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प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीनों में बरतें यह सावधानी व इन तरीकों से रखें अपना ध्यान

प्रेग्नेंसी के बारे में पता चलते ही सलाह का सिलसिला शुरू हो जाता है। इधर-उधर से आने वाली सलाहों से कई बार कन्फ्यूजन बढ़ जाता है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि मां बनने वाली महिला को यह पता हो कि उसे कब क्या करना चाहिए? और क्या नहीं? डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने बहुत अहम होते हैं। अगर इस दौरान महिला सावधानी बरतें, तो उनका बच्चा ना ही प्रीमैच्योर होता है और ना ही शारीरिक रूप से विकलांग। इन्हीं शुरुआती 3 महीनों के बारे में आज हम बात करने वाले है। तो आइए जानते हैं इन तीन नाज़ुक महीनों में आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

◆ हलके में न लें

डॉक्टरों के मुताबिक, कई महिलाएं गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने यानी फर्स्ट ट्राइमेस्टर को बेहद हलके में लेती हैं, जबकि यह समय सबसे जरूरी होता है। इसी दौरान गर्भ में भ्रूण का विकास होना शुरू होता है। आपका शरीर कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलावों से गुजरता है। ये महीने सबसे ज्यादा चुनौती-भरे भी होते हैं, क्योंकि इस दौर में होने वाले बदलाव आपके लिए बिल्कुल नए होते हैं। खाने के टेस्ट और स्किन में भी बदलाव आने लगते हैं। मानसिक रूप से चिड़चिड़ापन भी स्वाभाविक है। इस वक्त पति को खासतौर पर धैर्य रखना चाहिए और पत्नी का सहारा बनना चाहिए। इन्हीं महीनों में अबॉर्शन की आशंका भी सबसे ज्यादा होती है।

◆ इनका रखें सबसे ज्यादा ख्याल

डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में ज्यादा भीड़भाड़, प्रदूषण और रेडिएशन वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए। ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर ट्रैवलिंग करने से भी बचें। मॉर्निंग सिकनेस से बचने के लिए नींबू-पानी या अदरक की चाय पी जा सकती हैं। दिनभर में चार या पांच बार तरल चीजें, जैसे छाछ, नींबू-पानी, नारियल पानी, फलों का जूस या शेक पीएं। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। इन तीन महीनों में बच्चे के अंग बनने शुरू होते हैं। ऐसे में खाने की मात्रा से ज्यादा उसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

◆ तैयार करें डाइट चार्ट

शुरुआती तीन महीनों में प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन से भरपूर चीजें ज्यादा खानी चाहिए। अपने खाने में दाल, पनीर, अंडा, नॉनवेज, सोयाबीन, दूध, दही, पालक, गुड़, अनार, चना, पोहा, मुरमुरे को शामिल करें। फल और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ भी खूब खाए। शरीर में पानी की कमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, क्योंकि डिलीवरी के वक्त काफी खून की जरूरत पड़ती है। बच्चा भी फ्लूइड में ही रहता है। हर 2 से 3 घंटों में नियमित मात्रा में कुछ ना कुछ ज़रूर खाते रहें। बच्चे के सही विकास के लिए आपको अपना वजन भी पहले तीन महीनों में आधा से लेकर 2 किलो तक बढ़ाना चाहिए।

◆ ओमेगा से भरपूर आहार

बच्चे के मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और आंखों के विकास के लिए अपने आहार में ओमेगा-3 फैटी एसिड के सेवन को भी बढ़ाएँ। बच्चे के दिमाग के विकास के लिए ओमेगा-3 और ओमेगा-6 बहुत जरूरी है। फिश लिवर ऑयल, ड्राइफ्रूट्स, हरी पत्तेदार सब्जियों और सरसों के तेल में यह अच्छी मात्रा में मिलता हैं। आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां खाना भी शुरू कर दें। इससे शरीर में खून की कमी नहीं होती है।

◆ शुरुआती 3 महीनों में इनसे बचें

- कई बार महिलाएं डॉक्टर की सलाह लिए बिना कुछ दवाइयाँ खाना भी शुरू कर देती हैं। लेकिन दवा के गर्भनाल के माध्यम से बच्चे के खून में प्रवेश करने की आशंका रहती है। इसलिए पहले तीन महीनों में डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा ना खाएं।

- इस दौरान कच्चे मांस, कच्चे अंडे और पनीर के सेवन से भी पहरेज करें, क्योंकि इनमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया आपके शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

- बड़े शहरों में प्रदूषण की समस्या बेहद गंभीर है। हवा में फैले हानिकारक कणों के चलते गर्भपात की आशंका भी बनी रहती है।

- शराब और सिगरेट का सेवन न करें। सिगरेट पीने वालों से भी दूर रहें। शराब गर्भनाल के माध्यम से बच्चे के खून में प्रवेश करके उसके शारीरिक और मानसिक विकास में कई तरह की बाधाएं पैदा कर सकती है।

- तनाव भी आपके गर्भ में पल रहे शिशु के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। गर्भावस्था की शुरुआत में कई कारणों के चलते कई महिलाएं तनाव में रहने लगती हैं, जिसका बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इसके चलते कई बार गर्भपात भी हो जाता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके, खुश रहें।

- अच्छा म्यूजिक सुनें, अच्छी किताबें पढ़ें, अपने आप को व्यस्त रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक्सरसाइज करें।

- गर्भावस्था के दौरान डाइटिंग न करें। इससे शरीर में आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन, कई तरह के खनिजों और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।

- इस दौरान हॉट टब और सॉना बाथ का उपयोग भी ना करें, क्योंकि इससे आपके शरीर का तापमान अचानक बढ़ सकता है। इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जो बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

- प्रेग्नेंसी के दौरान किसी खास चीजें खाने का मन ज्यादा करने लगता है। ऐसे में किसी एक ही चीज़ को बार-बार खाने के बजाय बाकी चीजों को भी आहार में शामिल करें।

- ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना न खाएं। इससे गैस और पेट में जलन हो सकती है। जो भी खाएं, फ्रेश खाएं। बाहर के खाने से इंफेक्शन होने का ख़तरा होता है, इसलिए बाहर खाने से बचें।

◆ इन बातों का भी रखें खास ख्याल

- भारी वजन न उठाएं

- ज्यादा डांस न करें

- सीढ़ियां नहीं कूदें

- हील न पहनें

- ज्यादा ड्राइविंग न करें

- लंबी यात्रा न करें

- रस्सी न कूदें

- कमर से झुकने के बजाय घुटने मोड़कर बैठें

निष्कर्ष

गर्भावस्था का यह दौर बहुत नाज़ुक होता है और ऐसे में यदि आप अपने खान-पान और इन मुख्य बातों का ध्यान रखेंगी, तो आपका शिशु स्वस्थ होगा और आपको तथा आपके गर्भ में पल रहे शिशु के विकास और वृद्धि में कोई समस्या नहीं आएगी इसलिए इन बातों का पालन करें और समस्या होने पर फौरन डॉक्टर से संपर्क करें।

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