियों, दांतों और मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक होता है।

– दूध में फौलिक एसिड होता है, जिससे गर्भपात और भ्रूण को न्यूरल टयूब डिस्ओडर से बचाव मिलता है।

– दूध में विटामिन ए, विटामिन डी, और विटामिन ई उच्च मात्रा में मौजूद होते हैं। विटामिन ए नाइट ब्लाइंडनेस से बचाव करने और आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए आवश्यक है। विटामिन डी से कैल्शियम का अवशोषण होता है और नवजात शिशु को गैस्टेशनल डायबिटीज़ से संरक्षण प्रदान होता है।

– कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान गैस्ट्रिक समस्याओं जैसे हार्ट बर्न से प्रभावित होती है। दूध पीना गर्भवती महिला के लिए बहुत आवश्यक है क्योंकि इसमें हार्टबर्न और एसिडिटी से राहत पहुंचाने की क्षमता होती है।

– दूध में मौजूद पौष्टिक तत्व नीओनेटल रिकेट्स से बचाव करते है और जन्म के समय शिशु के कम वज़न की समस्या को दूर करते हैं।

– कुछ परीक्षण में पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान दूध का सेवन करने से बच्चा लम्बा, स्वस्थ और बुद्धिमान होता है।

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गर्भावस्था के दौरान किस प्रकार का दूध पीना चाहिए? (What Kind Of Milk Should Be Drunk in Hindi?)

यह सवाल अधिकतर माएं पूछती है कि किस प्रकार का दूध पीना चाहिए। सभी प्रकार के दूध पीना सुरक्षित नहीं है और इसलिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि जो दूध आप पीएं वह पौष्टिक हो और उससे सभी पौष्टिक आवश्यकताएं पूरी हो जिससे मां और शिशु दोनों की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।

यह है दूध के कुछ प्रकार जो गर्भवती महिलाओं के लिए फ़ायदेमंद है।

गाय का दूध - इस प्रकार का दूध दुग्ध दायिनी गाय से प्राप्त होता है और यह कैल्शियम और विटामिन ए, डी, ई तत्वों से युक्त होता है। यह सबसे प्रचुर और आसानी से उपलब्ध होने वाले पशु का दूध है। भ्रूण के शरीर में कैल्शियम के अवशोषण के लिए विटामिन-डी आवश्यक होता है। दूध से बने दुग्ध उत्पादों में भी यही पौष्टिक गुण होते हैं।

बकरी का दूध - यह बहुत ही पौष्टिक होता है और इसमें गाय के दूध की अपेक्षा अधिक वसा होती है। कुछ लोगों को इसका स्वाद पसंद नहीं आता है लेकिन यह विटामिन बी12 तत्व से भरपूर होता है। बकरी के दूध में मौजूद डायट्री फैट अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को कम करता हैं।

बादाम दूध - शाकाहारी लोग, जो पशु के दूध का सेवन नहीं करते हैं और जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी है, वह महिलाएं बादाम दूध का सेवन कर सकती हैं। यह ग्राउंड आलमंड और पानी से बना होता है और आइक्यू डेवलपमेंट के लिए फायदेमंद होता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान बादाम दूध बहुत फायदेमंद साबित होता है। हालांकि बादाम दूध में कैल्शियम कम होता है, इसमें फोलिक एसिड भरपूर होता है, जो कि गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक है।

सोया मिल्क - यह दूध पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है और यह सोयाबीन को पानी में भिगोकर तैयार किया जाता है। इसमें गाय के दूध के समान ही कैल्शियम होता है और यह एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी फैट से भरपूर होता है।

आप जिस भी दूध का सेवन करें, वह पाश्चुराइज होना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान पाश्चुराइज दूध न सिर्फ मां को पशुओं की अवांछित वसा से संरक्षण प्रदान करता है बल्कि उनके हृदय पर पड़ने वाले दबाव को भी कम करता है।

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गर्भावस्था के दौरान किस प्रकार के दूध के सेवन से बचना चाहिए? (What Kind Of Milk Should Be Avoided in Hindi?)

– गाय और बकरी का कच्चा दूध बिना उबालें न पीएं।

– उबालने से दूध में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं और इससे उन्हें शरीर में प्रवेश करने से रोका जा सकता है।

– अन-पाश्चुराइज्ड दूध में अवांछनीय एंजाइम होते हैं और एनिमल फैट से बचा जाना चाहिए।

– गर्भावस्था में पाश्चचराइज दूध बहुत आवश्यक है क्योंकि यह न सिर्फ बैक्टीरिया को नष्ट करता है बल्कि ऊष्मा प्रतिरोधक बैक्टीरिया को भी नष्ट करता है और इसलिए यह बहुत आवश्यक है।

– लो-फैट और स्किमड मिल्क गर्भावस्था के दौरान उपयुक्त होता है।

– गाढ़ा दूध जिसमें कम पानी होता है, उसे पचाना मुश्किल हो सकता है और इससे हार्ट बर्न और एसिडिटी होती है।

– दूध का सेवन करने से पहले उसे पतला करना आवश्यक है और इसका अनुपात पानी के साथ 2:1 होना चाहिए।

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गर्भावस्था के दौरान दुग्ध उत्पाद आवश्यक है (Milk Products Essential For Pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान दूध और दुग्ध उत्पादों का सेवन मापकर और संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान रोजाना 1000 मिलीग्राम (तीन कप दूध) पर्याप्त होता है। गर्भावस्था के दौरान रोज़ाना दो कप पनीर (कौटेज चीज़) का सेवन करना आवश्यक है। इसमें लैक्टोज़ की कम मात्रा होती है और इसलिए लैक्टोज़ के प्रति अति-संवेदनशील महिलाएं भी इसका सेवन कर सकती हैं।

– गर्भावस्था के दौरान योगर्ट का सेवन करना भी सेहत के लिए फ़ायदेमंद है।

– गर्भावस्था के दौरान रोजाना एक कप चीज़ से शिशु के वृद्धि और विकास में सहायता मिलती है।

– मौजरेला, परमेज़न और अन्य प्रोसेस्ड चीज का सेवन करना सुरक्षित है।

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निष्कर्ष (Conclusion)

अपनी गर्भावस्था की योजना बनाना और आहार योजना तैयार करना अच्छा विचार है लेकिन बेहतर होगा कि गर्भावस्था के दौरान आप अपने डॉक्टर की सलाह माने और उनके सुझाव अनुसार आहार योजना तैयार करें। अब आप जान चुके हैं कि गर्भावस्था के दौरान दूध पीना सुरक्षित है और इस दौरान पाश्चुराइज दूध का सेवन करें। सही चुनें बेफिक्र रहें और इस दौर का आनंद उठाएं। 

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