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चुकंदर है प्रेग्नेंसी में फ़ायदेमंद—जानें इसके लाभ और संभावित दुष्प्रभाव (Benefits And Side Effects Of Beetroot In Pregnancy In Hindi)

लाल और रूबी रंग का चुकंदर एक ऐसी सब्जी है, जो पौष्टिक तत्वों से भरपूर होती है। चुकंदर के अनेकों स्वास्थ्य लाभ हैं। यह आयरन से भरपूर होता है और एनिमिया से बचाता है, रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है,‌ सूजन कम करता है और गर्भावस्था से संबंधी दर्द का उपचार करता है। साथ ही यह अपच से बचाव करता है और भ्रूण को पोषित करता है व‌ जन्म विकारों से बचाव करता है।

इस लेख में हम चुकंदर के स्वास्थ्य लाभ और गर्भावस्था के दौरान चुकंदर के जूस से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में चर्चा करेंगे।

लेख की विषय सूची

चुकंदर क्या है? (What Is Beetroot in Hindi?)

चुंकदर के पौष्टिक गुण (Nutritional Value Of Beetroot in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान चुकंदर (Beetroot In Pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के आहार में चुकंदर शामिल करने के विभिन्न तरीके (Various Ways To Include Beetroot In Pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान चुकंदर और चुकंदर के जूस के फायदे (Benefits Of Beetroot And Beetroot Juice In Pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान चुकंदर और चुकंदर के जूस के दुष्प्रभाव (Side Effects Of Beetroot And Beetroot Juice In Pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान चुकंदर की सुझावित मात्रा (Recommend Beetroot In Pregnancy in Hindi)

चुकंदर क्या है? (What Is Beetroot in Hindi?)

चुकंदर एक मूसला जड़ वाली सब्जी है जिसका वानस्पतिक नाम बीटा वल्गैरिस है। यह चुकंदर के पौधे की जड़ों के रूप में उगता है। चुकंदर के चार मुख्य प्रकार है – लाल चुकंदर, हरा चुकंदर, सुनहरे चुकंदर और टेबल चुकंदर। यह ऐसे पौधे के रूप में उगते हैं, जिनकी जड़ों का सेवन किया जा सकता है।

शुरुआत में इसे रोमनों द्वारा वाइन का रंग गाढ़ा लाल करने के लिए उगाया गया था। इसका इस्तेमाल भोजन बनाने और दवाइयों में भी किया जाता है। व्यावसायिक रूप से चुकंदर का प्रयोग शर्करा एक्स्ट्रेक्ट करने के लिए किया जाता है क्योंकि मात्र चुकंदर ही एक ऐसी सब्जी है, जिसमें शर्करा की मात्रा अधिक होती है।

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चुंकदर के पौष्टिक गुण (Nutritional Value Of Beetroot in Hindi)

चुकंदर सुपरफूड की श्रेणी में आती हैं क्योंकि यह बहुत ही पौष्टिक सब्ज़ी है। अंग्रेजी में इसे “बीटरूट” के नाम से जाना जाता है। गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाती है। पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता पूरी करने के लिए आप अपने आहार में चुकंदर का जूस शामिल कर सकती हैं। चुकंदर में यह निम्न पौष्टिक तत्व निम्न मात्रा में उपलब्ध होते हैं:-

गर्भावस्था के दौरान चुकंदर (Beetroot In Pregnancy in Hindi)

अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या गर्भावस्था के दौरान चुकंदर का सेवन करना अच्छा है? क्या यह सुरक्षित और फायदेमंद है? क्या यह पौष्टिक हैं और क्या जिंदगी के इस महत्वपूर्ण दौर के दौरान यह शरीर के लिए आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनिरल्स से भरपूर है? हालांकि इसमें उच्च मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है लेकिन यह सुरक्षित है क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक लोड (जीएल) बहुत कम होता है। जीएल से अभिप्राय यह है कि भोजन की कितनी मात्रा का सेवन करने के बाद आपके ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ेगा। यह फाइबर और आयरन से भरपूर होता है। गर्भावस्था के दौरान चुकंदर का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें क्योंकि इससे आपके ऑक्सलेट का स्तर बढ़ सकता है।

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गर्भावस्था के आहार में चुकंदर शामिल करने के विभिन्न तरीके (Various Ways To Include Beetroot In Pregnancy in Hindi)

चुकंदर बहुत ही उपयुक्त जड़ वाली सब्जियों में से एक है। इसे गर्भावस्था के दौरान विभिन्न तरह से आहार में शामिल किया जा सकता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान शरीर की पौष्टिक आवश्यकताएं अधिक बढ़ जाती है।

चुकंदर में बेटायने होता है,‌ जिससे उल्टी और जी मिचलाने की समस्या हो सकती है। इसलिए गर्भावस्था के प्रथम तिमाही में इसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि हम में से अधिकतर महिलाएं इस समस्या से प्रभावित होती है।

गर्भावस्था के दौरान अपने आहार में चुकंदर शामिल करने के कुछ तरीके इस प्रकार है:

– खीरा, प्याज़ जैसी सब्ज़ियाँ या सेब और अनार जैसे फलों के साथ चुकंदर का सलाद बनाने के लिए इसे छोटे टुकड़ों में काटें।

– इसे उबालें और भोजन के साथ इसका सेवन करें।

– इससे डिप और चटनी भी बनाई जा सकती है।

– अगर आपको मीठा खाना पसंद है, तो आप इससे स्मूदी, शेक और टेस्टी हलवा बना सकती है।

– चुकंदर को आटे में मिलाकर इससे परांठे बनाए जा सकते हैं।

– चुकंदर को सब्जियों के साथ या सब्जियों के बिना उबालकर इसका सूप तैयार किया जा सकता है।

– गर्भावस्था के दौरान चुकंदर का जूस बहुत फ़ायदेमंद होता है और इसका स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसमें टमाटर व गाजर शामिल कर सकती हैं।

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गर्भावस्था के दौरान चुकंदर और चुकंदर के जूस के फायदे (Benefits Of Beetroot And Beetroot Juice In Pregnancy in Hindi)

चुकंदर को कच्चा खाना या अन्य सब्जियों के साथ पकाना आपके और आपके बढ़ते भ्रूण के लिए फ़ायदेमंद साबित हो कता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान कुछ विशेष बातों को ध्यान में रखते हुए चुकंदर के जूस का सेवन किया जाना चाहिए।

हाल ही के कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान चुकंदर का सेवन करना फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें कई पौष्टिक तत्व होते हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि चुकंदर में रेशे होते हैं और इससे मल त्याग करने में भी आसानी होती है। साथ ही चुकंदर को चबाने से आपको संतुष्टि भी मिलती है, जो जूस में नहीं मिल पाती है।

गर्भावस्था के दौरान चुकंदर का रस बनाने के लिए यह आवश्यक है कि आप जूस बनाने से पहले 20-30 मिनट तक ठंडे पानी में चुकंदर भिगोएं। स्टेनलेस स्टील के चाकू से इसे छिल दे। इसे छोटे टुकड़ों में काटें और इसका रस‌‌ निकालें। चुकंदर के जूस के दुष्प्रभावों से बचने के लिए आपको कभी भी फौरन इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इसे रेफ्रिजरेटर या गर्म जगह पर 2-3 घंटे ऐसे ही रहने दें। चुकंदर को पानी के साथ 1:1 के अनुपात में मिलाकर इसका सेवन किया जाना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान चुकंदर के जूस को पानी में मिलाकर इसकी 120-130 मिलीलीटर मात्रा का सेवन किया जाना चाहिए।

चुकंदर के कुछ फ़ायदे इस प्रकार है:

आयरन का उत्तम स्त्रोत - गर्भावस्था के दौरान आहार में चुकंदर शामिल करना फ़ायदेमंद हो सकता है क्योंकि इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में होता है। इससे गर्भवती महिला का हिमोग्लोबिन बढ़ता है। खून की कमी न एनिमिया से शिशु पर विचार आपके शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। चूंकि गर्भावस्था के दौरान एनिमिया एक आम समस्या है और इसलिए आयरन की उपयुक्त मात्रा ग्रहण करना भी आवश्यक है।‌

कैल्शियम और सिलिका का उत्तम स्त्रोत - गर्भावस्था के दौरान चुकंदर आपको ओस्टियोपोरोसिस से बचा सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियाँ कमजोर हो जाती है। चुकंदर कैल्शियम और सिलिका से भरपूर होता है जिससे हड्डियों और दाँतों को पर्याप्त मात्रा में यह पौष्टिक तत्व मिल जाते हैं।‌

विटामिन-सी का उत्तम स्त्रोत - गर्भावस्था के दौरान चुकंदर का सेवन करना फ़ायदेमंद होता है क्योंकि इसमें विटामिन सी की उपयुक्त मात्रा होती है और इससे आपको स्वस्थ गर्भावस्था और प्रसव में आसानी होती है।

फोलिक एसिड से भरपूर - चुकंदर जन्म विकारों के जोख़िम को कम करता है। टिशूज की वृद्धि के लिए फोलिक एसिड की आवश्यकता होती है। आपके शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में और गर्भावस्था के शुरुआती चरण में भ्रूण के स्पाइनल कॉर्ड के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गर्भावस्था के दौरान चुकंदर का सेवन करने से फोलिक एसिड की उपयुक्त मात्रा प्राप्त होती है और स्पाइनल कॉर्ड का विकास उचित प्रकार से होता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार - चुकंदर एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। बेटानिन नामक पिगमेंट के कारण ही चुकंदर लाल रंग का होता है और यह एंटीओक्सिडेंट से भरपूर होता है। इसमें अन्य एंटीओक्सिडेंट, पोलीफेनॉल और आवश्यक पौष्टिक तत्व भी शामिल हैं। गर्भावस्था के दौरान चुकंदर प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है और हानिकारक संक्रमण व टोक्सिन से संरक्षण प्रदान करता है।

ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करना - शर्करा का उत्तम स्त्रोत होने के बावजूद चुकंदर लो-ग्लाइसमिक होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चुकंदर में मौजूद शर्करा को अवशोषित होने और परिवर्त्तित होने में समय लगता है। इसलिए चुकंदर ब्लड शुगर के स्तर को फौरन बढ़ने से रोकता है।

सूजन कम करना - गर्भावस्था के दौरान जोड़ों में दर्द, हाथ और पैरों में सूजन एक आम समस्या होती है। चुकंदर में मौजूद बेटायने में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते है, जिससे सूजन कम होती है।

मैटाबॉलिज्म बढ़ाना - चुकंदर में पोटैशियम होता है। यह इलैक्ट्रोलाइटस को नियंत्रित करता है और शरीर की मैटाबॉलिक गतिविधि को नियंत्रित करता है। गर्भावस्था के दौरान चुकंदर का सेवन करने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।

रक्त को शुद्ध करना - चुकंदर में रक्त को शुद्ध करने की क्षमता होती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान चुकंदर आपको और आपके शिशु को संक्रमण और बीमारियों से संरक्षण प्रदान करता है क्योंकि यह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन ए, विटामिन बी और घुलनशील फाइबर से भरपूर होता है, इससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और शक्ति मिलती है।

पाचन शक्ति बढ़ाएं - चुकंदर फाइबर से भरपूर होता है इसलिए गर्भावस्था के दौरान इससे कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।

भ्रूण का स्वस्थ विकास - इसमें सभी आवश्यक पौष्टिक तत्व होते हैं, जो कि बढ़ते भ्रूण के विकास के लिए अति आवश्यक होता है। खासतौर पर विटामिन ए और ई उच्च दर पर शिशु का विकास सुनिश्चित करते हैं।

स्वस्थ लीवर - बीटासाइनिन, चुकंदर में मौजूद इस पिगमेंट में लीवर को डिटोक्सिफाई करने की क्षमता होती है। यह फेटी एसिड समेत शरीर से कई टोक्सिन बाहर निकाल देता है। इससे लीवर को स्वस्थ रखने में और पाचन में मदद मिलती है।

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गर्भावस्था के दौरान चुकंदर और चुकंदर के जूस के दुष्प्रभाव (Side Effects Of Beetroot And Beetroot Juice In Pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान चुकंदर और चुकंदर का जूस आपको कोई नुक्सान नहीं पहुँचता है। लेकिन कुछ मामलों में इसके दुष्प्रभाव देखे जा सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान यह आवश्यक है कि चुकंदर का सेवन करने से पहले आप अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। चुकंदर के कुछ दुष्प्रभाव इस प्रकार है:-

– चुकंदर में नाइट्रेट की कुछ मात्रा होती है। गर्भावस्था के दौरान चुकंदर का सेवन करने से कमज़ोरी और चक्कर आ सकतें हैं।

– चुकंदर में मौजूद ऑक्सलेट के कारण किडनी में पथरी हो सकती है।

– चुकंदर में बेटायने होता है , जिससे गर्भावस्था के दौरान जी मिचलाना, उल्टी, दस्त और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं हो सकती है।

– अत्याधिक मात्रा में चुकंदर के जूस का सेवन करने से आपके वोकल कॉर्ड थोड़ी देर के लिए पैरालिस हो सकते हैं।

– अधिक मात्रा में चुकंदर का सेवन करने से मल और पेशाब लाल रंग की हो जाती है और इस स्थिति को बीटयूरिया कहा जाता है।

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गर्भावस्था के दौरान चुकंदर की सुझावित मात्रा (Recommend Beetroot In Pregnancy in Hindi)

आपको गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जाती है और इसलिए चुकंदर को आहार में शामिल करना बहुत फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। यह जानना भी आवश्यक है कि इसके अधिकतम स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए इसे उचित प्रकार से ग्रहण करना आवश्यक है। उचित मात्रा में इसका सेवन करना आपके लिए फायदेमंद होगा क्योंकि सभी का शरीर भिन्न होता है और उसी प्रकार शारीरिक आवश्यकताएं भी अलग होती है। इसलिए इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। साथ ही संतुलित मात्रा और सावधानियों पर ध्यान दें। 

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