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जानिए कोल्‍ड और फ्लू में क्‍या हैं अंतर ?

बदलते मौसम के चलते सर्दी खांसी काफी आम है। ऐसे में हमें कोल्‍ड हो जाता है तो काफी लंबे समय तक चलता है। कोल्‍ड और फ्लू एक तरह से समान है। ये दोनों सांस संबंधित बीमारी है। जुकाम को आमतौर पर नैसोफैरिनजाइटिस, राइनोफैरिनजाइटिस और नजले के नाम से ही जाना जाता है। लेकिन हमारे लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि फ्लू और कोल्‍ड में क्‍या फर्क है। आम सर्दी एक वायरल संक्रमण होता है जो ऊपरी श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। जुकाम की तुलना में फ्लू के रोगी की हालत ज्यादा गंभीर होती है और कभी-कभी फ्लू जानलेवा भी हो सकता है।

1) कोल्ड कैसे होता है - how cold catch you in hindi 
२) कोल्‍ड के लक्षण - sign of cold in hindi 
३) फ्लू के लक्षण - sign of flu in hindi
४) कोल्‍ड से ऐसे करें बचाव - How to prevent from colds in hindi 
५) फ्लू से ऐसे करें बचाव - how to prevents from flu in hindi 

कोल्‍ड के लक्षण : 

जुकाम आपकी नाक और गले का वायरल संक्रमण है। यह आमतौर पर हानिकारक होता है। कोल्‍ड कई प्रकार के वायरस के कारण होता है। जुकाम-सर्दी के लक्षण आम तौर पर ठंड की वजह से पैदा होते हैं। जब इंसान ठड होने वाले वायरस के संपर्क में आता है तो उसको सर्दी लग जाती है। कई बार इसके लक्षण एक से तीन दिन बाद दिखाई देते हैं। जब हमें जुकाम शुरू होने वाला होता है तो सबसे पहले हमारे गले की नली में खराश और जलन होती है। इसके बाद नाक से पानी बहना शुरू हो जाता है। कई बार जुकाम के कारण हमें हल्‍का बुखार भी आता है। कामन कोल्ड एक संक्रामक बीमारी है। जो कि संक्रमित व्यक्ति के हाथों में अकसर वायरस चिपक जाते हैं, जो फिर टेलीफोन, कुर्सी और दूसरी जगहों पर फैल जाते हैं और संक्रमण का कारक बनते हैं। ऐसे में हमें खुद का बचाव करने की जरूरत होती है।

 

फ्लू के लक्षण:

फ्लू के दौरान सबसे पहले रोगी की सांस नली प्रभावित होती है इसलिए उसे गले में खराश, खांसी, छींक आदि की समस्‍या होती है। इसके अलावा नाक बंद होना, लगातार नाक बहना, सिर दर्द होना और मांसपेशियों में दर्द होना फ्लू के सामान्य लक्षणों में से एक है। फ्लू के कारण कई बार लोगों को जान का खतरा भी होता है। इसे बुखार के रूप में भी जाना जाता है अधिकांश फ्लू-संबंधी बुखार लगभग 100 डिग्री से लेकर 104 डिग्री तक होता है। बच्चों का तापमान इससे भी ज्यादा हो सकता है। फ्लू से साइनस और कान संक्रमण, निमोनिया और सेप्सिस हो सकता है। फ्लू संबंधी खांसी लगभग दो सप्ताह तक रह सकती हैं। ऐसे कई वायरस होते हैं जो कि सर्दी और फ्लू दोनों का कारण बन सकते हैं, जिनके कण हमारे खून में रह जाते हैं। जब इसके वायरस खून की कोशिकाओं में मिल जाते हैं तो सामान्य उपचार के कारण बाहर नहीं निकल पाते।

 

कोल्‍ड से ऐसे करें बचाव

कॉमन कोल्ड संक्रमण से फैलने वाली बीमारी है। इसलिए दौरान हमें काफी सचेत रहना होता है और अपने आप को लोगों के संपर्क में आने से बचाना होता है। ऐसे में हाथ धोना बहुत ज़रूरी है। समय-समय पर हाथ धोना इसलिए भी ज़रूरी हो जाता है क्योंकि कामन कोल्ड से संक्रमित व्यक्ति के हाथों में अकसर वायरस चिपक जाते हैं।

यदि आपको कोल्ड हो गया है तो आप पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की कोशिश करें। विशेषज्ञों का मानें तो पानी से हमारा शरीर साफ होता है और शरीर में मौजूद टाक्सिन निकल जाते हैं। ऐसे में आप चाय, काफी और सूप जैसे गरम आहार का भी सेवन कर सकते हैं। इससे आपको आराम मिलेगा।

जब भी आपको छिंक आए तो उस समय किसी कपड़े, रूमाल या टिशू का इस्‍तेमाल करें। इससे आपके किटाणु आस-पास के लोगों के संपर्क में नहीं आएंगे।

आप चाहें तो डिटॉल वाइप्‍स का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

कोल्ड से ग्रसित व्यक्ति को वैसे भी कुछ करने का मन नहीं करता है ऐसे उसके शरीर के लिए ताजी हवा काफी जरूरी होती है। कमरे के अंदर का नम माहौल कीटाणु के लिए स्टोरहाउस जैसा काम करता है। व्यक्ति को प्रतिदिन ताज़ी हवा लेना ज़रूरी होता है।

कोल्‍ड में आपको चेहरे और नाक पर खुजली जैसा महसूस होगा, लेकिन कोशिश करें कि आप बार-बार अपना चेहरा न छुएं।

कोल्ड से ग्रसित व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में कच्चे फल और सब्ज़ियां खानी चाहिए क्योंकि यह शरीर की प्रतीरक्षा प्रणाली के लिए अच्छे होते हैं। इसमें गहरे हरे, पीले और लाल रंग की सब्ज़ियां आती हैं जो कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को साफ करती हैं।

 

फ्लू से ऐसे करें बचाव

फ्लू से ग्रस्‍त लोगों को अपनी ज्‍यादा देखभाल करने की जरूरत होती है। यदि कोई इससे ग्रस्‍त है तो सबसे पहले डॉक्‍टर के पास जाकर एक बार जरूर दिखाएं। चिकित्‍सक आपको आपके संक्रमण के हिसाब से टीका देगा। जिससे इसके बढ़ने की संभावना कम होगी।

फ्लू एक संक्रामक रोग है इसलिए इसके मरीज को संपर्क में आने से उसके खांसने, छींकने या छूने से ये रोग तेजी से फैल जाता है। इसलिए इस तरह के लक्षणों को कभी भी नजर अंदाज न करें।

इंफ्लुएंजा से बचाव के लिए इसका टीका लगवाना सबसे आसान उपाय है। सर्दियों और बरसात के दौरान इसका खतरा बढ़ जाता है। खासकर बच्चे और बूढ़े फ्लू के वायरस के संपर्क में जल्दी आते हैं। इसके साथ यदि कोई महिला गर्भवती है तो वह वक्‍त से पहले ही इसका टीका लगवा ले। ताकि उसके होने वाले बच्‍चे पर इसका असर न हो।

फ्लू के वायरस गंदगी के कारण और भी तेजी से पनपते हैं। इसलिए अगर आपके आसपास फ्लू का वायरस फैल रहा है तो आपनी साफ-सफाई का ध्‍यान रखना हामरी ही जिम्‍मेदारी है। ऐसे में हाथों को सैनिटाइज करना चाहिए। पब्लिक प्लेस पर जाने से पहले अपने चेहरे पर मास्‍क लगाना चाहिए। इसके अलावा आपको हमेशा छींकते और खांसते समय मुंह पर रुमाल रखना चाहिए। इसके अलावा आपको ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो आपकी इम्यूनिटी पावर यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।

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